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साहब! अब हम गइयन की तरफ देखबे तक नाहीं
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अकबरपुर तहसील सभागार में डीएम व एसपी के सामने कान पकड़कर खड़े किसान।
- फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात। नबीपुर कान्हा गोशाला में छुट्टा मवेशियों को लेकर पहुुंचे नौ किसानों को हिरासत में लेने के मामले में गुरुवार को अफसरों ने उन्हें शांतिभंग में जमानत दी। रातभर हवालात में रहने के बाद डीएम व एसपी के सामने हाथ कान पकड़ कर गिड़गिड़ाए। फिलहाल इस घटना से जिले की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दल प्रशासन की इस कार्रवाई की घोर निंदा कर रहे हैं।
छुट्टा गोवंश से फसलें बचाने के लिए किसानों को रात दिन खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। सर्दी व कोहरे में किसानों ने पूरी रातें फसलों की रखवली में काट दी। समस्या से परेशान किसान बुधवार को छुट्टा गोवंश घेरकर कान्हा गोशाला नबीपुर पहुंचे थे। वहां गोवंश तो बंद नहीं किए गए बल्कि किसानों को ही पकड़ कर हवालात में बंद कर दिया गया। मोहाना गांव के बेटन दीक्षित, नंदू मिश्रा, कौशल दुबे, अरविंद सोनकर, रामू कछवाह समेत नौ किसान रात भर अकबरपुर कोतवाली में हवालात में बंद रहे। उनके परिजन अफसरों के यहां चक्कर काटते रहे। किसी अफसर ने किसानों के परिजनों से सीधे मुंह बात नहीं की।
गुरुवार की दोपहर बाद अकबरपुर तहसील सभागार में डीएम डा. दिनेश चंद्र, एसपी केशव कुमार चौधरी व एसडीएम राजीव राज के सामने किसानों को पेश किया गया। अफसर फटकार लगाते रहे और किसान उनके सामने हाथ जोड़े और कान पकड़े खड़े रहे। किसानों ने कहा कि अब वह गायों की तरफ देखेंगे भी नहीं। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया। विपक्षी राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों ने इस घटना कड़ी निंदा की। साथ ही ऐसे संवेदनहीन अफसरों पर कार्रवाई की मांग की।
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नबीपुर कान्हा गोशाला में अव्यवस्था हो रही थी। क्षमता से दो गुने गोवंश किसानों ने घेरकर पहुंचा दिए। उन्हें अन्य गोशाला में भेजकर व्यवस्थित कराया गया। इसके बाद फिर कुछ किसानों ने बल पूर्वक गोवंश ले जाकर वहां अंदर करा दिए। किसानों को दोबारा ऐसी गलती न करने की चेतावनी दी गई है ताकि व्यवस्था न बिगड़े।
- डा. दिनेश चंद्र, डीएम
किसानों पर कार्रवाई करने की जानकारी मिली है। ये गलत तरीका है। इस पर डीएम से बात करके किसानों को रिहा करा दिया गया है। किसानों के साथ किसी भी हाल में अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
- विनोद कटियार, भाजपा विधायक, भोगनीपुर
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छुट्टा गोवंश की समस्या से सरकार किसानों को निजात नहीं दिला पा रही है। इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले किसानों को जेल भेज दिया जाता है। सरकार व अफसरों की तानाशाही चल रही है। मोहाना व पतरा गांव के किसानों को हवालात में रखने व उन पर शांतिभंग की कार्रवाई की घोर निंदा की जाती है। -प्रमोद यादव, जिलाध्यक्ष सपा
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किसानों की समस्या सुनकर अफसरों को कोई रास्ता निकालना चाहिए था। जिन गांवों में समस्या अधिक है वहां अस्थाई आश्रय स्थल बनाए जा सकते हैं। किसान मजबूरी में गोवंश घेरकर कान्हा गोशाला नबीपुर गए थे। यह दर्द अफसरों को समझना चाहिए। ऐसा न करके किसानों को डराने की कोशिश की गई। यह मामला विधानसभा में उठवाया जाएगा।
-नरेश कटियार, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
एसडीएम झूठ बोल रहे या कोतवाल
किसानों पर कार्रवाई को लेकर अफसरों की किरकिरी शुरू हो गई है। अफसरों के भी सुर बदलने लगे। एसडीएम अकबरपुर राजीव राज व अकबरपुर इंस्पेक्टर के बयान विरोधाभासी रहे। एसडीएम ने कहा कि किसानों को अनिवार्य शर्त के साथ जमानत दी गई है कि वह भविष्य में ऐसी हरकतें नहीं करेंगे। साथ ही ऐसा करने पर उनकी जमानत निरस्त कर दी जाएगी। किसानों ने जमानती प्रार्थना पत्र दाखिल किए थे। इसके बाद जमानत मंजूर की गई है। जबकि कोतवाल ने कहा कि किसानों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। शांति व्यवस्था बिगड़ने जैसी कोई स्थिति नहीं थी। इससे उन पर शांतिभंग की कार्रवाई नहीं की गई है।
कान्हा गोशाला से भगाए जा रहे गोवंश
कानपुर देहात। नबीपुर कान्हा गोशाला में पिछले कई दिनों से दूर-दूर गांवों के किसान गोवंशों को घेरकर लाए थे। अब उन्हें रात में गोशाला से बाहर भगाया जा रहा है। जबकि जिले में 29 आश्रय स्थल संचालित हैं। इनमें से कई ऐसे हैं, जहां क्षमता से कम गोवंश हैं। उन आश्रय स्थलों में गोवंशों को भेजने के बजाय अफसर जिम्मेदारी से बच रहे हैं। गोशाला से भगाए गोवंश इस समय नबीपुर, जलालपुर, मोहाना, पतरा, कौसम, रघुनाथपुर, कटेठी आदि गांवों में किसानों को तबाह किए हैं। किसानों का कहना है कि जब एक जगह गोवंश एकत्र हो गए थे तो उनके लिए अलग से आश्रय स्थल बनवा दिया जाता। इससे किसानों को समस्या से छुटकारा मिल जाता।
