{"_id":"5b14e32e4f1c1ba96e8b6329","slug":"comedian-raju-shrivastav-in-kanpuriya-style","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऐसेहे हमरे चुन्नीगंज वाले फूफा हैं.. हम कहा फूफा बहुत गर्मी पड़ रहा है एकदम भद्दर गर्मी.. ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऐसेहे हमरे चुन्नीगंज वाले फूफा हैं.. हम कहा फूफा बहुत गर्मी पड़ रहा है एकदम भद्दर गर्मी..
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 04 Jun 2018 12:32 PM IST
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राजू श्रीवास्तव
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अरे इस साल कानपुर मा जो गर्मी पड़ रही है कि का बताई.. मगर भैया पुराने लोगन केर बातहे अलग है.. ऐसे हे हमारे रिश्ते के दादा हैं.. आजादी के टाइम के बीएससी किये भये हैं.. उनका अलगे फार्मूला रहा.. जैसेहे कानपुर में तापमान 40 डिग्री क्त्रसॅस होत रहा तो वो कहत रहे चलो खिड़की दरवाजा बंद करो सब लोग कूलर के सामने बइठ जाओ.. हम सब बइठ जात रहें चुपचाप.. अउर जैसेहे तापमान 45 डिग्री होत रहा तो कहत रहें कि अब कूलर चालु कर देव.. तो पुराने लोगन की का बताई..
ऐसेहे एक हमारे दोस्त है रग्घू.. उनका दबौली मा मुर्गी केर फॉर्म हाउस है.. हम उनसे पूछिन के भैया रग्घू एतना गर्मी पड़ रहा है तुम आपन मुर्गीयन को गर्मी से कइसे बचात हौ.. तो कहे इसके लिए दुई लौंडे रखे हैं हमने.. दोनों हनक हनक के बरफ कूट के एकदम मक्कू बरफ के जैसे बना लेत हैं.. अउर हमरे हियां की मुर्गी होरी सब पढ़ी लिखी डिग्री होल्डर से कम नहीं ना.. हम जैसेहे बरफ केर नांद के आगे चम्मच लैके कुर्सी डाल के बइठते हैं.. सारी मुर्गी लाइन लगा के खडी हुई जात हैं.. फिर हम मुर्गीयन केर चोंच खोल खोल के उनके मुह में एक एक चम्मच बरफ डालते जाते हैं.. तब जाके मुर्गी लोगन का तापमान कम होत है.. हमका याद है बचपन मा जब जब बहुत जादा गर्मी पडत रहे तो हमार दद्दा तौलिया भिगो के सर पे दाल के कचहरी जात रहें.. कंहू चले जाओ डिप्टी पडाव, नयी सड़क, लाटूश रोड.. सब तरफ सन्नाटा सांय सांय करत रहा.. वईस गर्मी मा हमार अम्मा आम केर पना बनावत रहीं.. ऊ कच्चा आम लैके ओका गोबर का कंडा जला के ओमा दाब देत रहीं.. फिर आम भुन जाये के बाद ओका मटके मा पोदीना काला नमक मिला के घोंट घोंट के जौने पना बनावत रही ऊ आज तक याद आवत है..
अउर भैया अइसी भद्दर गर्मी मा कोऊ अगर शादी ब्याह केर निमंत्रण लैके आये तो जान जल जात है.. काहे से अब एतनी गर्मी मा जब नंगे घूमे का मन कर रहा होय तो कौनो सादी बियाह मा पहिन ओढ़ के कइसे जाय.. और खाना भी सूंघ सूंघ के खाय का पडत है.. काहे से अइस गरमी मा खाना बहुत जल्दी महेक जात है.. और भैया ऐसी गर्मी मा औरतन का भी बहुत चिंता रहत है कि कहूँ उनका मेकअप पिघल ना जाय.. पता चला घर से निकली ऐश्वर्या राय बन के.. और गर्मी मा पसीने मा मेकअप बह गया तो अन्दर से निकली राखी सावंत.. ऐसे मा औरतन का देख के बड़ा मजा आवत है.. पता चला खाना खाय रही है और सारा मेकअप चाऊमीन में टपक रहा है..
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ऐसेहे हमरे चुन्नीगंज वाले फूफा हैं.. हम कहा फूफा बहुत गर्मी पड़ रहा है एकदम भद्दर गर्मी.. तो कहे हाँ कल तोरी बुआ छत पे पापड रखीं सूखने खातिर.. ये सूरज महाराज दुई मिनट में भून के राख कर दिए.. पर भईया हम सब से एक बात कहे चाहित है कि अइसे भयंकर गर्मी मा जौन फेरी कर रहे हैं.. तुमका चाही के उनसे मोलभाव ना करो.. जौन रिक्शा खींचत है अगर ऊ 12 मांगे तो 15 देव.. दुई चार रूपया जादा दे देहो तो कुछु घटी ना.. वैसेहे पान गुटखा खाय के थूक देत हौ.. थोडा इंसान बने का चाही.. दूसरों का भी दर्द समझो.. इंसान का बच्चा बनो !!
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ऐसेहे एक हमारे दोस्त है रग्घू.. उनका दबौली मा मुर्गी केर फॉर्म हाउस है.. हम उनसे पूछिन के भैया रग्घू एतना गर्मी पड़ रहा है तुम आपन मुर्गीयन को गर्मी से कइसे बचात हौ.. तो कहे इसके लिए दुई लौंडे रखे हैं हमने.. दोनों हनक हनक के बरफ कूट के एकदम मक्कू बरफ के जैसे बना लेत हैं.. अउर हमरे हियां की मुर्गी होरी सब पढ़ी लिखी डिग्री होल्डर से कम नहीं ना.. हम जैसेहे बरफ केर नांद के आगे चम्मच लैके कुर्सी डाल के बइठते हैं.. सारी मुर्गी लाइन लगा के खडी हुई जात हैं.. फिर हम मुर्गीयन केर चोंच खोल खोल के उनके मुह में एक एक चम्मच बरफ डालते जाते हैं.. तब जाके मुर्गी लोगन का तापमान कम होत है.. हमका याद है बचपन मा जब जब बहुत जादा गर्मी पडत रहे तो हमार दद्दा तौलिया भिगो के सर पे दाल के कचहरी जात रहें.. कंहू चले जाओ डिप्टी पडाव, नयी सड़क, लाटूश रोड.. सब तरफ सन्नाटा सांय सांय करत रहा.. वईस गर्मी मा हमार अम्मा आम केर पना बनावत रहीं.. ऊ कच्चा आम लैके ओका गोबर का कंडा जला के ओमा दाब देत रहीं.. फिर आम भुन जाये के बाद ओका मटके मा पोदीना काला नमक मिला के घोंट घोंट के जौने पना बनावत रही ऊ आज तक याद आवत है..
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