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सत्यम-शिवा की दीपावली कौन करेगा रोशन
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भीतरगांव(घाटमपुर)। साढ़ थाना क्षेत्र के चिरली गांव में 17 अक्तूबर की रात चार गज जमीन के विवाद मेें होरीलाल को पेट्रोल डाल जिंदा जला दिया गया। अस्पताल में हुए मौत के लगभग एक महीने बाद भी परिवार सदमे से नहीं उबर पाया। दीपावली में भी मोहल्ले में कोई खास तैयारी नजर नहीं आई। किसान होरीलाल के चारों मासूम बच्चे मां के साथ घर में मौजूद मिले, बदहाली के चलते शुक्रवार शाम तक घर में खिलौना गट्टा तक नहीं आया। वहीं पिता होरी लाल को दबंग द्वारा जिंदा जलाए जाने पर राजनीति चमकाने के लिए पहुंचने वाले नेताओं का कई दिनों तक उनके घर ताता लगा था। अब सत्यम-शिवा की दिवाली को रोशन करने वाला एक भी हाथ आगे नहीं आया है।
होरीलाल की पत्नी शांता बताती है कि दिन की शुरुआत आंसुओं से होती है। वह अपने चारों मासूम बच्चों सत्यम, शिवम, हरिओम व शिवओम को लेकर चिंतित है। शांता बताती है कि घर का सबसे बड़ा उजाला पति की मौत ही बुझ गया तो अब पूरा जीवन अंधकार में ही डूबेगा। दीपावली पर घर में मिठाई तो दूर गट्टा खिलौना तक नहीं आए। ृ
वृद्ध पिता पृथ्वीपाल और मां रामरती बेटे होरीलाल की मौत के बाद से सदमे में है। दोनों घर के बाहर तख्त किनारे बैठे मिले। पिता बताते हैं कि बीते वर्षों परिवार के सभी लोग मिलजुल कर धूमधाम से त्योहार मनाया था। अब तो होरीलाल की मौत ने सब कुछ उजाड़ कर रख दिया।
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होरीलाल की पत्नी शांता बताती है कि दिन की शुरुआत आंसुओं से होती है। वह अपने चारों मासूम बच्चों सत्यम, शिवम, हरिओम व शिवओम को लेकर चिंतित है। शांता बताती है कि घर का सबसे बड़ा उजाला पति की मौत ही बुझ गया तो अब पूरा जीवन अंधकार में ही डूबेगा। दीपावली पर घर में मिठाई तो दूर गट्टा खिलौना तक नहीं आए। ृ
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वृद्ध पिता पृथ्वीपाल और मां रामरती बेटे होरीलाल की मौत के बाद से सदमे में है। दोनों घर के बाहर तख्त किनारे बैठे मिले। पिता बताते हैं कि बीते वर्षों परिवार के सभी लोग मिलजुल कर धूमधाम से त्योहार मनाया था। अब तो होरीलाल की मौत ने सब कुछ उजाड़ कर रख दिया।
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