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युवक की हत्या में दोषी को आजीवन कारावास, तीन आरोपी बरी
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कानपुर देहात। घाटमपुर के दुरौली गांव में प्रेम संबंध के शक में युवक को सस्ती भैंस दिलाने के बहाने घर से ले जाकर उसकी हत्या कर दी गई थी। मामले में गुरुवार को अपर जिला सत्र न्यायाधीश सप्तम की कोर्ट ने एक अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
दुरौली गांव के रामगोपाल द्विवेदी ने 23 मई 2006 को कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि वह शुक्लागंज उन्नाव में भैंस पालन कर दूध का कारोबार करता है। तीन मई 2006 को उसके पैतृक गांव दुरौली के ही राजेंद्र प्रसाद उर्फ मुनीम शुक्लागंज पहुंचे। गांव में सस्ती भैंस दिलाने का झांसा देकर वह पौत्र अमित कुमार उर्फ कल्लू को अपने साथ घर ले गए।
राजेंद्र प्रसाद ने परिवार की एक युवती से प्रेम संबंध होने के शक में उसकी मकान के अंदर हत्या कर दी। साथ ही शव फांसी पर लटका दिया। अमित का फोन बंद होने पर उसने अपने परिवार के लोगों को राजेंद्र के घर भेजा, तब घटना की जानकारी हुई। इसकी शिकायत करने पर मामले में पुलिस ने अमित के पिता लक्ष्मीकांत को ही शांतिभंग में जेल भेज दिया था।
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वहीं रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज कराई तो विवेचक तत्कालीन सीओ घाटमपुर ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। जिस पर उसने कोर्ट को पत्र देकर किसी अन्य सीओ से विवेचना कराने की मांगी की थी। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सीओ बिल्हौर से विवेचना कराई गई तो उन्होंने राजेंद्र प्रसाद, अजय, मान सिंह, राजन के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम कनिष्क कुमार सिंह की कोर्ट में चल रही थी। बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध करते हुए सहायक शासकीय अधिवक्ता धनंजय पांडेय व संतोष कुमार ने आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए मजबूत पक्ष रखे।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 54 पेज का फैसला तैयार किया। इसमें राजेंद्र प्रसाद को घटना का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं साक्ष्य के अभाव में अन्य तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
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दुरौली गांव के रामगोपाल द्विवेदी ने 23 मई 2006 को कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि वह शुक्लागंज उन्नाव में भैंस पालन कर दूध का कारोबार करता है। तीन मई 2006 को उसके पैतृक गांव दुरौली के ही राजेंद्र प्रसाद उर्फ मुनीम शुक्लागंज पहुंचे। गांव में सस्ती भैंस दिलाने का झांसा देकर वह पौत्र अमित कुमार उर्फ कल्लू को अपने साथ घर ले गए।
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राजेंद्र प्रसाद ने परिवार की एक युवती से प्रेम संबंध होने के शक में उसकी मकान के अंदर हत्या कर दी। साथ ही शव फांसी पर लटका दिया। अमित का फोन बंद होने पर उसने अपने परिवार के लोगों को राजेंद्र के घर भेजा, तब घटना की जानकारी हुई। इसकी शिकायत करने पर मामले में पुलिस ने अमित के पिता लक्ष्मीकांत को ही शांतिभंग में जेल भेज दिया था।
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वहीं रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज कराई तो विवेचक तत्कालीन सीओ घाटमपुर ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। जिस पर उसने कोर्ट को पत्र देकर किसी अन्य सीओ से विवेचना कराने की मांगी की थी। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सीओ बिल्हौर से विवेचना कराई गई तो उन्होंने राजेंद्र प्रसाद, अजय, मान सिंह, राजन के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम कनिष्क कुमार सिंह की कोर्ट में चल रही थी। बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध करते हुए सहायक शासकीय अधिवक्ता धनंजय पांडेय व संतोष कुमार ने आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए मजबूत पक्ष रखे।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 54 पेज का फैसला तैयार किया। इसमें राजेंद्र प्रसाद को घटना का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं साक्ष्य के अभाव में अन्य तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।