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सांप्रदायिक सौहार्द: महोबा में दो मुस्लिम करते हैं सुंदरकांड का पाठ, पिता की मौत पर हुआ था चालीसवां और तेरहवीं

Tue, 22 Aug 2023 06:57 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 22 Aug 2023 06:57 PM IST
सार

Mahoba News: सुंदरकांड का पाठ करने वाले मो. जहीर बताते है कि वह वर्षों से सुंदरकांड का पाठ कर रहे है। हम सब ईश्वर की संतानें हैं। जिनको राजनैतिक रोटियां सेंकना है, वो हिंदू-मुस्लिम में भेद डाल रहे हैं। सुलेमान ने बताया कि वह पिछले 16 वर्षों से सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं।

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Communal harmony In Mahoba, two Muslims recite Sunderkand, the fortieth and the thirteenth took place on the f
मो. जहीर और सुलेमान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुंदेलखंड के महोबा जिले में मुस्लिम समाज के दो लोगों ने सामाजिक एकता व सदभाव की अनूठी मिशाल कायम की है। दोनों को पूरा सुंदरकांड कंठस्थ है। पहले जहां दोनों गांव में ही शामिल होकर हिंदू भाईयों के साथ सुंदरकांड का पाठ करते थे, तो अब वह दूर-दूर तक सुंदरकांड का पाठ करने जाते हैं।

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दोनों मुस्लिमों का सामाजिक सौहार्द का यह सिलसिला पिछले 16 सालों से चला आ रहा है। जिले की तहसील कुलपहाड़ क्षेत्र के सुगिरा गांव निवासी मो. जहीर और सुलेमान के लिए न कोई मजहब की दीवार है और न ही कोई भेदभाव। उनका तो सिर्फ एक ही जुनून है, सामाजिक सदभाव कायम रहे।
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दोनों मुस्लिम हिंदू भाइयों के साथ वर्षों से सुंदरकांड का पाठ करते आ रहे हैं। गांव और आसपास कहीं भी सुंरदकांड का पाठ होता है, तो वह पूरी श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं। अब तो सुगिरा समेत जिले में कहीं भी सुंदरकांड होता है, तो इन्हें बुलाया जाता है। सोमवार की रात अमित द्विवेदी के घर में सुंदरकांड का पाठ हुआ।

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कौमी एकता को मजबूत कर रहे हैं दोनों
इसमें दोनों मुस्लिम युवकों को पाठ पढ़ते देख कर लोग अचंभित थे। आज के इस दौर में दोनों मुस्लिम युवक कौमी एकता के साथ भाईचारे को मजबूत कर रहे हैं। ढोलक-मजीरा के बीच भक्ति में डूबे माहौल में मुस्लिम समाज के दोनों लोगों को सुंदरकांड का पाठ करता देख लोग उनकी सराहना कर रहे हैं।

16 वर्षों से कर रहे हैं सुंदरकांड का पाठ
सुंदरकांड का पाठ करने वाले मो. जहीर बताते है कि वह वर्षों से सुंदरकांड का पाठ कर रहे है। हम सब ईश्वर की संतानें हैं। जिनको राजनैतिक रोटियां सेंकना है, वो हिंदू-मुस्लिम में भेद डाल रहे हैं। सुलेमान ने बताया कि वह पिछले 16 वर्षों से सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं। गांव में हिंदू-मुस्लिम में कोई भेदभाव नहीं है।

पिता की मौत पर चालीसवां व तेरहवीं दोनों हुईं
सुंदरकांड का पाठ करने वाले सुलेमान ने बताया कि उसके पिता बसीर रामलीला के मंचन के दौरान बाणासुर का अभिनय करते थे। पिता का निधन हो चुका है। उनके पिता ने अपने पुत्रों से कहा था कि उनकी मौत के बाद मुस्लिम रीति-रिवाज से उनका संस्कार भी करना। पिता के निधन पर परिजनों ने चालीवां व तेरहवीं संस्कार दोनों किया था।

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