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निजी पैथोलॉजियां बांट रहीं पॉजिटिव रिपोर्ट, उठे सवाल
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कानपुर। निजी पैथोलॉजी लैब से बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आने से सवाल उठने लगे हैं। निजी लैब से पॉजिटिव मिले एक व्यक्ति की जब जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की कोविड लैब से जांच कराई गई तो उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई। इस पर रोगी ने सीएमओ कार्यालय को बताया तो पता चला कि वहां उसके पॉजिटिव होने की सूचना नहीं है।
निजी पैथोलॉजियों की लैब पर सबसे पहले पूर्व सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला ने सवालिया निशान खड़ा किया था। उन्होंने तब स्वाथ्य मंत्री जय प्रताप सिंह की सर्किट हाउस में हुई बैठक में बताया था कि निजी लैब की कई रिपोर्ट के मद्देनजर जब मरीजों की मेडिकल कॉलेज स्थित कोविड लैब में जांच कराई गई तो वे निगेटिव मिले। आरोप लग रहा है कि निजी पैथोलॉजियां जानबूझकर पॉजिटिव रिपोर्ट दे रहीं। साथ ही पॉजिटिव रिपोर्ट वाले मरीजों के अनुरोध पर सभी जांचों को पोर्टल पर नहीं डाल रही हैं। इससे रोगी तो सामाजिक परेशानी से बच जाता है लेकिन संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है।
किसी के पॉजिटिव आने पर आस-पड़ोस और रिश्तेदार दूरियां बना लेते हैं। हालांकि, निजी पैथोलॉजियों से जुड़े लोग इससे इंकार करते हैं। उनका कहना है कि जांचों में पारदर्शिता बरती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग को भी सभी रिपोर्ट बताई जा रही है। सीएमओ डॉ. अनिल कुमार मिश्रा का कहना है कि रोगी की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर सबसे पहले सीएमओ कार्यालय को सूचना देने के लिए सभी पैथोलॉजियों को निर्देश दिए गए हैं।
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आईसीएमआर को रिपोर्ट देती हैं निजी लैब : पूर्व सीएमओ ने जब स्वास्थ्य मंत्री की बैठक में पैथोलॉजियों की रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए थे तब अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. आरपी यादव भी मौजूद थे। डॉ. यादव का कहना है कि मशीन पॉजिटिव और निगेटिव बताती है। निजी और सरकारी लैब अपनी रिपोर्ट इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को भी भेजते हैं।
गलत सैंपलिंग से रिपोर्ट निगेटिव : पालीवाल डाग्नोस्टिक्स के एमडी और सीनियर पैथोलॉजिस्ट डॉ. उमेश पालीवाल का कहना है कि अगर ढंग से गले या नाक से सैंपल न लिया जाए तो कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आती है। उन्होंने एम्स दिल्ली की रिपोर्ट का हवाला दिया। बताया कि 25 से 30 फीसदी रिपोर्ट गलत ढंग से सैंपल लेने के चलते ही निगेटिव आ रही हैं। कहा कि उनके यहां आरटी-पीसीआर पद्धति से जांच हो रही।
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निजी पैथोलॉजियों की लैब पर सबसे पहले पूर्व सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला ने सवालिया निशान खड़ा किया था। उन्होंने तब स्वाथ्य मंत्री जय प्रताप सिंह की सर्किट हाउस में हुई बैठक में बताया था कि निजी लैब की कई रिपोर्ट के मद्देनजर जब मरीजों की मेडिकल कॉलेज स्थित कोविड लैब में जांच कराई गई तो वे निगेटिव मिले। आरोप लग रहा है कि निजी पैथोलॉजियां जानबूझकर पॉजिटिव रिपोर्ट दे रहीं। साथ ही पॉजिटिव रिपोर्ट वाले मरीजों के अनुरोध पर सभी जांचों को पोर्टल पर नहीं डाल रही हैं। इससे रोगी तो सामाजिक परेशानी से बच जाता है लेकिन संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है।
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किसी के पॉजिटिव आने पर आस-पड़ोस और रिश्तेदार दूरियां बना लेते हैं। हालांकि, निजी पैथोलॉजियों से जुड़े लोग इससे इंकार करते हैं। उनका कहना है कि जांचों में पारदर्शिता बरती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग को भी सभी रिपोर्ट बताई जा रही है। सीएमओ डॉ. अनिल कुमार मिश्रा का कहना है कि रोगी की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर सबसे पहले सीएमओ कार्यालय को सूचना देने के लिए सभी पैथोलॉजियों को निर्देश दिए गए हैं।
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आईसीएमआर को रिपोर्ट देती हैं निजी लैब : पूर्व सीएमओ ने जब स्वास्थ्य मंत्री की बैठक में पैथोलॉजियों की रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए थे तब अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. आरपी यादव भी मौजूद थे। डॉ. यादव का कहना है कि मशीन पॉजिटिव और निगेटिव बताती है। निजी और सरकारी लैब अपनी रिपोर्ट इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को भी भेजते हैं।
गलत सैंपलिंग से रिपोर्ट निगेटिव : पालीवाल डाग्नोस्टिक्स के एमडी और सीनियर पैथोलॉजिस्ट डॉ. उमेश पालीवाल का कहना है कि अगर ढंग से गले या नाक से सैंपल न लिया जाए तो कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आती है। उन्होंने एम्स दिल्ली की रिपोर्ट का हवाला दिया। बताया कि 25 से 30 फीसदी रिपोर्ट गलत ढंग से सैंपल लेने के चलते ही निगेटिव आ रही हैं। कहा कि उनके यहां आरटी-पीसीआर पद्धति से जांच हो रही।