हिमालय पर चढ़कर ‘डर के आगे जीत’ हासिल करने जा रहे ये बच्चे
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मत थर-थर-थर कांपो तुम, इस अवसर को अब भांपो तुम ये वक्त है तुम्हें पुकार रहा, इससे अब दूर न भागो तुम...। हरिद्वार की संस्था माउंट एवरेस्ट फाउंडेशन हर वर्ष रोमांचक कार्यक्रम आयोजित करती है। इसके तहत बच्चों को पहाड़ों पर चढ़ने की ट्रेनिंग दी जाती है। प्रशिक्षण के बाद बच्चों को हिमालय पर चढ़ने के लिए भेजा जाता है। इस संस्था ने कानपुर देहात के जवाहर नवोदय विद्यालय के कक्षा 11 के छात्र देवेंद्र कुमार व छात्रा अंशिका कटियार को चयनति किया है।
लखनऊ संभाग में आने वाले जवाहर नवोदय विद्यालय के 29 बच्चों का चयन किया गया है। प्राचार्य योगेंद्र भक्त ने बताया कि 31 अगस्त से 5 सितंबर तक यह कार्यक्रम मनाली में आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रशिक्षण के बाद बच्चे हिमालय की चढ़ाई चढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि इसके लिए अभिभावकों से अनापत्ति प्रमाण समेत कई औपचारिकताएं पूर्ण कराई जाएंगी। संस्था आने जाने का खर्च भी वहन करेगी। इस कार्यक्रम के लिए चयनित छात्र देवेंद्र पुत्र राकेश कुमार ने बताया कि वह मैथा के भक्तिनपुरवा का निवासी है। वह वॉलीबाल, क्रिकेट खेल का शौकीन है। पहाड़ पर चढ़ने की विशेष रुचि है। सिकंदरा के जितेंद्र की बेटी अंशिका ने बताया कि उसकी पहाड़ों पर चढ़ने की इच्छा शुरू से रही है। इसके पहले कई बार मध्यप्रदेश स्थित कई पहाड़ों पर चढ़ने की कोशिश की है। संस्था की ओर से छात्रों के चयन पर विद्यालय के शिक्षक व साथी छात्रों ने उन्हें बधाई दी है।
धनश्री से लें प्रेरणा
विदुषी विकलांगों, नेत्रहीनों को कराती हैं पर्वतारोहण
बंगलूरू के क्राइस्ट चर्च कॉलेज से मनोविज्ञान में परास्नातक करने वाली विदुषी विकलांगों, नेत्रहीनों को पर्वतारोहण कराती हैं। लगभग वो इनेबल इंडिया में कम्युनिटी इनीशिएटिव की नेशनल कोर्डिनेटर हैं।
भारत के कुछ महत्वपूर्ण ट्रैकिंग क्षेत्र
उत्तराखंड
हिमाचल प्रदेश
सिक्किम
पर्वतारोहण (ट्रैकिंग) में भविष्य
ग्राउंड कोर्डिनेटर
ट्रैकर्स से संवाद का गुण, प्रबंधन का कौशल होना चाहिए। शुरुआती वेतन 3 से 5 लाख रुपये सालाना।
ट्रैक लीडर्स
14000 फीट या अधिक ऊंचाई पर पर्वतारोहण का अनुभव। महीनों घर से दूर पहाड़ों पर रहने का सामर्थ्य। नेतृत्व क्षमता। शुरुआती वेतन 4 से 6 लाख रुपये सालाना।
कंटेंट राइटर
ट्रैक रिसर्चर
देश भर के ट्रैक की महत्वपूर्ण सूचना जुटाना। पर्वतारोहियों को उनकी रुचि, समय और क्षमताओं के अनुसार संबंधित विकल्प बताना। बेहतर संवाद का हुनर होना चाहिए।