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करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला: एक और खुलासा, री-सेल वाले सिमकार्ड से बीमा धारकों को लगाया था चूना
Sat, 19 Jun 2021 09:54 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 19 Jun 2021 09:54 AM IST
सार
बीमा धारकों का डाटा चुराकर प्रीमियम के नाम पर ठगने वाले गिरोह के छह लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। लखनऊ से सिम कार्ड बेचने वाले दो आरोपियों को भी दबोचा गया था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
बीमाधारकों के साथ धोखाधड़ी के मामले में क्राइम ब्रांच की टीम ने एक और खुलासा किया है। पुलिस का दावा है जालसाज बीमाधारकों को चूना लगाने के बाद प्रयोग में लाया गया सिमकार्ड दोबारा सिम देने वाले एजेंटों को आधी कीमत पर बेच देते थे।
जिसके चलते इन सिम कार्ड की लोकेशन देश के अलग अलग स्थान पर मिलती है। इससे अपराधी पुलिस के पकड़ से दूर हो जाते हैं। बीमा धारकों का डाटा चुराकर प्रीमियम के नाम पर ठगने वाले गिरोह के छह लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
लखनऊ से सिम कार्ड बेचने वाले दो आरोपियों को भी दबोचा गया था। एडीसीपी क्राइम दीपक भूकर ने बताया कि पुराने समय में सिम कार्ड से अपराध करने के बाद आरोपी उसे तोड़ दिया करते थे जिससे पुलिस को उनकी लोकेशन न पता चल सके।
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अब साइबर अपराधियों ने तरीका बदल दिया है। अब वह सिम कार्ड को नष्ट नहीं करते हैं बल्कि आधे दामों पर दोबारा उसी एजेंट को ही बेच देते हैं। ऐसे में जब पुलिस आईएमईआई नंबर सॉफ्टवेयर पर रन कराती है तो उसकी लोकेशन किसी और शहर में मिलने लगती है।
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जिसके चलते इन सिम कार्ड की लोकेशन देश के अलग अलग स्थान पर मिलती है। इससे अपराधी पुलिस के पकड़ से दूर हो जाते हैं। बीमा धारकों का डाटा चुराकर प्रीमियम के नाम पर ठगने वाले गिरोह के छह लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
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लखनऊ से सिम कार्ड बेचने वाले दो आरोपियों को भी दबोचा गया था। एडीसीपी क्राइम दीपक भूकर ने बताया कि पुराने समय में सिम कार्ड से अपराध करने के बाद आरोपी उसे तोड़ दिया करते थे जिससे पुलिस को उनकी लोकेशन न पता चल सके।
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अब साइबर अपराधियों ने तरीका बदल दिया है। अब वह सिम कार्ड को नष्ट नहीं करते हैं बल्कि आधे दामों पर दोबारा उसी एजेंट को ही बेच देते हैं। ऐसे में जब पुलिस आईएमईआई नंबर सॉफ्टवेयर पर रन कराती है तो उसकी लोकेशन किसी और शहर में मिलने लगती है।
एक हजार का सिम कार्ड पांच सौ रुपये में री सेल
साइबर ठग नेटवर्किंग कंपनियों के एजेंट से एक हजार का प्री एक्टीवेटेड सिम खरीदते हैं। साइबर फ्रॉड के बाद ठग उसी एजेंट को सिम पांच सौ रुपये में बेच देता है। एजेंट दोबारा वही सिम किसी और गिरोह को एक हजार में बेच देता है। ऐसे ही यह साइकिल चलती रहती है और एक सिमकार्ड औसतन दस से बारह घटनाओं में इस्तेमाल हो जाता है।
60 सिम कार्ड री सेल हुए
बीमाधारकों के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में पुलिस को 60 ऐसे सिम कार्ड के बारे में जानकारी मिली है जिन्हें री सेल किया गया। एडीसीपी क्राइम ने बताया कि अगर सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां चाह लें तो इस तरह के प्री एक्टीवेशन को अपने स्तर पर रोक सकती हैं। क्राइम ब्रांच सिम बेचने वाले एजेंटों के पीछे पड़ी है जल्द ही बड़ा खुलासा होगा।
साइबर ठग नेटवर्किंग कंपनियों के एजेंट से एक हजार का प्री एक्टीवेटेड सिम खरीदते हैं। साइबर फ्रॉड के बाद ठग उसी एजेंट को सिम पांच सौ रुपये में बेच देता है। एजेंट दोबारा वही सिम किसी और गिरोह को एक हजार में बेच देता है। ऐसे ही यह साइकिल चलती रहती है और एक सिमकार्ड औसतन दस से बारह घटनाओं में इस्तेमाल हो जाता है।
60 सिम कार्ड री सेल हुए
बीमाधारकों के साथ हुई धोखाधड़ी के मामले में पुलिस को 60 ऐसे सिम कार्ड के बारे में जानकारी मिली है जिन्हें री सेल किया गया। एडीसीपी क्राइम ने बताया कि अगर सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां चाह लें तो इस तरह के प्री एक्टीवेशन को अपने स्तर पर रोक सकती हैं। क्राइम ब्रांच सिम बेचने वाले एजेंटों के पीछे पड़ी है जल्द ही बड़ा खुलासा होगा।