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कोरोना ने स्वास्थ्य विभाग-अस्पतालों का खर्च बढ़ाया, हैलट में पीपीई किट पर रोज खर्च हो रहे 20 लाख
Tue, 28 Apr 2020 07:23 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,कानपुर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 28 Apr 2020 07:23 AM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना ने स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों का खर्च बढ़ा दिया है। मरीजों की जांच और इलाज में लगे डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ सहित अन्य कर्मियों को इस वायरस से बचाने के लिए रोज करीब 20 लाख रुपये पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट) किट पर खर्च हो रहे हैं। अन्य खर्चे अलग हैं।
पड़ताल करने पर पता चला कि मेडिकल कॉलेज और हैलट में ही रोज 10 लाख रुपये से अधिक की पीपीई किट लग रही है। इस संबंध में हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या ने बताया कि अस्पताल के कोविड-19 वार्डों, इमरजेंसी, जच्चा बच्चा अस्पताल, स्त्री रोग विभाग और मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में रोज लगभग 1000 पीपीई किट खर्च हो रही है।
सभी जगह तीन शिफ्टों में ड्यूटी लग रही है। सभी डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पीपीई किट उपलब्ध कराई जा रही है। यदि कोविड-19 वार्ड में इलेक्ट्रीशियन, कारपेंटर आदि को भेजना पड़ता है तो उन्हें भी यह किट दी जाती है। एक निजी कंपनी से 943 रुपये की दर से पीपीई किट खरीदी जा रही हैं, पर इनमें एन95 मास्क नहीं है।
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मास्क अलग से खरीदना पड़ रहा है। इस प्रकार एक पूरी किट लगभग 1100 रुपये की पड़ रही है। तीन शिफ्टों में रोज 10 लाख से ज्यादा का खर्च सिर्फ इसी मद में हो रहा है। इसी तरह कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय, उर्सला, डफरिन सहित अन्य अस्पतालों और रेड जोन में जांच करने जा रहीं टीमों पर भी इस मद में रोज लगभग 10 लाख रुपये खर्च हो रहा है। ये किट एक बार पहनने के बाद बेकार हो जाती हैं।
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पड़ताल करने पर पता चला कि मेडिकल कॉलेज और हैलट में ही रोज 10 लाख रुपये से अधिक की पीपीई किट लग रही है। इस संबंध में हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या ने बताया कि अस्पताल के कोविड-19 वार्डों, इमरजेंसी, जच्चा बच्चा अस्पताल, स्त्री रोग विभाग और मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में रोज लगभग 1000 पीपीई किट खर्च हो रही है।
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सभी जगह तीन शिफ्टों में ड्यूटी लग रही है। सभी डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पीपीई किट उपलब्ध कराई जा रही है। यदि कोविड-19 वार्ड में इलेक्ट्रीशियन, कारपेंटर आदि को भेजना पड़ता है तो उन्हें भी यह किट दी जाती है। एक निजी कंपनी से 943 रुपये की दर से पीपीई किट खरीदी जा रही हैं, पर इनमें एन95 मास्क नहीं है।
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मास्क अलग से खरीदना पड़ रहा है। इस प्रकार एक पूरी किट लगभग 1100 रुपये की पड़ रही है। तीन शिफ्टों में रोज 10 लाख से ज्यादा का खर्च सिर्फ इसी मद में हो रहा है। इसी तरह कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय, उर्सला, डफरिन सहित अन्य अस्पतालों और रेड जोन में जांच करने जा रहीं टीमों पर भी इस मद में रोज लगभग 10 लाख रुपये खर्च हो रहा है। ये किट एक बार पहनने के बाद बेकार हो जाती हैं।