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समाचार1
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चौडगरा (फतेहपुर)। एक बाद एक नेशनल हाईवे पर हुए जोरदार दो धमाके मौहारवासी आजीवन भूल नहीं पाएंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि पचास साल पहले हुआ भीषण हादसा लोगों की जेहन से धूमिल हो चुका था, लेकिन रविवार को हुए हादसे पुराने हादसे की याद एक बार फिर से ताजा कर दी है। गांव के हर गली में रोडवेज हादसे पर चर्चा है। गांव में मातम जैसा माहौल है।
मौहार गांव के उत्तरी किनारे से नेशनल हाईवे गुजरता है। यहां से वाहनों के गुजरने का सिलसिला चौबीस घंटे जारी रहता है। छिटपुट हादसे होना आम बात है, लेकिन रविवार को ट्रक की रोडवेज बस से भीषण भिड़ंत ने पूरे गांव की रूह कंपा दी है। बस सवार 40 यात्रियों की चीख-पुकार सुन उन्हें बचाने के लिए पूरा गांव हीं नहीं टूटा, बल्कि
पड़ोसी गांव में फोन कर लोगों को मदद के लिए बुलाया गया। मौहार गांव के रहने वाले राजकिशोर सिंह, शिवम सिंह, गोलू सिंह, सिद्धार्थ, जीतेंद्र, अनुभव ने बताया कि दुर्घटना होने के पांच से सात मिनट के अंदर मौके पर पहुंच गए थे। यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर कुछ क्षणों तक क्या किया जाए, कुछ दिमाग में ही नहीं आया। इसके बाद खून से लथपथ यात्रियों को निकालने का काम शुरू किया गया। हालात देखकर रूह कांप गई। बचाव करने वाले शायद ही किसी ग्रामीण ने दुर्घटना वाले दिन की शाम खाना खाया हो। बताया कि अभी शांत होकर बैठने में लगता है कि हाईवे पर दुर्घटना हो गई है और यात्रियों की चीख-पुकार मची है।
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बस हादसा को आजीवन नहीं भूल पाएंगे मौहारवासी
अभी तक लोगों के कानों में गूंज रही धमाके की गूंज, दूसरे दिन भी गांव में मातम जैसा माहौल रहा
अमर उजाला ब्यूरो
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मौहार गांव के उत्तरी किनारे से नेशनल हाईवे गुजरता है। यहां से वाहनों के गुजरने का सिलसिला चौबीस घंटे जारी रहता है। छिटपुट हादसे होना आम बात है, लेकिन रविवार को ट्रक की रोडवेज बस से भीषण भिड़ंत ने पूरे गांव की रूह कंपा दी है। बस सवार 40 यात्रियों की चीख-पुकार सुन उन्हें बचाने के लिए पूरा गांव हीं नहीं टूटा, बल्कि
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पड़ोसी गांव में फोन कर लोगों को मदद के लिए बुलाया गया। मौहार गांव के रहने वाले राजकिशोर सिंह, शिवम सिंह, गोलू सिंह, सिद्धार्थ, जीतेंद्र, अनुभव ने बताया कि दुर्घटना होने के पांच से सात मिनट के अंदर मौके पर पहुंच गए थे। यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर कुछ क्षणों तक क्या किया जाए, कुछ दिमाग में ही नहीं आया। इसके बाद खून से लथपथ यात्रियों को निकालने का काम शुरू किया गया। हालात देखकर रूह कांप गई। बचाव करने वाले शायद ही किसी ग्रामीण ने दुर्घटना वाले दिन की शाम खाना खाया हो। बताया कि अभी शांत होकर बैठने में लगता है कि हाईवे पर दुर्घटना हो गई है और यात्रियों की चीख-पुकार मची है।
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बस हादसा को आजीवन नहीं भूल पाएंगे मौहारवासी
अभी तक लोगों के कानों में गूंज रही धमाके की गूंज, दूसरे दिन भी गांव में मातम जैसा माहौल रहा
अमर उजाला ब्यूरो