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अपनों के मोह में मारा गया ललित पटेल

Mon, 07 Aug 2017 11:56 PM IST
Updated Mon, 07 Aug 2017 11:56 PM IST
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अपनों के मोह में मारा गया ललित पटेल
अपनों के मोह में मारा गया डाकू ललित
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पुलिस ने कई दिनों से भाई और बहनोई को हिरासत में रखा था
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। तीन लोगों को जिंदा जलाकर मार देने के बाद सुर्खियों में आया 50 हजार का इनामी डाकू ललित पटेल गैंग के तीन साथियों के पकड़े जाने से कमजोर पड़ गया था। बताया जाता है कि उस दौरान मध्य प्रदेश पुलिस ने पांच डाकुओं को पकड़ा था। इसमें से तीन की गिरफ्तारी दिखाई, जबकि दो को हिरासत में रखकर गैंग सरगना के बारे में पूछताछ करते रहे। सूत्र बताते हैं कि इनमें एक ललित का एक भाई दूसरा बहनोई था। पुलिस ने इन्हीं दोनों को मोहरा बनाया और ललित को मार गिराने में कामयाबी पाई।

छोटे-मोटे अपहरण और रंगदारी की घटना के बाद अचानक तीन लोगों को जिंदा जलाकर मार देने के बाद कुख्यात हुए डाकू ललित पटेल को अपनों के मोह ने ही मौत दिला दी। बताया जाता है कि गैंग में उसका भाई और बहनोई भी शामिल था। कुख्यात डाकू ठोकिया और बलखड़िया ने कभी परिवार व अपनों का मोह नहीं किया। एसटीएफ ने ठोकिया के भाई दीपक को पकड़ कर छह माह तक कैद रखा और हाजिर होने का दबाव बनाती रही, लेकिन ठोकिया पुलिस तक नहीं पहुंचा। इसकी पुष्टि जेल से छूटकर आए दीपक ने पत्रकारों के सामने की थी। कुछ ऐसी ही योजना चित्रकूट के एसडीओपी रह चुके वर्तमान सतना एसपी राजेश हिंगडकर ने बनाई। सूत्र बताते हैं कि बांदा के बबेरू से डाकू ललित के सगे रिश्तेदार और एक भाई को मप्र पुलिस कई दिनों से हिरासत में रखकर सरगना पर दबाव बना रही थी। बताया जाता है कि दोनों को छोड़कर सरगना तक संदेश भिजवाया कि वे आजाद होकर गांव आ गए हैं। पुलिस की इस चाल में ललित फंस गया। वह पौशलहा और पोखरवार के जंगल में पहुंच गया। पहले से सतर्क पुलिस के हत्थे चढ़ गया। इस प्रकार कुख्यात डाकू का अंत हो गया।
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