{"_id":"60520a968ebc3e590a0047d5","slug":"capture-the-fort-of-king-jayachandra-in-kannauj","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कब्जेदारों ने ‘फतह’ किया राजा जयचंद का किला, आंखें मूंदे रहा पुरातत्व विभाग, अब हरकत में आए जिम्मेदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कब्जेदारों ने ‘फतह’ किया राजा जयचंद का किला, आंखें मूंदे रहा पुरातत्व विभाग, अब हरकत में आए जिम्मेदार
Wed, 17 Mar 2021 07:31 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 17 Mar 2021 07:31 PM IST
विज्ञापन
राजा जयचंद के किले पर कब्जा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण महकमे और जिले के अफसरों की अनदेखी से कब्जेदारों ने राजा जयचंद के किले को फतह कर लिया। किले की चहारदीवारी तोड़ दी। मकान बना लिए। इस संरक्षित किले की सौ मीटर परिधि में निर्माण से अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण महकमे के जिम्मेदार हरकत मेें आए हैं।
सन 606 में राजा हर्षवर्धन ने शहर के प्राचीन किले से अखंड भारत पर राज्य किया था। 1226 में इस किले से राजा जयचंद ने उत्तर से दक्षिण नर्मदा तट और बंगाल तक शासन किया। 2010 में भारत सरकार ने भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से किले की खुदाई कराई थी।
इसमें प्राचीन धातु से निर्मित सामग्री और मूर्तियां मिली थीं। इसके बाद किले को राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया। भारतीय पुरातत्व विभाग का उपमंडल कार्यालय स्थापित हो गया। किले के चारों ओर करीब 100 मीटर का क्षेत्र प्रतिबंधित घोषित कर दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
सन 606 में राजा हर्षवर्धन ने शहर के प्राचीन किले से अखंड भारत पर राज्य किया था। 1226 में इस किले से राजा जयचंद ने उत्तर से दक्षिण नर्मदा तट और बंगाल तक शासन किया। 2010 में भारत सरकार ने भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से किले की खुदाई कराई थी।
विज्ञापन
इसमें प्राचीन धातु से निर्मित सामग्री और मूर्तियां मिली थीं। इसके बाद किले को राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया। भारतीय पुरातत्व विभाग का उपमंडल कार्यालय स्थापित हो गया। किले के चारों ओर करीब 100 मीटर का क्षेत्र प्रतिबंधित घोषित कर दिया गया।
विज्ञापन
इस दायरे में किसी तरह का निर्माण या खनन न करने के आदेश दिए गए। 100 मीटर के आगे का क्षेत्र 200 मीटर तक विनियमित है। इस दायरे में भारतीय पुरातत्व विभाग की एनओसी मिलने के बाद ही निर्माण कार्य की अनुमति मिलेगी। यह नियम-कायदे पुरातत्व विभाग की फाइलों में धरे के धरे रह गए।
अधिकारियों ने इस ओर से आंखें मूंद लीं। नतीजा यह रहा कि 200 मीटर के दायरे की बात दूर, लोगों ने किले की चहारदीवारी तोड़कर ऊपर तक मकान बना लिए। इस समय किले के चारों ओर और ऊपर 250 से ज्यादा मकान बने हैं।
100 मीटर के प्रतिबंधित दायरे और इससे आगे 100 मीटर विनियमित क्षेत्र में बगैर अनुमति के 600 के करीब मकान बने हैं। भारतीय पुरातत्व महकमे के अवर संरक्षण सहायक दीपक कुमार का कहना है कि नया निर्माण या मरम्मत कराने पर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करना शुरू कर दिया गया है। पहले से कब्जा वालों के खिलाफ भी लिखापढ़ी चल रही है। अधिकारियों के आदेशानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने इस ओर से आंखें मूंद लीं। नतीजा यह रहा कि 200 मीटर के दायरे की बात दूर, लोगों ने किले की चहारदीवारी तोड़कर ऊपर तक मकान बना लिए। इस समय किले के चारों ओर और ऊपर 250 से ज्यादा मकान बने हैं।
100 मीटर के प्रतिबंधित दायरे और इससे आगे 100 मीटर विनियमित क्षेत्र में बगैर अनुमति के 600 के करीब मकान बने हैं। भारतीय पुरातत्व महकमे के अवर संरक्षण सहायक दीपक कुमार का कहना है कि नया निर्माण या मरम्मत कराने पर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करना शुरू कर दिया गया है। पहले से कब्जा वालों के खिलाफ भी लिखापढ़ी चल रही है। अधिकारियों के आदेशानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कई बार भेजे गए नोटिस, पड़ा राजनीतिक दबाव
किले के ऊपर या आसपास लगातार अतिक्रमण कर मकानों का निर्माण जारी है। भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से 2015 में 250 लोगों को नोटिस भेजा गया था। 2017 में 370 और 2018 में पांच लोगों को नोटिस भेजा गया। हर बार नोटिस भेजने के बाद राजनीतिक दबाव शुरू हो जाता। इससे किला कब्जा मुक्त नहीं हो पाया। कब्जेदार बढ़ते जा रहे हैं।
पर्याप्त स्टाफ फिर भी निगरानी ढीली
किले को संरक्षित रखने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मंडल आगरा की ओर से उप मंडल कार्यालय स्थापित किया गया है। कार्यालय में अवर संरक्षण सहायक दीपक कुमार के अलावा तीन अन्य कर्मचारियों की तैनाती है। पर्याप्त स्टाफ के बाद भी संरक्षित किले की निगरानी नहीं हो पा रही है।
सालों बाद पहली एफआईआर, कब्जेदारों में खौफ
सालों बाद किले पर कब्जे में पहली एफआईआर से कब्जेदारों में खौफ है। मंगलवार को यह एफआईआर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उप मंडल के अवर सहायक संरक्षण अधिकारी दीपक कुमार ने जेरकिला निवासी दुर्गेश राजपूत के खिलाफ सदर कोतवाली में दर्ज कराई है। इस बार भी जिम्मेदारों ने कार्रवाई में लापरवाही बरती को शायद किला कभी भी कब्जा मुक्त न हो पाए।
किले के ऊपर या आसपास लगातार अतिक्रमण कर मकानों का निर्माण जारी है। भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से 2015 में 250 लोगों को नोटिस भेजा गया था। 2017 में 370 और 2018 में पांच लोगों को नोटिस भेजा गया। हर बार नोटिस भेजने के बाद राजनीतिक दबाव शुरू हो जाता। इससे किला कब्जा मुक्त नहीं हो पाया। कब्जेदार बढ़ते जा रहे हैं।
पर्याप्त स्टाफ फिर भी निगरानी ढीली
किले को संरक्षित रखने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मंडल आगरा की ओर से उप मंडल कार्यालय स्थापित किया गया है। कार्यालय में अवर संरक्षण सहायक दीपक कुमार के अलावा तीन अन्य कर्मचारियों की तैनाती है। पर्याप्त स्टाफ के बाद भी संरक्षित किले की निगरानी नहीं हो पा रही है।
सालों बाद पहली एफआईआर, कब्जेदारों में खौफ
सालों बाद किले पर कब्जे में पहली एफआईआर से कब्जेदारों में खौफ है। मंगलवार को यह एफआईआर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उप मंडल के अवर सहायक संरक्षण अधिकारी दीपक कुमार ने जेरकिला निवासी दुर्गेश राजपूत के खिलाफ सदर कोतवाली में दर्ज कराई है। इस बार भी जिम्मेदारों ने कार्रवाई में लापरवाही बरती को शायद किला कभी भी कब्जा मुक्त न हो पाए।