अवैध खनन घोटाले का क्या है पूर्व सीएम अखिलेश से कनेक्शन, डीएम अभय के बाद ये बड़े नाम हैं निशाने पर
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उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित खनन घोटाला मामले में सीबीआई के छापाें से खनन कारोबारियों और प्रशासनिक अधिकारियों में खौफ का माहोल है। फतेहपुर डीएम अभय सिंह के यहां सीबीआई की रेड पड़ने के बाद कई खनन कारोबारियों के हाथपांव फूल गए हैं।
वर्ष 2013 में जिलाधिकारी अभय सिंह के कार्यकाल में जिन लोगों को खनन के पट्टे आवंटित किए गए, उनके घरों पर बुधवार की सुबह ही सीबीआई की टीम ने छापा मारा। टीम ने इन सभी के यहां से तमाम कागजात जब्त किए और अपने साथ ले गई है।
आठ जून 2014 को तत्कालीन डीएम अभय के तबादले के बाद यहां डीएम पद पर राकेश कुमार की तैनाती हुई। अपने एक साल के कार्यकाल में राकेश कुमार ने भी उन्हीं पट्टों को फलने-फूलने का खूब मौका दिया। राकेश कुमार के कार्यकाल में खनन माफियाओं ने नदी की बीच धारा से मौरंग निकालने के लिए ओती घाट में पुल तक बना डाला था।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जनपद आगमन पर मीडिया ने जब जिले में अवैध खनन का मुद्दा उठाया तो सीएम ने सबसे पहले मंडलायुक्त प्रयागराज को निलंबित कर दिया था। इसके दो दिन बाद सीएम ने लखनऊ से डीएम फतेहपुर राकेश कुमार को भी अवैध खनन कराने और नदी की बीच धारा से मौरंग निकलाने के आरोप में निलंबित कर दिया था।
जिला पंचायत सदस्य सुखराज निषाद के असोथर घर में सीबीआई की टीम बुधवार सुबह पहुंची। उन्होंने बताया कि 2006 में उन्हें खनन के दो पट्टे मिले थे। गुरुवल तीन नंबर व कोर्राकनक दो नंबर। इन्हें तीन साल तक चलाया। इसके बाद एक साल बंद रखा।
अप्रैल 2014 में डीएम अभय के समय नवीनीकृत हुआ। इसके बाद 2016 में अप्रैल माह में स्टे हो जाने से फिर बंद हो गया। सुखराज निषाद ने बताया कि सीबीआई टीम इससे पहले उनसे फतेहपुर व लखनऊ में पूछताछ कर चुकी है।
बुधवार को फिर एक टीम गांव आई और उनसे एनओसी, डीड, रजिस्ट्री आदि कागज ले गई। जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि सीबीआई टीम ने कागजात के चक्कर में उनके घर के कमरों में छानबीन की। हालांकि ज्यादा देर रुके बिना निकल गई। टीम का वह बराबर सहयोग कर रहे हैं।