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भ्रष्टाचार की पाइपलाइनें: ठेकेदारों-नेताओं से मिलकर अफसरों ने पीया करोड़ों के घोटाले का ‘पानी’
Mon, 06 Sep 2021 09:55 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 06 Sep 2021 09:55 AM IST
सार
तेजी से गिरते भूजल स्तर को बचाने और इसके अंधाधुंध दोहन को रोकने के उद्देश्य से वर्ष-2007 में जेएनएनयूआरएम की जलापूर्ति परियोजना धरातल पर आई थी। इसके तहत गंगा के कच्चे पानी को शोधित कर पूरे शहर में जलापूर्ति की योजना थी।
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भ्रष्टाचार की पाइपलाइन
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कानपुर में जेएनएनयूआरएम (जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन) की जलापूर्ति परियोजना के दोनों चरणों में जल निगम के अफसरों ने ठेकेदारों और नेताओं के साथ मिलकर घोटाले का ‘पानी’ पीया। फिलहाल पहले चरण की जांच रिपोर्ट के आधार पर 24 अफसरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, पर शहरवासियों को जिस तरह जलापूर्ति हो रही है, उससे 869.08 करोड़ रुपये की पूरी परियोजना सवालों के घेरे में है।
इसी का नतीजा है कि शहर को 24 घंटे जलापूर्ति तो दूर, जरूरत के पानी के लिए भी सबमर्सिबल लगवाने पड़ रहे हैं। इससे भूगर्भ जलस्तर सालाना करीब 45 सेंटीमीटर लुढ़क रहा है। तेजी से गिरते भूजल स्तर को बचाने और इसके अंधाधुंध दोहन को रोकने के उद्देश्य से वर्ष-2007 में जेएनएनयूआरएम की जलापूर्ति परियोजना धरातल पर आई थी।
इसके तहत गंगा के कच्चे पानी को शोधित कर पूरे शहर में जलापूर्ति की योजना थी। सूत्रों के मुताबिक, कुछ सफेदपोशों की मिलीभगत से योजना का काम कराने के लिए ठेकेदारों के नाम लखनऊ से ही तय हो जाते थे। स्थानीय अफसरों से टेंडर प्रक्रिया पूरी कर उन्हीं ठेकेदारों को काम देने के निर्देश मिलता था। यही नहीं, गुणवत्ता से समझौता करने पर अफसरों को मोटा कमीशन भी मिलता था।
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इसी का नतीजा है कि शहर को 24 घंटे जलापूर्ति तो दूर, जरूरत के पानी के लिए भी सबमर्सिबल लगवाने पड़ रहे हैं। इससे भूगर्भ जलस्तर सालाना करीब 45 सेंटीमीटर लुढ़क रहा है। तेजी से गिरते भूजल स्तर को बचाने और इसके अंधाधुंध दोहन को रोकने के उद्देश्य से वर्ष-2007 में जेएनएनयूआरएम की जलापूर्ति परियोजना धरातल पर आई थी।
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इसके तहत गंगा के कच्चे पानी को शोधित कर पूरे शहर में जलापूर्ति की योजना थी। सूत्रों के मुताबिक, कुछ सफेदपोशों की मिलीभगत से योजना का काम कराने के लिए ठेकेदारों के नाम लखनऊ से ही तय हो जाते थे। स्थानीय अफसरों से टेंडर प्रक्रिया पूरी कर उन्हीं ठेकेदारों को काम देने के निर्देश मिलता था। यही नहीं, गुणवत्ता से समझौता करने पर अफसरों को मोटा कमीशन भी मिलता था।
