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Kanpur News: सीएमओ साहब... अब तो दे दीजिए झींझक सीएचसी की पैथोलॉजी पर ध्यान
Fri, 27 Feb 2026 01:45 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 27 Feb 2026 01:45 AM IST
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झींझक। नगर की सीएचसी में 25 दिनों से मशीनों से होने वाली सभी जांचे पूर्ण रूप से बंद हैं। सीएचसी की पैथोलॉजी में जांचों की सुविधा जन आरोग्य मंदिर के बराबर पहुंच जाने के बाद भी जिम्मेदारों का इस पर ध्यान नहीं है। अस्पताल से बिना जांच करवाए वापस लौटने वाले मरीजों ने सीएमओ से जल्द की पैथोलॉजी में सीबीसी व बायोकेमिस्ट्री जांच शुरू करवाए जाने की मांग की है।
झींझक सीएचसी की पैथोलॉजी में अर्थिंग की समस्या के चलते 25 दिसंबर से बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन बंद है। इससे मरीजों को किडनी, लिवर फंक्शन टेस्ट, कोलेस्ट्रॉल और सीआरपी जैसी महत्वपूर्ण जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही थी। इसके बाद दो फरवरी को पैथोलॉजी की सीबीसी मशीन भी अर्थिंग की समस्या के चलते ठप हो गई है।
इससे हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट्स, संक्रमण सहित अन्य महत्वपूर्ण जांचें भी बंद हो गईं। सीएचसी में प्रतिदिन करीब 300 मरीज इलाज करवाने पहुंचते हैं। इनमें जोड़ों का दर्द, बुखार, खांसी, पेट दर्द आदि समस्याओं के मरीजों की संख्या अधिक रहती है। डॉक्टरों की ओर से प्रतिदिन करीब 50 से 60 लोगों को खून की जांच करवाने की सलाह दी जाती है। ऐसे में मरीज पैथोलॉजी का चक्कर काटने के बाद बिना जांच के ही मायूस होकर वापस लौट जाते हैं। कुछ मरीज आर्थिक स्थिति सही न होने के चलते बिना जांच के ही इलाज करवाते रहते हैं। इससे उन्हें समय पर स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पाता है। यदि वह मेडिकल कॉलेज की ओर भी रुख करें तो कॉलेज की दूरी 40 किलोमीटर से अधिक होने के चलते मरीज हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। जबकि कुछ मरीज निजी पैथोलॉजी का रुख करते हैं।
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अस्पताल आने वाले मरीजों का कहना है कि वह पांच से 10 किलोमीटर दूर सीएचसी में जांच करवाने के लिए पहुंचते हैं। जबकि प्रत्येक माह में गर्भवतियों को विशेष सुविधा देने के लिए आयोजित होने वाले सुरक्षित मातृत्व दिवस में भी गर्भवतियों को पूरी जांचों की सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां आने पर उन्हें पता चलता है कि सीएचसी की पैथोलॉजी में सिर्फ किट के माध्यम से खून की कुछ ही जांचें हो रही हैं। जोकि जन आरोग्य मंदिर पर भी मिल जाती हैं। दो माह से उनकी सीएचसी तक आने की दौड़ बेकार जा रही है।
लालपुर निवासी लोकेंद्र व मंगलपुर के अशोक ने बताया कि सीएचसी में जांच सुविधा बंद होने के कारण उन्हें निजी पैथोलॉजी लैब में जांच करानी पड़ी। इसके लिए उन्हें 350 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। मरीजों का कहना है कि सीएचसी में आए दिन मशीनों की खराबी के कारण जांच व्यवस्था प्रभावित रहती है लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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वर्जन............
मशीनों की खराबी की जानकारी सीएमओ को दी जा चुकी है। बीच में तकनीकी टीम मशीनों की खामी दूर करने के लिए सीएचसी आई थी लेकिन मशीनें दुरुस्त नहीं हो सकी थीं। टीम ने मशीनों में अर्थिंग आने की जानकारी देकर दोबारा आकर खामी दूर करने के लिए कहा था। जल्द ही समस्या का समाधान कर जांच सेवाएं बहाल किया जाएगा। - डॉ. पीयूष त्रिपाठी, सीएचसी अधीक्षक झींझक
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झींझक सीएचसी की पैथोलॉजी में अर्थिंग की समस्या के चलते 25 दिसंबर से बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन बंद है। इससे मरीजों को किडनी, लिवर फंक्शन टेस्ट, कोलेस्ट्रॉल और सीआरपी जैसी महत्वपूर्ण जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही थी। इसके बाद दो फरवरी को पैथोलॉजी की सीबीसी मशीन भी अर्थिंग की समस्या के चलते ठप हो गई है।
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इससे हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट्स, संक्रमण सहित अन्य महत्वपूर्ण जांचें भी बंद हो गईं। सीएचसी में प्रतिदिन करीब 300 मरीज इलाज करवाने पहुंचते हैं। इनमें जोड़ों का दर्द, बुखार, खांसी, पेट दर्द आदि समस्याओं के मरीजों की संख्या अधिक रहती है। डॉक्टरों की ओर से प्रतिदिन करीब 50 से 60 लोगों को खून की जांच करवाने की सलाह दी जाती है। ऐसे में मरीज पैथोलॉजी का चक्कर काटने के बाद बिना जांच के ही मायूस होकर वापस लौट जाते हैं। कुछ मरीज आर्थिक स्थिति सही न होने के चलते बिना जांच के ही इलाज करवाते रहते हैं। इससे उन्हें समय पर स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पाता है। यदि वह मेडिकल कॉलेज की ओर भी रुख करें तो कॉलेज की दूरी 40 किलोमीटर से अधिक होने के चलते मरीज हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। जबकि कुछ मरीज निजी पैथोलॉजी का रुख करते हैं।
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अस्पताल आने वाले मरीजों का कहना है कि वह पांच से 10 किलोमीटर दूर सीएचसी में जांच करवाने के लिए पहुंचते हैं। जबकि प्रत्येक माह में गर्भवतियों को विशेष सुविधा देने के लिए आयोजित होने वाले सुरक्षित मातृत्व दिवस में भी गर्भवतियों को पूरी जांचों की सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां आने पर उन्हें पता चलता है कि सीएचसी की पैथोलॉजी में सिर्फ किट के माध्यम से खून की कुछ ही जांचें हो रही हैं। जोकि जन आरोग्य मंदिर पर भी मिल जाती हैं। दो माह से उनकी सीएचसी तक आने की दौड़ बेकार जा रही है।
लालपुर निवासी लोकेंद्र व मंगलपुर के अशोक ने बताया कि सीएचसी में जांच सुविधा बंद होने के कारण उन्हें निजी पैथोलॉजी लैब में जांच करानी पड़ी। इसके लिए उन्हें 350 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। मरीजों का कहना है कि सीएचसी में आए दिन मशीनों की खराबी के कारण जांच व्यवस्था प्रभावित रहती है लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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मशीनों की खराबी की जानकारी सीएमओ को दी जा चुकी है। बीच में तकनीकी टीम मशीनों की खामी दूर करने के लिए सीएचसी आई थी लेकिन मशीनें दुरुस्त नहीं हो सकी थीं। टीम ने मशीनों में अर्थिंग आने की जानकारी देकर दोबारा आकर खामी दूर करने के लिए कहा था। जल्द ही समस्या का समाधान कर जांच सेवाएं बहाल किया जाएगा। - डॉ. पीयूष त्रिपाठी, सीएचसी अधीक्षक झींझक