{"_id":"60583c778ebc3e5918521f4b","slug":"coronavirus-cases-in-kanpur-news-updates-corona-infection-kanpur-up","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"COVID-19: आरामतलबों के लिए काल बन गया कोरोना, आर्थिक रूप से कमजोर तबके की इम्यूनिटी रही मजबूत, चौंकाने वाली खबर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
COVID-19: आरामतलबों के लिए काल बन गया कोरोना, आर्थिक रूप से कमजोर तबके की इम्यूनिटी रही मजबूत, चौंकाने वाली खबर
Mon, 22 Mar 2021 12:13 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 22 Mar 2021 12:13 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक साल में कोरोना से कानपुर में 841 मौतें हुई हैं। इनमें 90 फीसदी लोग मध्यम वर्ग से ताल्लुक रखने वाले थे। इनमें ज्यादातर 50 से अधिक की उम्र के और कोमॉर्बिड (पहले से गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में) रहे। कोरोना के संक्रमण ने उन्हें अति गंभीर कर दिया।
इन रोगियों की डायग्नोसिस के आधार पर पता चला है कि इनमें सेहत और खानपान के प्रति लापरवाही रही। इसके उलट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में भी कोरोना संक्रमित मिले, लेकिन मजबूत इम्यूनिटी के बल पर उन्होंने कोरोना से जंग जीत ली।
शुरुआत में कोरोना से हुई मौतों के आंकड़ों से यही संकेत मिलते हैं। कोरोना से पहली मौत कर्नलगंज के मोहम्मद अरशद की हुई थी। वह रेडीमेड के बड़े कारोबारी थे। इसके बाद कोरोना से दूसरी मौत 21 अप्रैल को रोशननगर के मोहम्मद सलीम (52) की हुई थी। बताया गया कि उनका रियल इस्टेट का कारोबार था। कोरोना से तीसरी मौत 23 अप्रैल को रूपचंद सोनकर (70) की हुई थी। वह भी संपन्न परिवार से रहे और कोमॉर्बिड भी थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
इन रोगियों की डायग्नोसिस के आधार पर पता चला है कि इनमें सेहत और खानपान के प्रति लापरवाही रही। इसके उलट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में भी कोरोना संक्रमित मिले, लेकिन मजबूत इम्यूनिटी के बल पर उन्होंने कोरोना से जंग जीत ली।
विज्ञापन
शुरुआत में कोरोना से हुई मौतों के आंकड़ों से यही संकेत मिलते हैं। कोरोना से पहली मौत कर्नलगंज के मोहम्मद अरशद की हुई थी। वह रेडीमेड के बड़े कारोबारी थे। इसके बाद कोरोना से दूसरी मौत 21 अप्रैल को रोशननगर के मोहम्मद सलीम (52) की हुई थी। बताया गया कि उनका रियल इस्टेट का कारोबार था। कोरोना से तीसरी मौत 23 अप्रैल को रूपचंद सोनकर (70) की हुई थी। वह भी संपन्न परिवार से रहे और कोमॉर्बिड भी थे।
विज्ञापन
इसके अलावा कारोबारी, रिटायर्ड अफसर, डॉक्टर आदि कोरोना की चपेट में आए। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के सीनियर फिजिशियन प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा का कहना है कि आरामतलबी की जिंदगी, चाट-चटोरेपन वाला खानपान और व्यायाम की अनदेखी से रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) कम होती है।
मधुमेह, रक्तचाप, सांस रोग जैसी बीमारियां भी इम्यूनिटी घटाती हैं। ऐसे में संक्रमण अधिक घातक हो जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर तबका मेहनतकश होता है, जिससे हाजमा दुरुस्त रहता है। इसके अलावा इम्यूनिटी ठीक रहती है। इससे बीमारी से उबरने में आसानी होती है।
कोरोना से मौत - 841
उच्च वर्ग - 08 फीसदी
मध्यम वर्ग - 80 फीसदी
निम्न मध्यम वर्ग - 06 फीसदी
निम्न वर्ग - 04 फीसदी
नोट : रोगियों की हिस्ट्री के मुताबिक आकलन
मधुमेह, रक्तचाप, सांस रोग जैसी बीमारियां भी इम्यूनिटी घटाती हैं। ऐसे में संक्रमण अधिक घातक हो जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर तबका मेहनतकश होता है, जिससे हाजमा दुरुस्त रहता है। इसके अलावा इम्यूनिटी ठीक रहती है। इससे बीमारी से उबरने में आसानी होती है।
कोरोना से मौत - 841
उच्च वर्ग - 08 फीसदी
मध्यम वर्ग - 80 फीसदी
निम्न मध्यम वर्ग - 06 फीसदी
निम्न वर्ग - 04 फीसदी
नोट : रोगियों की हिस्ट्री के मुताबिक आकलन
संक्रमण का फैलाव निम्न मध्यम वर्ग में अधिक
कोरोना का फैलाव निम्न मध्यम वर्ग में अधिक रहा, लेकिन मौतें मध्य और उच्च वर्ग में अधिक हुईं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ. एसके कटियार का कहना है कि निम्न मध्यम वर्ग में फैलाव इसलिए अधिक रहा, क्योंकि लोग बाहर भीड़भाड़ वाले इलाकों में अधिक रहते हैं।
मध्यम वर्ग बाहर भी रहता है और सेहत को लेकर अधिक संजीदा नहीं होता। इससे सेहत की अधिक दिक्कत इसी वर्ग में है। उच्च वर्ग के रहन-सहन का तरीका अलग होता है। उसका लोगों से ज्यादा घालमेल नहीं होता। उसे इलाज की बेहतर सुविधाएं मिल जाती हैं।
लेकिन, एसी और खानपान की वजह से संक्रमण को लेकर संवेदनशील अधिक होता है। इम्यूनिटी कम होती है। निम्न वर्ग में थोड़ा-थोड़ा संक्रमण होते रहने से इम्यूनिटी विकसित हो जाती है और जटिलता कम होती है। हर्ड इम्यूनिटी का फायदा निम्न वर्ग को ज्यादा मिलता है।
कोरोना का फैलाव निम्न मध्यम वर्ग में अधिक रहा, लेकिन मौतें मध्य और उच्च वर्ग में अधिक हुईं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ. एसके कटियार का कहना है कि निम्न मध्यम वर्ग में फैलाव इसलिए अधिक रहा, क्योंकि लोग बाहर भीड़भाड़ वाले इलाकों में अधिक रहते हैं।
मध्यम वर्ग बाहर भी रहता है और सेहत को लेकर अधिक संजीदा नहीं होता। इससे सेहत की अधिक दिक्कत इसी वर्ग में है। उच्च वर्ग के रहन-सहन का तरीका अलग होता है। उसका लोगों से ज्यादा घालमेल नहीं होता। उसे इलाज की बेहतर सुविधाएं मिल जाती हैं।
लेकिन, एसी और खानपान की वजह से संक्रमण को लेकर संवेदनशील अधिक होता है। इम्यूनिटी कम होती है। निम्न वर्ग में थोड़ा-थोड़ा संक्रमण होते रहने से इम्यूनिटी विकसित हो जाती है और जटिलता कम होती है। हर्ड इम्यूनिटी का फायदा निम्न वर्ग को ज्यादा मिलता है।