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छुट्टा गोवंश से फसलें बचाने के लिए किसानों को रात दिन खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। सर्दी व कोहरे में किसानों ने पूरी रातें फसलों की रखवली में काट दी। समस्या से परेशान किसान बुधवार को छुट्टा गोवंश घेरकर कान्हा गोशाला नबीपुर पहुंचे थे। वहां गोवंश तो बंद नहीं किए गए बल्कि किसानों को ही पकड़ कर हवालात में बंद कर दिया गया। मोहाना गांव के बेटन दीक्षित, नंदू मिश्रा, कौशल दुबे, अरविंद सोनकर, रामू कछवाह समेत नौ किसान रात भर अकबरपुर कोतवाली में हवालात में बंद रहे। उनके परिजन अफसरों के यहां चक्कर काटते रहे। किसी अफसर ने किसानों के परिजनों से सीधे मुंह बात नहीं की।
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गुरुवार की दोपहर बाद अकबरपुर तहसील सभागार में डीएम डा. दिनेश चंद्र, एसपी केशव कुमार चौधरी व एसडीएम राजीव राज के सामने किसानों को पेश किया गया। अफसर फटकार लगाते रहे और किसान उनके सामने हाथ जोड़े और कान पकड़े खड़े रहे। किसानों ने कहा कि अब वह गायों की तरफ देखेंगे भी नहीं। इसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया। विपक्षी राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों ने इस घटना कड़ी निंदा की। साथ ही ऐसे संवेदनहीन अफसरों पर कार्रवाई की मांग की।
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नबीपुर कान्हा गोशाला में अव्यवस्था हो रही थी। क्षमता से दो गुने गोवंश किसानों ने घेरकर पहुंचा दिए। उन्हें अन्य गोशाला में भेजकर व्यवस्थित कराया गया। इसके बाद फिर कुछ किसानों ने बल पूर्वक गोवंश ले जाकर वहां अंदर करा दिए। किसानों को दोबारा ऐसी गलती न करने की चेतावनी दी गई है ताकि व्यवस्था न बिगड़े।
- डा. दिनेश चंद्र, डीएम
किसानों पर कार्रवाई करने की जानकारी मिली है। ये गलत तरीका है। इस पर डीएम से बात करके किसानों को रिहा करा दिया गया है। किसानों के साथ किसी भी हाल में अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
- विनोद कटियार, भाजपा विधायक, भोगनीपुर
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छुट्टा गोवंश की समस्या से सरकार किसानों को निजात नहीं दिला पा रही है। इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले किसानों को जेल भेज दिया जाता है। सरकार व अफसरों की तानाशाही चल रही है। मोहाना व पतरा गांव के किसानों को हवालात में रखने व उन पर शांतिभंग की कार्रवाई की घोर निंदा की जाती है। -प्रमोद यादव, जिलाध्यक्ष सपा
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किसानों की समस्या सुनकर अफसरों को कोई रास्ता निकालना चाहिए था। जिन गांवों में समस्या अधिक है वहां अस्थाई आश्रय स्थल बनाए जा सकते हैं। किसान मजबूरी में गोवंश घेरकर कान्हा गोशाला नबीपुर गए थे। यह दर्द अफसरों को समझना चाहिए। ऐसा न करके किसानों को डराने की कोशिश की गई। यह मामला विधानसभा में उठवाया जाएगा।
-नरेश कटियार, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
एसडीएम झूठ बोल रहे या कोतवाल
किसानों पर कार्रवाई को लेकर अफसरों की किरकिरी शुरू हो गई है। अफसरों के भी सुर बदलने लगे। एसडीएम अकबरपुर राजीव राज व अकबरपुर इंस्पेक्टर के बयान विरोधाभासी रहे। एसडीएम ने कहा कि किसानों को अनिवार्य शर्त के साथ जमानत दी गई है कि वह भविष्य में ऐसी हरकतें नहीं करेंगे। साथ ही ऐसा करने पर उनकी जमानत निरस्त कर दी जाएगी। किसानों ने जमानती प्रार्थना पत्र दाखिल किए थे। इसके बाद जमानत मंजूर की गई है। जबकि कोतवाल ने कहा कि किसानों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। शांति व्यवस्था बिगड़ने जैसी कोई स्थिति नहीं थी। इससे उन पर शांतिभंग की कार्रवाई नहीं की गई है।
कान्हा गोशाला से भगाए जा रहे गोवंश
कानपुर देहात। नबीपुर कान्हा गोशाला में पिछले कई दिनों से दूर-दूर गांवों के किसान गोवंशों को घेरकर लाए थे। अब उन्हें रात में गोशाला से बाहर भगाया जा रहा है। जबकि जिले में 29 आश्रय स्थल संचालित हैं। इनमें से कई ऐसे हैं, जहां क्षमता से कम गोवंश हैं। उन आश्रय स्थलों में गोवंशों को भेजने के बजाय अफसर जिम्मेदारी से बच रहे हैं। गोशाला से भगाए गोवंश इस समय नबीपुर, जलालपुर, मोहाना, पतरा, कौसम, रघुनाथपुर, कटेठी आदि गांवों में किसानों को तबाह किए हैं। किसानों का कहना है कि जब एक जगह गोवंश एकत्र हो गए थे तो उनके लिए अलग से आश्रय स्थल बनवा दिया जाता। इससे किसानों को समस्या से छुटकारा मिल जाता।