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इसकी मुखालफत करने वाले कुछ अफसरों का चुटकियों में तबादला भी कर दिया गया। वहीं ज्यादातर ऐसे रहे, जो भ्रष्टाचार के ‘बहाव’ के साथ हो लिए और अपनी जेब गर्म करते रहे। इसके चलते घटिया काम में कोई बाधा नहीं बना। कई जगहों पर तो सिर्फ कागजों पर ही पाइपलाइनें बिछा दी गईं। परियोजना पांच साल में पूरी होनी थी, पर घटिया काम होने की वजह से आज तक अधूरी है। इस बीच दोनों चरणों के कार्यों की लागत बढ़कर 869.08 करोड़ रुपये हो गई है।
भ्रष्ट अफसरों ने ही दो साल दबवा दी रिपोर्ट
तकनीकी जांच समिति (टीएसी) ने दो साल पहले योजना के पहले चरण में घोटाले के आरोपों की जांच की थी। इसमें भ्रष्टाचार का खुलासा भी हुआ। लेकिन, कार्रवाई की जद में आए भ्रष्ट अफसरों ने खेलकर जांच रिपोर्ट ही दबवा दी। उससे पहले भी इस मामले में छह अभियंताओं को दोषी बताते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी, पर वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। शनिवार को पहली बार एक साथ 24 तत्कालीन अभियंताओं पर एफआईआर दर्ज हुई।
आईआईटी ने बताया था घटिया है पाइपलाइन
आईआईटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में इन पाइपलाइनों को घटिया बताया था। संस्थान के विशेषज्ञों ने इन घटिया पाइपों को बदलने की सिफारिश भी की थी। ऐसा न होने तक लो-प्रेशर से पानी की आपूर्ति करने की सलाह दी थी। यह रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
भ्रष्ट अफसरों ने ही दो साल दबवा दी रिपोर्ट
तकनीकी जांच समिति (टीएसी) ने दो साल पहले योजना के पहले चरण में घोटाले के आरोपों की जांच की थी। इसमें भ्रष्टाचार का खुलासा भी हुआ। लेकिन, कार्रवाई की जद में आए भ्रष्ट अफसरों ने खेलकर जांच रिपोर्ट ही दबवा दी। उससे पहले भी इस मामले में छह अभियंताओं को दोषी बताते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी, पर वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। शनिवार को पहली बार एक साथ 24 तत्कालीन अभियंताओं पर एफआईआर दर्ज हुई।
आईआईटी ने बताया था घटिया है पाइपलाइन
आईआईटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में इन पाइपलाइनों को घटिया बताया था। संस्थान के विशेषज्ञों ने इन घटिया पाइपों को बदलने की सिफारिश भी की थी। ऐसा न होने तक लो-प्रेशर से पानी की आपूर्ति करने की सलाह दी थी। यह रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
15 फीसदी क्षमता से भी नहीं हो रही जलापूर्ति
गंगा बैराज के दोनों वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता रोजाना 40 करोड़ लीटर जलापूर्ति की है। निर्माण के दौरान तत्कालीन अधिकारियों ने रोज इतने ही पानी की शहर में आपूर्ति करने, लोगों को 24 घंटे पानी मिलने का दावा किया था। हकीकत यह है कि जल निगम बैराज का एक ही प्लांट चलाकर मात्र पांच से छह करोड़ लीटर पानी की ही आपूर्ति कर पा रहा है। इतने कम पानी की लो-प्रेशर से आपूर्ति करने के बाद भी आए दिन पाइपलाइनों से भ्रष्टाचार के फव्वारे फूटते रहते हैं।
164 करोड़ की परियोजना शासन ने की खारिज
