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पंडित जी की तेरहवीं तक नहीं हुई
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- फोटो : DEHAT
बिल्हौर। बिकरू और आसपास के गांवों में पंडित जी नाम से चर्चित कुख्यात विकास दुबे का एकदशा और तेरहवीं तक नहीं हो सकी। ग्रामीणों में एक ही चर्चा रही कि कुकर्मों के कारण ही विकास की अर्थी को चार कंधे तक नसीब नहीं हो सके। पुलिस के डर से उसके परिजनों ने अंतिम संस्कार की रस्में तक पूरी नहीं की हैं।
दो जुलाई को आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने के बाद 10 जुलाई को विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया था। उसके साथी अतुल दुबे, प्रेम प्रकाश, अमर दुबे, प्रभात, बउआ उर्फ प्रवीण दुबे भी एनकाउंटर में मारे गए थे। सभी के शवों का अंतिम संस्कार पुलिस अभिरक्षा में कराया गया था। इनमें से ज्यादातर के परिजन अंतिम संस्कार में नहीं रहे।
गुरुवार को विकास दुबे की तेरहवीं का दिन था। इसके बावजूद विकास दुबे की पत्नी अंजलि दुबे, पिता राम कुमार दुबे, मां सरला दुबे, भाई दीपू दुबे, भाई की पत्नी व बिकरू ग्राम प्रधान अंजलि दुबे व अन्य परिवारीजन पुलिस सख्ती के कारण गांव में नहीं पहुंचे। किसी भी परिजन या संबंधी ने विकास का एकदशा और तेरहवीं तक नहीं की। ग्रामीणों में गुरुवार को चर्चा रही कि लंबी फौज लेकर चलने वाले पंडित जी की तेरहवीं तक नहीं हो सकी।
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दो जुलाई को आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने के बाद 10 जुलाई को विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया था। उसके साथी अतुल दुबे, प्रेम प्रकाश, अमर दुबे, प्रभात, बउआ उर्फ प्रवीण दुबे भी एनकाउंटर में मारे गए थे। सभी के शवों का अंतिम संस्कार पुलिस अभिरक्षा में कराया गया था। इनमें से ज्यादातर के परिजन अंतिम संस्कार में नहीं रहे।
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गुरुवार को विकास दुबे की तेरहवीं का दिन था। इसके बावजूद विकास दुबे की पत्नी अंजलि दुबे, पिता राम कुमार दुबे, मां सरला दुबे, भाई दीपू दुबे, भाई की पत्नी व बिकरू ग्राम प्रधान अंजलि दुबे व अन्य परिवारीजन पुलिस सख्ती के कारण गांव में नहीं पहुंचे। किसी भी परिजन या संबंधी ने विकास का एकदशा और तेरहवीं तक नहीं की। ग्रामीणों में गुरुवार को चर्चा रही कि लंबी फौज लेकर चलने वाले पंडित जी की तेरहवीं तक नहीं हो सकी।
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