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क्रोम सल्फेट डंप कर रहीं टेनरियां होंगी सील
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 27 Jul 2017 04:51 PM IST
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बेसिक क्रोम सल्फेट (बीसीएस) फैला रहीं टेनरियां सील की जाएंगी। कानपुर के नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने यह निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को टेनरियों का निरीक्षण कराने के निर्देश भी दिए हैं। निरीक्षण के दौरान कानपुर के जाजमऊ में सड़कों के किनारे पड़े सल्फेट को तत्काल उठवाकर अकबरपुर स्थित रैमकी (वेस्ट निस्तारण प्लांट) पर पहुंचाएं। इस दौरान राखी मंडी में हानिकारक वेस्ट पड़ा होने की जानकारी दी गई। नगर स्वास्थ्य अधिकारी को इसे भी रैमकी साइट पर भिजवाने के निर्देश दिए गए।
एनजीटी ने नगर निगम से बीसीएस पर चार सप्ताह में किए जाने वाले कार्यों की जानकारी मांगी है। इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि राखी मंडी में इकट्ठा राखी का नमूना जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट दो से तीन दिन में आ जाएगी। एनजीटी ने गंगा नदी में मिलने से पूर्व अंतिम बिंदु पर स्क्रीन टैप सिस्टम लगाने के आदेश दिए हैं। स्क्रीन टैप लगाने और सॉलिड वेस्ट को नालों में फेंकने से रोकने के लिए वायर मैस ग्रिल की योजना बनाने के निर्देश दिए गए।
इंफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट के कनवेंस चैनल से निकलने वाले स्लज में 600 टोटल सस्पेंडेड सॉलिड (टीएसएस) की जगह 6000 से 8000 टीएसएस की मात्रा पाई गई है। इसमें टेनरियों से निकलने वाला स्लज भी शामिल है। इस पर डीएम के जरिए सभी टेनरियों की जांच कराकर टेनरी मालिकों पर विधिक कार्यवाही के निर्देश दिए गए। साथ ही कॉमन क्रोम रिकवरी प्लांट पर सीसीटीवी कैमरा लगाने के भी निर्देश दिए गए। गंगा में गंदगी जाने से रोकने के उपायों की वीडियोग्राफी कराने के लिए भी निर्देशित किया गया।
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बैठक में जलकल महाप्रबंधक आरपीएस सलूजा, निगम के मुख्य अभियंता मनीष कुमार सिंह, जोनल अभियंता आरके सिंह, पर्यावरण अभियंता आरके पाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एई एके माथुर, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक घनश्याम द्विवेदी और जल निगम के केमिस्ट अजय कनौजिया रहे।
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एनजीटी ने नगर निगम से बीसीएस पर चार सप्ताह में किए जाने वाले कार्यों की जानकारी मांगी है। इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि राखी मंडी में इकट्ठा राखी का नमूना जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट दो से तीन दिन में आ जाएगी। एनजीटी ने गंगा नदी में मिलने से पूर्व अंतिम बिंदु पर स्क्रीन टैप सिस्टम लगाने के आदेश दिए हैं। स्क्रीन टैप लगाने और सॉलिड वेस्ट को नालों में फेंकने से रोकने के लिए वायर मैस ग्रिल की योजना बनाने के निर्देश दिए गए।
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इंफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट के कनवेंस चैनल से निकलने वाले स्लज में 600 टोटल सस्पेंडेड सॉलिड (टीएसएस) की जगह 6000 से 8000 टीएसएस की मात्रा पाई गई है। इसमें टेनरियों से निकलने वाला स्लज भी शामिल है। इस पर डीएम के जरिए सभी टेनरियों की जांच कराकर टेनरी मालिकों पर विधिक कार्यवाही के निर्देश दिए गए। साथ ही कॉमन क्रोम रिकवरी प्लांट पर सीसीटीवी कैमरा लगाने के भी निर्देश दिए गए। गंगा में गंदगी जाने से रोकने के उपायों की वीडियोग्राफी कराने के लिए भी निर्देशित किया गया।
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बैठक में जलकल महाप्रबंधक आरपीएस सलूजा, निगम के मुख्य अभियंता मनीष कुमार सिंह, जोनल अभियंता आरके सिंह, पर्यावरण अभियंता आरके पाल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एई एके माथुर, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक घनश्याम द्विवेदी और जल निगम के केमिस्ट अजय कनौजिया रहे।