कंपनी बाग चौराहे से सिटी में फूलबाग और रावतपुर स्टेशन काकादेव, विजयनगर होते हुए साउथ सिटी में गोशाला तक बिछी घटिया मुख्य पाइप लाइन में लोहे के पाइप डालने के लिए जल निगम ने पिछले साल 164 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट शासन को भेजा था, पर उसे खारिज करते हुए पुरानी परियोजना को मिलाकर रिपोर्ट मांगी गई। छह महीने पहले जल निगम ने 394 करोड़ का प्रोजेक्ट भेजा, उसे भी खारिज करते हुए अब नए सिरे से कम लागत से टूटते पाइपों की समस्या के समाधान के लिए प्रस्ताव मांगा गया है।
आरोपी अफसरों में से 16 सेवानिवृत्त, दो की मौत
जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर शमीम अख्तर ने घटिया मुख्य पाइप लाइन बिछाने में जिन 24 अफसरों, अभियंताओं पर रिपोर्ट दर्ज कराई है, उनमें से 16 सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि दो की मौत हो गई है। शेष छह में से राकेश चौधरी निलंबित हैं। अन्य पांच विभिन्न जिलों में तैनात हैं।
गंगा बैराज के दोनों वाटर ट्रीटमेंट प्लांटों की क्षमता रोजाना 40 करोड़ लीटर जलापूर्ति की है। निर्माण के दौरान तत्कालीन अधिकारियों ने रोज इतने ही पानी की शहर में आपूर्ति करने, लोगों को 24 घंटे पानी मिलने का दावा किया था। हकीकत यह है कि जल निगम बैराज का एक ही प्लांट चलाकर मात्र पांच से छह करोड़ लीटर पानी की ही आपूर्ति कर पा रहा है। इतने कम पानी की लो-प्रेशर से आपूर्ति करने के बाद भी आए दिन पाइपलाइनों से भ्रष्टाचार के फव्वारे फूटते रहते हैं।
164 करोड़ की परियोजना शासन ने की खारिज
कंपनी बाग चौराहे से सिटी में फूलबाग और रावतपुर स्टेशन काकादेव, विजयनगर होते हुए साउथ सिटी में गोशाला तक बिछी घटिया मुख्य पाइप लाइन में लोहे के पाइप डालने के लिए जल निगम ने पिछले साल 164 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट शासन को भेजा था, पर उसे खारिज करते हुए पुरानी परियोजना को मिलाकर रिपोर्ट मांगी गई। छह महीने पहले जल निगम ने 394 करोड़ का प्रोजेक्ट भेजा, उसे भी खारिज करते हुए अब नए सिरे से कम लागत से टूटते पाइपों की समस्या के समाधान के लिए प्रस्ताव मांगा गया है।
आरोपी अफसरों में से 16 सेवानिवृत्त, दो की मौत
जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर शमीम अख्तर ने घटिया मुख्य पाइप लाइन बिछाने में जिन 24 अफसरों, अभियंताओं पर रिपोर्ट दर्ज कराई है, उनमें से 16 सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि दो की मौत हो गई है। शेष छह में से राकेश चौधरी निलंबित हैं। अन्य पांच विभिन्न जिलों में तैनात हैं।
ये हैं कार्यरत
कार्यवाहक अधीक्षण अभियंता राकेश चौधरी (निलंबित हैं), तत्कालीन परियोजना अभियंता निर्माण दीपक कुमार, तत्कालीन परियोजना अभियंता बैराज लालजीत, सहायक परियोजना अभियंता सतवंत सिंह, विपुल आमरे और सुरेंद्र कुमार।
ये हुए सेवानिवृत्त
परियोजना प्रबंधक एसके अवस्थी, अधीक्षण अभियंता रामसेवक शुक्ला, मुख्य अभियंता सूरज लाल, परियोजना प्रबंधक एसके गुप्ता, अधीक्षण अभियंता वाईके जैन, परियोजना प्रबंधक एसके गुप्ता, परियोजना प्रबंधक पीसी शुक्ला, परियोजना अभियंता डीएन नौटियाल, परियोजना अभियंता एसएस तिवारी, परियोजना अभियंता लक्ष्मण प्रसाद, विकास गुप्ता, अमीरुल हसन, पीके शर्मा, मयंक मिश्रा, सहायक परियोजना अभियंता दिनेश चंद्र शर्मा और सहायक परियोजना अभियंता आरके वर्मा।
