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Kanpur News: डिजिटल ऑन स्क्रीन मार्किंग के विरोध में सीबीएसई शिक्षक
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कानपुर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए लागू डिजिटल ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली का शिक्षकों ने दबे स्वर में विरोध करना शुरू कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि बिना किसी पूर्व तैयारी के उन पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। कई शिक्षकों में अनुभव की कमी है, ऐसे में पहले प्रशिक्षण देना चाहिए थे।
इस नई व्यवस्था के तहत शिक्षक अब कॉपियों की जांच कंप्यूटर स्क्रीन पर करेंगे। बोर्ड का मानना है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सटीक और तेज होगी जिससे परिणाम समय से पहले घोषित किए जा सकेंगे। इस बदलाव को लेकर कुछ शिक्षक चिंतित भी हैं। शिक्षकों का कहना है कि सैंपल के रूप में शिक्षकों के पास बोर्ड की ओर से कापियां भेजी गई थीं। एक कॉपी को जांचने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगा।
इसके अलावा लगातार स्क्रीन पर कॉपियां जांचने से आंखों पर दबाव और थकान बढ़ने की आशंका है। कुछ शिक्षकों का मानना है कि हाथ से कॉपी जांचने पर छात्र की सोच और अभिव्यक्ति को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है जबकि स्क्रीन पर यह अनुभव थोड़ा सीमित हो सकता है। स्कैन की गुणवत्ता पर निर्भरता के कारण हस्तलेख पढ़ने में भी कठिनाई आ सकती है। कुछ शिक्षकों का कहना है कि फिजिकल कॉपियों के बंडल संभालने की आवश्यकता समाप्त होने से प्रशासनिक बोझ भी कम होगा।
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जय नारायण विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के जीव विज्ञान प्रवक्ता सुशील शुक्ला कहते हैं कि डिजिटल मूल्यांकन समय की मांग है। यदि उचित प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिले तो यह व्यवस्था शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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इस नई व्यवस्था के तहत शिक्षक अब कॉपियों की जांच कंप्यूटर स्क्रीन पर करेंगे। बोर्ड का मानना है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सटीक और तेज होगी जिससे परिणाम समय से पहले घोषित किए जा सकेंगे। इस बदलाव को लेकर कुछ शिक्षक चिंतित भी हैं। शिक्षकों का कहना है कि सैंपल के रूप में शिक्षकों के पास बोर्ड की ओर से कापियां भेजी गई थीं। एक कॉपी को जांचने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगा।
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इसके अलावा लगातार स्क्रीन पर कॉपियां जांचने से आंखों पर दबाव और थकान बढ़ने की आशंका है। कुछ शिक्षकों का मानना है कि हाथ से कॉपी जांचने पर छात्र की सोच और अभिव्यक्ति को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है जबकि स्क्रीन पर यह अनुभव थोड़ा सीमित हो सकता है। स्कैन की गुणवत्ता पर निर्भरता के कारण हस्तलेख पढ़ने में भी कठिनाई आ सकती है। कुछ शिक्षकों का कहना है कि फिजिकल कॉपियों के बंडल संभालने की आवश्यकता समाप्त होने से प्रशासनिक बोझ भी कम होगा।
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जय नारायण विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के जीव विज्ञान प्रवक्ता सुशील शुक्ला कहते हैं कि डिजिटल मूल्यांकन समय की मांग है। यदि उचित प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिले तो यह व्यवस्था शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।