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नकल में फंसे कॉलेजों को क्लीन चिट

Thu, 31 Dec 2015 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर Updated Thu, 31 Dec 2015 01:07 AM IST
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Caught in a clean chit to copy colleges

छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी के रेग्युलर और प्राइवेट एग्जाम 2014-15 में सामूहिक नकल कराने वाले 37 कॉलेजों को परीक्षा नियंत्रक राज बहादुर यादव ने क्लीन चिट दे दी है। परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि किसी कॉलेज को काली सूची में नहीं डाला गया है। इन कॉलेजों को सत्र 2015-16 के एग्जाम में सेेंटर बनाया जाएगा।

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रेग्युलर और प्राइवेट एग्जाम 2014-15 में 37 कॉलेजों में सामूहिक नकल पकड़ी गई थी। उड़नदस्तों और कॉपी जांचने वाले शिक्षकों की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद नकल मामलों की अनफेयर मींस कमेटी (यूएफएम) ने कॉलेजोें को काली सूची में डालने की सिफारिश की। साथ ही कहा कि मार्क्स काटे जाने चाहिए।
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इसी आधार पर परीक्षा समिति ने नकलची स्टूडेंटों के 15 से 20 फीसदी मार्क्स काटकर रिजल्ट जारी कर दिए। अब इन कॉलेजों को क्लीन चिट दे दी गई है।

परीक्षा विभाग की ओर से कहा गया है कि सत्र 2015-16 के एग्जाम सभी कॉलेजों को एग्जाम सेंटर बनाया जाएगा। इसका खाका तैयार कर लिया गया है। 7 जनवरी को प्रस्तावित परीक्षा समिति की मीटिंग में सभी कॉलेजों को परीक्षा केंद्र बनाने पर मुहर लगाई जाएगी।  
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परीक्षा नियंत्रक को किसने धमकाया
कॉलेजों को काली सूची में डाले जाने की खबर छपने के बाद किसी कॉलेज संचालक ने परीक्षा नियंत्रक को धमकाया। इसकी पुष्टि परीक्षा नियंत्रक ने की है।

टेलीफोन पर बात करते हुए परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि काली सूची की खबर से गाली सुननी पड़ रही है। जिन कॉलेजों में नकल पकड़ी गई थी, उनके स्टूडेंटों के मार्क्स काटे गए हैं। साथ ही दो साल तक नकल का प्रमाण पत्र देने पर रोक लगाई गई है।

नुकसान छात्रों का, संचालक बचे
पैसा लेकर सामूहिक नकल कराने वाले कॉलेजों को परीक्षा विभाग ने बख्श दिया है। साफ कहा है कि नकल के आरोपोें से घिरे कॉलेजों के स्टूडेंटों के मार्क्स काटे गए थे। अब सवाल उठता है कि क्या स्टूडेंटों का नुकसान करना और कॉलेज संचालकों को क्लीन चिट देना ठीक है, जो कि शिक्षा को व्यवसाय बनाए हुए हैं।

कुलपति की मंशा पर सवाल

कुलपति नकल रोकने की तमाम कोशिश की। एलएलबी के सेमेस्टर एग्जाम में सेंटर बदलने की बात कही और शिक्षकों को भेजकर मेडिकल की परीक्षा करवाई। मेडिकल की तमाम परीक्षाएं यूनिवर्सिटी कैंपस में कराईं लेकिन अब नकल कराने वाले कॉलेजों का मामला फंस गया है। इन सबको परीक्षा विभाग ने क्लीन चिट दे दी है।


उड़नदस्तों का औचित्य समझ से परे
रेग्युलर और प्राइवेट एग्जाम में उड़नदस्तों का गठन होता है। सबको यूनिवर्सिटी की गाड़ी से अलग-अलग जिलों में छापेमारी के लिए भेजा जाता है। इसमें शामिल शिक्षकों को टीए, डीए भी मिलता है। इस पर लाखों रुपये का खर्च आता है। इसके बावजूद नकल की रिपोर्टिंग पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती है।

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