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चेयरमैन के भाई की कंपनी ने बिना टेंडर कराए लाखों के काम
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कानपुर देहात। अकबरपुर निकाय में चेयरमैन के भाई की कंपनी को बिना टेंडर कोटेशन के ही लाखों का काम दिया गया। वहीं, उपकरणों की खरीद में भी मनमानी की गई। तीन सदस्यीय समिति की जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट डीएम को सौंपी गई है।
अकबरपुर नगर निकाय प्रशासन ने चेयरमैन के भाई की चंद्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी को काम देने में नियमों को दरकिनार कर दिया। कमिश्नर के फर्जी हस्ताक्षर करने के मामले में चेयरमैन के भाई पर पूर्व में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया जा चुका है। वहीं, संदीप निगम की शिकायत के बाद सीडीओ सौम्या पांडेय की अध्यक्षता में वरिष्ठ कोषाधिकारी केके पांडेय व एक्सईएन लोनिवि मुकेश चंद्र शर्मा ने चंद्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा कराए गए कार्यों की जांच कराई। पाया गया कि बिना टेंडर व कोटेशन के पॉलिथीन नियंत्रण के लिए जूट के थैला खरीद के लिए 40 हजार रुपये का भुगतान चंद्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी को किया गया।
जांच में ईओ देवहूति पांडेय व चेयरमैन ज्योत्सना कटियार ने सीधे भुगतान की बात स्वीकार की। वहीं, सफाई कर्मियों को देने के लिए बिना टेंडर कोटेशन के 4.48 लाख रुपये से झाडू़ एवं अन्य सुरक्षा उपकरणों की खरीद चंद्रा कंस्ट्रक्शन से की गई। इतना ही नहीं निकाय प्रशासन ने वाहन धुलाई सफाई के लिए करीब 1.25 लाख रुपये से प्रेशर मशीन खरीदी। उक्त खरीद में नियम विरुद्ध अल्पकालीन कोटेशन की प्रक्रिया अपनाकर वित्तीय अनियमितता की गई। इससे शासकीय धन का दुरुपयोग हुआ। कूड़ा गाड़ी की मरम्मत के लिए भी जेम पोर्टल से कंपनी चयन न कर चंद्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी को काम दिया गया। उक्त कार्य में 1.98 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता हुई। जांच समिति के सदस्य एक्सईएन लोक निर्माण विभाग मुकेश चंद्र शर्मा ने बताया कि नियमों की अनदेखी कर बिना टेंडर कोटेशन के लाखों का काम कराया गया। जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए डीएम को दी गई है।
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अकबरपुर नगर निकाय प्रशासन ने चेयरमैन के भाई की चंद्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी को काम देने में नियमों को दरकिनार कर दिया। कमिश्नर के फर्जी हस्ताक्षर करने के मामले में चेयरमैन के भाई पर पूर्व में धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया जा चुका है। वहीं, संदीप निगम की शिकायत के बाद सीडीओ सौम्या पांडेय की अध्यक्षता में वरिष्ठ कोषाधिकारी केके पांडेय व एक्सईएन लोनिवि मुकेश चंद्र शर्मा ने चंद्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा कराए गए कार्यों की जांच कराई। पाया गया कि बिना टेंडर व कोटेशन के पॉलिथीन नियंत्रण के लिए जूट के थैला खरीद के लिए 40 हजार रुपये का भुगतान चंद्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी को किया गया।
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जांच में ईओ देवहूति पांडेय व चेयरमैन ज्योत्सना कटियार ने सीधे भुगतान की बात स्वीकार की। वहीं, सफाई कर्मियों को देने के लिए बिना टेंडर कोटेशन के 4.48 लाख रुपये से झाडू़ एवं अन्य सुरक्षा उपकरणों की खरीद चंद्रा कंस्ट्रक्शन से की गई। इतना ही नहीं निकाय प्रशासन ने वाहन धुलाई सफाई के लिए करीब 1.25 लाख रुपये से प्रेशर मशीन खरीदी। उक्त खरीद में नियम विरुद्ध अल्पकालीन कोटेशन की प्रक्रिया अपनाकर वित्तीय अनियमितता की गई। इससे शासकीय धन का दुरुपयोग हुआ। कूड़ा गाड़ी की मरम्मत के लिए भी जेम पोर्टल से कंपनी चयन न कर चंद्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी को काम दिया गया। उक्त कार्य में 1.98 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता हुई। जांच समिति के सदस्य एक्सईएन लोक निर्माण विभाग मुकेश चंद्र शर्मा ने बताया कि नियमों की अनदेखी कर बिना टेंडर कोटेशन के लाखों का काम कराया गया। जांच रिपोर्ट कार्रवाई के लिए डीएम को दी गई है।
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