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जहां हुई थी पहली पोस्टिंग 6 साल बाद आज उसी वजह से विवादों में घिरीं चर्चित आईएएस बी चंद्रकला
Sun, 06 Jan 2019 09:12 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 06 Jan 2019 09:12 AM IST
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तेजतर्रा छवि की वजह से सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल कर चुकीं आईएएस बी चंद्रकला पर सीबीआई की बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। उन पर हमीरपुर में डीएम रहते खनन के पट्टा आवंटन नियमों की अनदेखी का आरोप है। हमीरपुर के अलावा जालौन में उनके जानने वालों और लखनऊ स्थित उनके आवास पर भी खनन से जुड़े दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं।
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सीबीआई की टीम ने हमीरपुर और जालौन में मौरंग के बड़े कारोबारियों के घर छापेमारी की है। टीम ने जालौन में ठेकेदार व बसपा नेता रामअवतार राजपूत और करन सिंह राजपूत के यहां छापा मारा है। टीम यहां खनन से जुड़े दस्तावेजों को खंगल रही है। हमीरपुर में भी कारोबारियों के यहां छापामारी चल रही है।
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2008 बैच की आईएएस बी चन्द्रकला की पहली पोस्टिंग अखिलेश सरकार में हमीरपुर में जिलाधिकारी के पद पर की गई थी। चंद्रकला ने जुलाई 2012 के बाद हमीरपुर जिले में 50 मौरंग के खनन के पट्टे किए थे। जबकि ई-टेंडर के जरिए मौरंग के पट्टों को स्वीकृति देने का प्रावधान है। निवर्तमान डीएम भवनाथ ने 2 और डीएम संध्या तिवारी ने 8 मौरंग खनन के पट्टों की स्वीकृति दी थी। बताया जाता है कि इस जिले में 60 मौरंग खनन के पट्टे गलत ढंग से पास किए गए थे।
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साल 2015 में अवैध रूप से जारी मौरंग खनन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2015 को हमीरपुर में जारी किए गए सभी 60 मौरंग खनन के पट्टे अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिए थे। इसके बाद हाईकोर्ट ने 20 जून 2016 को नवीनीकरण और बाधित अवधि के मौरंग पट्टों के खनन पर रोक लगाते हुए निरस्त किए थे।
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याचिका कर्ता विजय द्विवेदी ने खुलासा किया था कि डीएम ने अवैध खनन की इजाजत दी थी। जिसकी वजह से माफियाओं ने खूब पैसे कमाए। मौरंग खदानों पर पूरी तरह से रोक लगाने के बाद भी यूपी के हमीरपुर में अवैध खनन खुलेआम किया गया। 28 जुलाई 2016 को तमाम शिकायतें और याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अवैध खनन की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।