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Coronavirus: कोविड अस्पताल पहुंचकर एंबुलेंस में ही मर गई रोगी, एक घंटे तक ले जाने के लिए होता रहा इंतजार
Mon, 27 Jul 2020 10:49 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 27 Jul 2020 10:49 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर हैलट के कोविड अस्पताल में रोगी एक घंटे तक एंबुलेंस में पड़ी रही और उसकी मौत हो गई लेकिन उसे उतारने के लिए कोई नहीं आया। बर्रा की रहने वाली 55 साल की रोगी को पहले हैलट इमरजेंसी में भर्ती किया गया। यहां उसकी जांच की गई तो कोविड पॉजीटिव आई।
इस पर इमरजेंसी के बाहर खड़ी एंबुलेंस से कोविड अस्पताल भेजा गया। वहां रोगी अस्पताल में भर्ती नहीं हो पाई और मौत हो गई। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया है। रोगी पहले एक नर्सिंगहोम में भर्ती रही। उसे सांस की दिक्कत हो गई तो ऑक्सीजन लगाकर कार्डियोलॉजी भेज दिया गया।
कार्डियोलॉजी से उसे हैलट इमरजेंसी रेफर कर दिया गया। यहां उसे भर्ती कर लिया गया। एंटीजन रैपिड कार्ड से वह कोरोना पॉजीटिव निकली तो उसे न्यूरो साइंस स्थित कोविड अस्पताल भेज दिया गया। रोगी को एंबुलेंस से भेजा गया लेकिन वहां कोई उतारने नहीं आया और उसकी मौत हो गई।
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डाॅक्टरों का कहना है कि रोगी को भेजने के पहले कोविड अस्पताल में बेड खाली होने के संबंध में पूछ लिया गया था। रोगी का ऑक्सीजन सेच्युरेशन लेवल 52 फीसदी था। ऑक्सीजन लगाने के बाद 54 फीसदी तक गया जो गंभीर हालत की निशानी है। हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रिचा गिरि का कहना है कि इस मामले में जांच कराएंगे। जब जानकारी थी तो रोगी को उतारने में क्यों देरी की गई? इसकी जांच होगी।
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इस पर इमरजेंसी के बाहर खड़ी एंबुलेंस से कोविड अस्पताल भेजा गया। वहां रोगी अस्पताल में भर्ती नहीं हो पाई और मौत हो गई। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया है। रोगी पहले एक नर्सिंगहोम में भर्ती रही। उसे सांस की दिक्कत हो गई तो ऑक्सीजन लगाकर कार्डियोलॉजी भेज दिया गया।
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कार्डियोलॉजी से उसे हैलट इमरजेंसी रेफर कर दिया गया। यहां उसे भर्ती कर लिया गया। एंटीजन रैपिड कार्ड से वह कोरोना पॉजीटिव निकली तो उसे न्यूरो साइंस स्थित कोविड अस्पताल भेज दिया गया। रोगी को एंबुलेंस से भेजा गया लेकिन वहां कोई उतारने नहीं आया और उसकी मौत हो गई।
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डाॅक्टरों का कहना है कि रोगी को भेजने के पहले कोविड अस्पताल में बेड खाली होने के संबंध में पूछ लिया गया था। रोगी का ऑक्सीजन सेच्युरेशन लेवल 52 फीसदी था। ऑक्सीजन लगाने के बाद 54 फीसदी तक गया जो गंभीर हालत की निशानी है। हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रिचा गिरि का कहना है कि इस मामले में जांच कराएंगे। जब जानकारी थी तो रोगी को उतारने में क्यों देरी की गई? इसकी जांच होगी।