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अांखे पढ़ने की अद्भुत कला बनी बेहतरीन करियर का ऑप्शन, यहां दी जा रहीं कई अहम जानकारियां
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 27 Jul 2017 04:51 PM IST
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अांखे पढने की अदभुत कला अब अाप के लिए बेहतरीन करियर का ऑप्शन बन सकती है। इंसानी हाव-भाव काे एक बार में नाेटिस कर लेना हर किसी के बस की बात नही पर अगर इस हूनर में अाप माहिर हैं। ताे आप भी अपनी जिंदगी संवार सकते हैं।
आंखें पढ़ने की कला में भी करियर
‘आंखें पढ़ने की कला छात्रों को एक बेहतर करियर का विकल्प दे रही हैं। मनोविज्ञान की भाषा, रक्षा, शोध आदि क्षेत्रों में आई ट्रेकिंग (आंखें पढ़ना) का खूब इस्तेमाल किया जा रहा है।’ यह बातें बुधवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डॉ. सुप्रिया रे ने कही।
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इससे पहले सेंट्रल यूनिवर्सिटी आफ हैदराबाद के सेंटर आफ न्यूरल एंड काग्निटिव साइंस के प्रमुख डॉ. रमेश मिश्रा ने बहुभाषा विषय पर किए शोध से छात्रों को अवगत कराया। इस दौरान डॉ. रमेश मिश्रा और डॉ. एआरके वर्मा ने छात्रों के साथ संवाद किया। इस दौरान वर्मा ने कहा कि भारत में कई भाषाओं की जानकारी को प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है जबकि विदेशों में यह लोगों को प्रेरणा देने का बेहतर माध्यम बनती है।
आंखें बताएंगी इंसानी सोच’
आईआईटी कानपुर में काग्नेटिव साइंस पर चार दिवसीय कॉग्नेक्स वर्कशॉप शुरू आई ट्रैकिंग एक ऐसा तरीका है जिससे इंसानी फितरत, उनकी सोच का अध्ययन किया जा सकता है। इस पर रिसर्च चल रहा है और काफी हद तक यह कामयाब भी हुआ। सोमवार को यह बातें आईआईटी कानपुर में आयोजित ‘कॉग्नेक्स वर्कशॉप’ के शुभारंभ समारोह में विशेषज्ञों ने कहीं। 28 जुलाई तक चलने वाले इस वर्कशॉप में काग्नेटिव साइंस (संज्ञानात्मक विज्ञान) की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए कश्मीर विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे अनेक शैक्षिक संस्थानों से छात्र आए हुए हैं। शुभारंभ आईआईटी के निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने किया उन्होंने कहा कि काग्नेटिव साइंस में रिसर्च वर्क के लिए काफी संभावनाएं हैं। इसलिए आप लोगों को काफी कुछ करने का मौका मिलेगा। इस दौरान इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. नारायण श्रीनिवासन, प्रो. हरीश कार्णीक, ह्यूूमेनिटिज एंड सोशल साइंसेज के असिस्टेंट प्रोफेसर अर्क वर्मा सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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आंखें पढ़ने की कला में भी करियर
‘आंखें पढ़ने की कला छात्रों को एक बेहतर करियर का विकल्प दे रही हैं। मनोविज्ञान की भाषा, रक्षा, शोध आदि क्षेत्रों में आई ट्रेकिंग (आंखें पढ़ना) का खूब इस्तेमाल किया जा रहा है।’ यह बातें बुधवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय की डॉ. सुप्रिया रे ने कही।
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वह आईआईटी कानपुर में चल रही बोल-चाल व लेखन में प्रायोगिक तौर तरीकों पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में बोल रही थी। डॉ. रे ने कहा कि आंखों की हलचल किसी मनुष्य के दिमाग में क्या चल रहा है उसके बारे में भी बताती हैं और इसके जरिये किसी व्यक्ति से कैसे बात करनी है उसके भी संकेत दिमाग से मिलने लगते हैं।
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इससे पहले सेंट्रल यूनिवर्सिटी आफ हैदराबाद के सेंटर आफ न्यूरल एंड काग्निटिव साइंस के प्रमुख डॉ. रमेश मिश्रा ने बहुभाषा विषय पर किए शोध से छात्रों को अवगत कराया। इस दौरान डॉ. रमेश मिश्रा और डॉ. एआरके वर्मा ने छात्रों के साथ संवाद किया। इस दौरान वर्मा ने कहा कि भारत में कई भाषाओं की जानकारी को प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है जबकि विदेशों में यह लोगों को प्रेरणा देने का बेहतर माध्यम बनती है।
आंखें बताएंगी इंसानी सोच’
आईआईटी कानपुर में काग्नेटिव साइंस पर चार दिवसीय कॉग्नेक्स वर्कशॉप शुरू आई ट्रैकिंग एक ऐसा तरीका है जिससे इंसानी फितरत, उनकी सोच का अध्ययन किया जा सकता है। इस पर रिसर्च चल रहा है और काफी हद तक यह कामयाब भी हुआ। सोमवार को यह बातें आईआईटी कानपुर में आयोजित ‘कॉग्नेक्स वर्कशॉप’ के शुभारंभ समारोह में विशेषज्ञों ने कहीं। 28 जुलाई तक चलने वाले इस वर्कशॉप में काग्नेटिव साइंस (संज्ञानात्मक विज्ञान) की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए कश्मीर विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे अनेक शैक्षिक संस्थानों से छात्र आए हुए हैं। शुभारंभ आईआईटी के निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने किया उन्होंने कहा कि काग्नेटिव साइंस में रिसर्च वर्क के लिए काफी संभावनाएं हैं। इसलिए आप लोगों को काफी कुछ करने का मौका मिलेगा। इस दौरान इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ. नारायण श्रीनिवासन, प्रो. हरीश कार्णीक, ह्यूूमेनिटिज एंड सोशल साइंसेज के असिस्टेंट प्रोफेसर अर्क वर्मा सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।