{"_id":"57efde134f1c1b9211573ccc","slug":"burning-with-fever-doctor-took-a-home-run-away","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुखार से तप रहे डॉक्टर छुट्टी लेकर घर भागे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुखार से तप रहे डॉक्टर छुट्टी लेकर घर भागे
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 01 Oct 2016 09:32 PM IST
विज्ञापन
डेमो पिक्स बीमार डॉक्टर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फीवर ने मेडिकल स्टूडेंट को भी अपनी चपेट में ले लिया है। बुखार से तप रहे मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर छुट्टी लेकर घर लौट रहे हैं। मेडिसिन के जूनियर डॉ. मेहताब आलम अब भी आईसीयू में भर्ती हैं। हालांकि डॉक्टरों का दावा है कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है। उधर कुछ और जूनियर डॉक्टरों में डेंगू के लक्षण मिलने से सीनियर डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई है।
आईसीयू में भर्ती दो जूनियर डॉक्टर शनिवार को अपने-अपने घर को लौट गए। मेडिसिन की नोडल अधिकारी प्रो. रिचा गिरी ने बताया कि जूनियर डॉक्टर के पिता उसे घर ले जाने को आए थे। उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा था। उधर, डेंगू वार्ड में मरीजों की भीड़ के कारण अव्यवस्था बढ़ने लगी है। ग्लूकोज की बोतलें मच्छरदानी में लटकाकर इलाज किया जा रहा है।
जूनियर डॉक्टरों पर काम का बोझ
जूनियर डॉक्टरों को 36 से 48 घंटे लगातार काम करना पड़ रहा है। सिर्फ फ्रेश होेने के लिए आधे घंटे की छुट्टी मिलती है। खाना भी वार्डों में बैठकर खाना पड़ रहा है। इसे लेकर जूनियर डॉक्टरों में गुस्सा भी है। खास बात यह है कि मेडिकल कॉलेज में डेंगू और बुखार की चपेट में सबसे ज्यादा जूनियर डॉक्टर (प्रथम वर्ष) ही आ रहे हैं।
विज्ञापन
एसआर वापस नहीं आएंगे, सीनियर ज्यादा काम करेंगे
मेडिसिन विभाग के सीनियर डॉक्टरों ने तय कर लिया है कि सीनियर रेजीडेंटों (एसआर) की मनमानी नहीं होने देंगे। एसआर की कमी को पूरा करने के लिए सीनियर डॉक्टरों ने ज्यादा काम करने की बात कही है। बता दें कि काम के बोझ का हवाला देकर छह एसआर ने इस्तीफा दे दिया है। कॉलेज प्रशासन ने इनके दबाव को न मानते हुए इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। नोडल अधिकारी प्रो. रिचा गिरी ने कहा कि एसआर बिना काम वेतन लेना चाह रहे थे। बीमारियों का मौसम कुछ दिन ही रहेगा, सीनियर डॉक्टरों ने कहा है कि वह ज्यादा काम करेंगे लेकिन लापरवाही एसआर की वापसी नहीं होनी चाहिए।
डेंगू के 200 संदिग्ध मरीज
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में तीन दिनों में डेंगू के 200 से ज्यादा संदिग्ध मरीजों के खून की जांच हुई है। बताया जा रहा है कि 40 फीसदी में डेंगू की पुष्टि हुई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के डर से मेडिकल कॉलेज प्रशासन डेंगू पॉजिटिव मरीजों की सही संख्या नहीं बता रहा है।
विज्ञापन
आईसीयू में भर्ती दो जूनियर डॉक्टर शनिवार को अपने-अपने घर को लौट गए। मेडिसिन की नोडल अधिकारी प्रो. रिचा गिरी ने बताया कि जूनियर डॉक्टर के पिता उसे घर ले जाने को आए थे। उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा था। उधर, डेंगू वार्ड में मरीजों की भीड़ के कारण अव्यवस्था बढ़ने लगी है। ग्लूकोज की बोतलें मच्छरदानी में लटकाकर इलाज किया जा रहा है।
विज्ञापन
जूनियर डॉक्टरों पर काम का बोझ
जूनियर डॉक्टरों को 36 से 48 घंटे लगातार काम करना पड़ रहा है। सिर्फ फ्रेश होेने के लिए आधे घंटे की छुट्टी मिलती है। खाना भी वार्डों में बैठकर खाना पड़ रहा है। इसे लेकर जूनियर डॉक्टरों में गुस्सा भी है। खास बात यह है कि मेडिकल कॉलेज में डेंगू और बुखार की चपेट में सबसे ज्यादा जूनियर डॉक्टर (प्रथम वर्ष) ही आ रहे हैं।
विज्ञापन
एसआर वापस नहीं आएंगे, सीनियर ज्यादा काम करेंगे
मेडिसिन विभाग के सीनियर डॉक्टरों ने तय कर लिया है कि सीनियर रेजीडेंटों (एसआर) की मनमानी नहीं होने देंगे। एसआर की कमी को पूरा करने के लिए सीनियर डॉक्टरों ने ज्यादा काम करने की बात कही है। बता दें कि काम के बोझ का हवाला देकर छह एसआर ने इस्तीफा दे दिया है। कॉलेज प्रशासन ने इनके दबाव को न मानते हुए इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। नोडल अधिकारी प्रो. रिचा गिरी ने कहा कि एसआर बिना काम वेतन लेना चाह रहे थे। बीमारियों का मौसम कुछ दिन ही रहेगा, सीनियर डॉक्टरों ने कहा है कि वह ज्यादा काम करेंगे लेकिन लापरवाही एसआर की वापसी नहीं होनी चाहिए।
डेंगू के 200 संदिग्ध मरीज
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में तीन दिनों में डेंगू के 200 से ज्यादा संदिग्ध मरीजों के खून की जांच हुई है। बताया जा रहा है कि 40 फीसदी में डेंगू की पुष्टि हुई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के डर से मेडिकल कॉलेज प्रशासन डेंगू पॉजिटिव मरीजों की सही संख्या नहीं बता रहा है।