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जिंदगी से खिलवाड़: तीन नकली दवा विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज, नकली एंटी बायोटिक, पेन किलर के साथ पकड़े गए
Sun, 03 Apr 2022 10:14 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 03 Apr 2022 10:14 PM IST
सार
तीन नकली दवा निर्माताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एक के पास से नकली एंटी बायोटिक और दो के पास से पेन किलर पकड़ी गई थी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मानव जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले तीन नकली दवा निर्माताओं के खिलाफ मुख्य महानगरीय मजिस्ट्रेट (सीएमएम) कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इनमें एक लखनऊ और दो कानपुर के रहने वाले हैं। इनके पास से नकली एंटी बायोटिक और दो के पास से पेन किलर पकड़ी गई थी।
ड्रग विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने 21 जून 2021 को आसिफ मोहम्मद खां पुत्र मुन्ना निवासी नाजिरबाग, बेकनगंज और पिंटू गुप्ता पुत्र कन्हैया लाल निवासी जगईपुरवा, चकेरी को जीफी एंटीबायोटिक दवा के साथ पकड़ा गया था। ये बिल, वाउचर नहीं दिखा पाए।
यह भी नहीं बताया कि दवा कहां से खरीदी। सैंपल की रिपोर्ट में पता चला कि इसमें सीफिक्सीम सॉल्ट ही नहीं है। इन दवाओं को खाने से रोगी को नुकसान हो सकता था। दवा कंपनी ने भी ऐसे किसी व्यक्ति को दवा सप्लाई से मना कर दिया।
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जीफी को उच्च श्रेणी की एंटी बायोटिक माना जाता है। यह जीवन रक्षक दवा है। ड्रग इंस्पेक्टर संदेश मौर्या ने बताया कि यह नहीं बता पाए कि दवाएं कहां से खरीदी थीं? इस पर उन्हें निर्माता मानकर सीएमएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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ड्रग विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने 21 जून 2021 को आसिफ मोहम्मद खां पुत्र मुन्ना निवासी नाजिरबाग, बेकनगंज और पिंटू गुप्ता पुत्र कन्हैया लाल निवासी जगईपुरवा, चकेरी को जीफी एंटीबायोटिक दवा के साथ पकड़ा गया था। ये बिल, वाउचर नहीं दिखा पाए।
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यह भी नहीं बताया कि दवा कहां से खरीदी। सैंपल की रिपोर्ट में पता चला कि इसमें सीफिक्सीम सॉल्ट ही नहीं है। इन दवाओं को खाने से रोगी को नुकसान हो सकता था। दवा कंपनी ने भी ऐसे किसी व्यक्ति को दवा सप्लाई से मना कर दिया।
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जीफी को उच्च श्रेणी की एंटी बायोटिक माना जाता है। यह जीवन रक्षक दवा है। ड्रग इंस्पेक्टर संदेश मौर्या ने बताया कि यह नहीं बता पाए कि दवाएं कहां से खरीदी थीं? इस पर उन्हें निर्माता मानकर सीएमएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
इसी तरह टीम ने पांच अगस्त 2021 को गोविंदनगर में मनीष मिश्रा को पेन किलर अल्ट्रासेट दवा के साथ पकड़ा था। वह दवा बेचने कहीं जा रहा था। मनीष टीम को यह नहीं बता पाया कि दवाएं कहां से खरीदी हैं। उसके पास बिल, वाउचर भी नहीं मिला। दवा का सैंपल जांच के लिए राजकीय विश्लेषक लैब भेज दिया गया।
इसके बाद अल्ट्रासेट बनाने वाली दवा कंपनी को ड्रग विभाग ने पत्र भेजा तो पता चला कि कंपनी ने ऐसे किसी व्यक्ति को दवा ही नहीं बेची। मनीष मिश्रा पुत्र उमाशंकर मिश्रा मूलत: ग्राम वंडे रायबरेली का रहने वाला है और इस वक्त सेक्टर आई, एलडीए कालोनी लखनऊ में रह रहा है। लैब की जांच में अल्ट्रासेट दवा नकली निकली। इसमें ट्रैमेडॉल हाइड्रोक्लोराइड और एसीटेमिनोफेन सॉल्ट नहीं था।
इसके बाद अल्ट्रासेट बनाने वाली दवा कंपनी को ड्रग विभाग ने पत्र भेजा तो पता चला कि कंपनी ने ऐसे किसी व्यक्ति को दवा ही नहीं बेची। मनीष मिश्रा पुत्र उमाशंकर मिश्रा मूलत: ग्राम वंडे रायबरेली का रहने वाला है और इस वक्त सेक्टर आई, एलडीए कालोनी लखनऊ में रह रहा है। लैब की जांच में अल्ट्रासेट दवा नकली निकली। इसमें ट्रैमेडॉल हाइड्रोक्लोराइड और एसीटेमिनोफेन सॉल्ट नहीं था।