इनकी हो चुकी है मृत्यु
तत्कालीन मुख्य अभियंता सैयद रहमतुल्लाह और तत्कालीन सहायक परियोजना अभियंता एमएस खान।
जलापूर्ति परियोजना
फेज वन
परियोजना की शुरुआती लागत - 270.95 करोड़ रुपये
विलंब होने से बढ़ी लागत - 393.93 करोड़ रुपये
कार्य शुरू हुआ - मई 2007
बैराज में बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता - 20 करोड़ लीटर प्रतिदिन
मुख्य पाइप लाइन बिछाई गई - 51.61 किलोमीटर
घरेलू पाइप लाइन बिछाई गई - 700 किलोमीटर
पानी की टंकियां बनीं - 14
फेस दो
परियोजना की शुरुआती लागत - 377.79 करोड़
विलंब से बढ़ी लागत - 475.15 करोड़ रुपये
कार्य की शुरुआत - नवंबर 2008
बैराज में बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता - 20 करोड़ लीटर प्रतिदिन
गुजैनी वाटर वर्क्स में बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता - 2.85 करोड़ लीटर
मुख्य पाइप लाइन बिछाई गई - 65 किलोमीटर
घरेलू पाइप लाइन बिछाई गई - 1045 किलोमीटर
पानी की टंकियां बनीं - 31
कार्यवाहक अधीक्षण अभियंता राकेश चौधरी (निलंबित हैं), तत्कालीन परियोजना अभियंता निर्माण दीपक कुमार, तत्कालीन परियोजना अभियंता बैराज लालजीत, सहायक परियोजना अभियंता सतवंत सिंह, विपुल आमरे और सुरेंद्र कुमार।
ये हुए सेवानिवृत्त
परियोजना प्रबंधक एसके अवस्थी, अधीक्षण अभियंता रामसेवक शुक्ला, मुख्य अभियंता सूरज लाल, परियोजना प्रबंधक एसके गुप्ता, अधीक्षण अभियंता वाईके जैन, परियोजना प्रबंधक एसके गुप्ता, परियोजना प्रबंधक पीसी शुक्ला, परियोजना अभियंता डीएन नौटियाल, परियोजना अभियंता एसएस तिवारी, परियोजना अभियंता लक्ष्मण प्रसाद, विकास गुप्ता, अमीरुल हसन, पीके शर्मा, मयंक मिश्रा, सहायक परियोजना अभियंता दिनेश चंद्र शर्मा और सहायक परियोजना अभियंता आरके वर्मा।
इनकी हो चुकी है मृत्यु
तत्कालीन मुख्य अभियंता सैयद रहमतुल्लाह और तत्कालीन सहायक परियोजना अभियंता एमएस खान।
जलापूर्ति परियोजना
फेज वन
परियोजना की शुरुआती लागत - 270.95 करोड़ रुपये
विलंब होने से बढ़ी लागत - 393.93 करोड़ रुपये
कार्य शुरू हुआ - मई 2007
बैराज में बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता - 20 करोड़ लीटर प्रतिदिन
मुख्य पाइप लाइन बिछाई गई - 51.61 किलोमीटर
घरेलू पाइप लाइन बिछाई गई - 700 किलोमीटर
पानी की टंकियां बनीं - 14
फेस दो
परियोजना की शुरुआती लागत - 377.79 करोड़
विलंब से बढ़ी लागत - 475.15 करोड़ रुपये
कार्य की शुरुआत - नवंबर 2008
बैराज में बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता - 20 करोड़ लीटर प्रतिदिन
गुजैनी वाटर वर्क्स में बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता - 2.85 करोड़ लीटर
मुख्य पाइप लाइन बिछाई गई - 65 किलोमीटर
घरेलू पाइप लाइन बिछाई गई - 1045 किलोमीटर
पानी की टंकियां बनीं - 31