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जालौन: जावित्री के सामने आने के बाद बयां की पीड़ा, आरोपी बोले- 12 साल झेलीं तकलीफों का हिसाब कौन देगा

Thu, 17 Sep 2020 12:17 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 17 Sep 2020 12:17 AM IST
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Case of teenager alive after 12 years in jalaun
चंद्र प्रकाश मामले में थे आरोपी - फोटो : अमर उजाला
जालौन जिले में जावित्री के लौटने के बाद उसके अपहरण और हत्या में नामजद लोगों की पीड़ा बढ़ गई है। इनका कहना है कि अब 12 सालों में झेली तकलीफों का हिसाब कौन देगा। यह कहते हैं कि बारह साल से अपहरण और हत्या का झूठा आरोप बर्दाश्त किया। जेल काटी। नाते रिश्तेदारी खत्म हुई।
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समाज ने तिरस्कार किया। जमा पूंजी मुकदमा लड़ने में लगा दी। अब क्या कोई उनके खोये हुए को लौटा सकता है। सभी का कहना है कि जो हो गया, उसे भुलाया नहीं जा सकता, आगे तो उनके साथ न्याय होना चाहिए। जावित्री के सामने आने पर आरोपियों से बातचीत में उनका दर्द झलकता रहा।
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मिटा दाग, बच्ची को जानते तक नहीं थे
रावगंज मोहल्ले के तत्कालीन भाजपा सभासद हरी बाबू गुप्ता कहते हैं कि झूठी एफआईआर और चार्जशीट की वजह से बहुत कष्ट झेला है। उनका दिल और पूरा परिवार जानता था कि उन्हें गलत फंसाया गया है। यही सोचकर जेल ही नहीं बल्कि बाहर आने के बाद भी रातों को नींद नहीं आती थी। सबसे बड़ी बात यह थी जिस बच्ची के अपहरण व हत्या का आरोप उन पर लगा, उसे जानते तक नहीं थे। पत्नी शशि गुप्ता बताती हैं कि भगवान ने उनकी सुन ली है। देर से ही सही, परिवार पर लगा हत्या का दाग तो मिट गया।
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बुढ़ापे में बच्ची की हत्या का आरोप, कलेजा फट गया था
मामले में आरोपी बनाए गए ठेकेदार चंद्र प्रकाश विश्नोई बताते हैं कि बुढ़ापे में बच्ची के अपहरण और हत्या का दाग कैसे बर्दाश्त किया, यह वही जानते हैं। तीन माह से अधिक जेल में रहे। इसके बाद जमानत मिली। निर्दोष होते हुए जेल काटने से बड़ा दुख क्या हो सकता है।

उन्हें जो तकलीफें हुईं, वह तो वही जानते हैं। उन्हें फंसाए जाने से पूरे परिवार की बदनामी हुई, उसका क्या होगा। समाज में कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रह गए थे। अब जावित्री के सामने आने से क्या होगा, क्या कोई लौटा पाएगा जो कुछ हमने खोया है इन सालों में।

वाकई ऊपर वाले के यहां देर है, अंधेर नहीं
आरोपी बनाए गए ठेकेदार इशहाक खां बताते हैं कि ऊपर वाले के घर देर है, अंधेर नहीं। देर से सही, न्याय तो मिला। यह बताते हैं कि उन्हें आज तक नहीं पता कि इस मामले में क्यों फंसाया गया। न तो वह बच्ची को जानते हैं, न ही उसके परिवार को।

अचानक पता चलता है कि उनके खिलाफ अपहरण व हत्या का मुकदमा लग गया। वह पूरी तरह निर्देश थे तो ऊपर वाले ने मदद की। इस मामले में नगर पालिका के तत्कालीन अवर अभियंता नानक चंद्र को भी आरोपित किया गया था। अब तो बस ऊपर वाले से इतनी ही दुआ है कि किसी और को ऐसे किसी झूठे आरोप में न फंसाए, कितनी जिल्लत होती है, हर कोई नहीं समझ सकता है।

पहले और अब भी मददगार बने जनप्रतिनिधि
पूरे मामले में जावित्री की मां रज्जो के आरोपों को लेकर जनप्रतिनिधि शुरू से लेकर अब तक आरोपियों के ही पक्ष में खड़े नजर आए। जिस वक्त मामला हुआ था, तब बसपा के तत्कालीन विधायक छोटे सिंह समेत कई दिग्गज बसपाइयों ने एफआईआर का विरोध किया था। अब जावित्री सामने आई है तो भी भाजपा के कुछ जनप्रतिनिधि आरोपियों के साथ बताए जा रहे हैं। इन्होंने मंगलवार की रात डीआईजी को फोन कर जावित्री को जिले में रोके जाने के लिए पुलिस को विवश कर दिया, नहीं तो  जिला पुलिस उसे वापस अलीगढ़ भेजने की तैयारी में थी।

खड़ंजा विवाद के बाद लापता हो गई थी जावित्री
नई बस्ती रामचबूतरा मोहल्ले में अनुसूचित जाति की जावित्री के अपहरण व हत्या के मामले की शुरुआत खड़ंजा विवाद से हुई थी। इलाकाई लोगों ने बताया कि नगर पालिका की ओर से जावित्री के मोहल्ले रामचबूतरे में नया खड़ंजा बिछाया जा रहा था।

पहले के बिछे खड़ंजे की पुरानी ईंटों को ले जाने की बात पर पालिका के तत्कालीन अवर अभियंता नानक चंद्र से जावित्री के परिजनों का विवाद हो गया था। एक दूसरे को देख लेने की धमकी दी गई थी। थाने में दोनों पक्षों से शिकायत हुई। थाने की पंचायत में अवर अभियंता का साथ देने वाले ठेकेदारों पर भी जावित्री के परिजनों ने आरोप लगाए थे। इसके कुछ दिन बाद नाटकीय तरीके से जावित्री गायब हो गई।

जावित्री की मां रज्जो की तहरीर पर अवर अभियंता नानकचंद्र, ठेकेदार अनीस, हरीबाबू गुप्ता तत्कालीन भाजपा सभासद, चंद्रप्रकाश विश्नोई ठेकेदार, तत्कालीन बसपा सभासद इशहाक खान, मोहल्ले की राजकुमारी, रेहाना समेत 10 लोगों पर 2008 में बहला फुसलाकर जावित्री को ले जाने का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद 2009 में रज्जो ने घाटमपुर में मिली किशोरी के शव की शिनाख्त कर ली तो मामले में हत्या की धाराएं भी जोड़ दी गईं। वहीं राजकुमारी की मौत हो चुकी है।
 
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