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विवि के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने कहा, पढ़ाई में उम्र न बने बाधा, हर पांच साल में बदला जाए पाठ्यक्रम

Mon, 22 Mar 2021 08:19 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 22 Mar 2021 08:19 PM IST
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convocation of the university, the governor said, age should not be a hindrance in studies
विवि के दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल - फोटो : amar ujala
आज के छात्र बहुत स्मार्ट हैं। छात्रों के आईक्यू लेवल को देखते हुए पाठ्यक्रम को भी स्मार्ट करना जरूरी है। ऐसे में पीजी से लेकर उच्च शिक्षा तक हर पांच साल में पाठ्यक्रम में बदलाव होना चाहिए। दो साल में 30 फीसदी और पांच साल में पूरे कोर्स में बदलाव किया जाना चाहिए।
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ये बातें छत्रपति शाहू जी महाराज विवि में आयोजित 35वें दीक्षांत समारोह में अध्यक्षता कर रहीं राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहीं। कुलाधिपति ने कहा कि पढ़ाई में उम्र बाधा न बने। अगर किसी बच्चे में 12 साल में 10वीं पास करने की क्षमता है तो उसे नियमों के बंधन में न बांधा जाए।
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पांच साल की उम्र में कंप्यूटर में पारंगत बच्चों के लिए उन्हीं के अनुसार स्मार्ट पाठ्यक्रम की जरूरत है। हमें अपने सोच नहीं बल्कि उनके सोच के अनुसार पाठ्यक्रम डिजाइन करने की आवश्यकता है। पाठ्यक्रम में प्रदूषण, जल, पर्यावरण जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाना चाहिए। देश की संस्कृति को किताबों, पेंटिंग के माध्यम से आंगनबाड़ी स्तर से ही शुरू करना चाहिए। 
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अवार्ड पाने वालों पर लिखी जाएं किताबें 
कुलाधिपति ने कहा कि पद्मश्री, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और भारत रत्न पाने वाली महान हस्तियों पर किताब लिखी जानी चाहिए। ताकि छात्र-छात्राओं को इनके बारे में पता चल सके। कई अशिक्षित महिलाओं को भी ये अवार्ड मिल चुके हैं। इन किताबों को लाइब्रेरी और पाठ्यक्रम में लागू करना चाहिए।

बच्चों को बताएं आजादी में प्रदेश का योगदान 
कुलाधिपति ने कहा कि आजादी में प्रदेश के योगदान के बारे में बच्चों को बताएं। 75 प्रमुख घटनाओं का चयन करके हर हफ्ते एक प्रमुख घटना का जिक्र किया जाए ताकि छात्र आजादी में अपने प्रदेश के योगदान को जान सकें। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 2022 तक इसे पूरा किया जाना है।

उन्होंने तकनीक संस्थान, डिग्री कॉलेजों से आंगनबाड़ी केंद्रों और गांवों को गोद लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि गांवों को गोद लेकर तीन साल तक के बच्चों के दाखिले की जिम्मेदारी भी उठाएं। साथ ही यह भी देखें कि 9वीं तक एक भी ड्रॉप आउट न हो। 
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