CGST Inspector Arrested: बाबू से बना इंस्पेक्टर..चार-पांच साल में होना था रिटायर, आवास से दस्तावेज भी जब्त
Kanpur News: सीजीएसटी कार्यालय में घूस लेते गिरफ्तार आरोपी इंस्पेक्टर को चार-पांच में सेवानिवृत्त होना था। आरोपी दो साल पहले लखनऊ से तबादला होकर आया था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कानपुर में सर्वोदयनगर स्थित सीजीएसटी कार्यालय में घूस लेते गिरफ्तार आरोपी इंस्पेक्टर अजय पोरवाल बाबू से इंस्पेक्टर बना है। दो साल पहले लखनऊ कार्यालय से तबादला होकर शहर आया था। सेवानिवृत्त के चार-पांच साल ही बचे हैं। वहीं, सीबीआई के अफसरों ने आनंदपुरी स्थित आवास पर जांच-पड़ताल की।
यहां नकदी और कुछ संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। बताया गया कि शिकायतकर्ता से फर्म के पंजीकरण के लिए पहले 10 हजार घूस मांगी थी। बाद में पांच हजार पर बात तय हुई। फर्म के पंजीकरण में घूस लेने की शिकायत सीबीआई एंटी करप्शन लखनऊ में की गई थी। दोपहर में टीमें शिकायतकर्ता के साथ आरोपी के पास पहुंचीं।
टीम का एक अफसर शिकायतकर्ता का रिश्तेदार बनकर आया था। जैसे ही आरोपी ने रुपये लिए। उसे रुपयों के साथ गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद विभाग के उच्च अफसरों को मामले की जानकारी दी गई। आरोपी के पास जिन-जिन फर्म से जुड़े दस्तावेज थे। उन्हें खंगाला गया। कई घंटे की जांच-पड़ताल के बाद टीम आरोपी को उसके आवास लेकर गई। वहां पर भी जांच-पड़ताल की गई।
छह साल बाद फिर आई सीबीआई
सीजीएसटी कार्यालय एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। 2018 में सीबीआई ने छापा मारकर सीजीएसटी कमिश्नर संसारचंद को घूस के आरोप में गिरफ्तार किया था। 23 मार्च 2021 को सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के आरोप में एक और एफआईआर दर्ज की थी। इसमें उन पर करीब दो करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति जुटाने का आरोप था। इसके बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।
सीक्रेट फंड और हिंदी प्रकरण भी आया था प्रकाश में
सीजीएसटी कार्यालय पिछले साल भी चर्चा में रहा था। यहां पर तैनात रहे कमिश्नर सोमेश तिवारी ने हिंदी में काम न करने देने पर उच्च अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इसके बाद में उनका तबादला कर दिया गया था। इसके अलावा विभाग के एक अधिकारी ने मुखबिरों के लिए आने वाले सीक्रेट फंड में करोड़ों के घोटाले के आरोप लगाकर इसकी शिकायत प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री को की गई थी, लेकिन अफसरों ने इस मामले को भी दबा दिया था।