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आईआरएस अफसर बनकर ठगी का मामला, शिकार फंसाने के लिए जालसाज ने बनाए थे फर्जी चेक
Mon, 15 Jun 2020 11:58 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 15 Jun 2020 11:58 PM IST
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आईआरएस, आईपीएस अफसर बनकर ठगी का मामला
- फोटो : amar ujala
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इटावा में धोखाधड़ी में माहिर जालसाज मनीष से बरामद सिंडीकेट बैंक के लगभग साढ़े दस करोड़ रुपये के दोनों चेक भी फर्जी पाए गए हैं। इन्हें कंप्यूटर प्रिंटर के जरिये क्लोनिंग से तैयार किया गया था। ताकि भारी भरकम रकम के यह चेक दिखाकर सामने वाले पर प्रभाव छोड़ा जा सके।
फर्जी आईआरएस, आईपीएस अधिकारी बनकर ठगी करने वाले गैंग का सरगना मनीष अपने साथियों के साथ जेल जा चुका है। उसके कारनामे खुल रहे हैं। गिरफ्तारी के वक्त उससे बरामद सिंडीकेट बैंक के साढ़े 9 करोड़ और 96 लाख 90 हजार 715 रुपये के दो चेक भी जांच में फर्जी मिले हैं।
नगर स्थित सिंडीकेट बैंक शाखा के मैनेजर ज्ञानेश कुमार ने बताया कि जालसाज मनीष के साथ उन्होंने काम नहीं किया। अन्यथा कई अन्य भी शक के दायरे में होते। हालांकि उसके बैंक से जुड़ाव की वजह से चर्चा तो रहेगी। उन्होंने बताया कि दोनों चिेक फर्जी पाए गए हैं।
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मनीष कंप्यूटर इंजीनियर है। उसने प्रिंटर के जरिए क्लोनिंग कर ये चेक तैयार किए होंगे। लगता है कि उसने ये चेक अपने रसूख को दर्शाने के लिए तैयार किए हों। उन्होंने बताया कि ग्वालियर में बैंक लोन को लेकर मनीष पर धोखाधड़ी करने का आरोप है।
इसके बाद बैंक ने उसका डिमोशन कर दिया था। अक्तूबर 2018 से उसने ऑफिस ज्वाइन नहीं किया है। लिहाजा वह बैंक की नजर में फिलहाल भगोड़ा है। उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर विजिलेंस जांच जारी है।
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फर्जी आईआरएस, आईपीएस अधिकारी बनकर ठगी करने वाले गैंग का सरगना मनीष अपने साथियों के साथ जेल जा चुका है। उसके कारनामे खुल रहे हैं। गिरफ्तारी के वक्त उससे बरामद सिंडीकेट बैंक के साढ़े 9 करोड़ और 96 लाख 90 हजार 715 रुपये के दो चेक भी जांच में फर्जी मिले हैं।
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नगर स्थित सिंडीकेट बैंक शाखा के मैनेजर ज्ञानेश कुमार ने बताया कि जालसाज मनीष के साथ उन्होंने काम नहीं किया। अन्यथा कई अन्य भी शक के दायरे में होते। हालांकि उसके बैंक से जुड़ाव की वजह से चर्चा तो रहेगी। उन्होंने बताया कि दोनों चिेक फर्जी पाए गए हैं।
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मनीष कंप्यूटर इंजीनियर है। उसने प्रिंटर के जरिए क्लोनिंग कर ये चेक तैयार किए होंगे। लगता है कि उसने ये चेक अपने रसूख को दर्शाने के लिए तैयार किए हों। उन्होंने बताया कि ग्वालियर में बैंक लोन को लेकर मनीष पर धोखाधड़ी करने का आरोप है।
इसके बाद बैंक ने उसका डिमोशन कर दिया था। अक्तूबर 2018 से उसने ऑफिस ज्वाइन नहीं किया है। लिहाजा वह बैंक की नजर में फिलहाल भगोड़ा है। उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर विजिलेंस जांच जारी है।