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Kanpur News: कल से शुरू होगा बर्न आईसीयू, मिलेगी राहत
Wed, 04 Nov 2026 02:01 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 04 Nov 2026 02:01 AM IST
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कानपुर देहात। जिले में अब आग या भाप से 40 फीसदी तक झुलसे मरीजों को कानपुर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार से बर्न आईसीयू, बेसिक बर्न यूनिट का संचालन शुरू किया जाएगा। मरीजों को भर्ती करने के लिए 10 बेड सुरक्षित किए गए हैं।
जिला अस्पताल परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से वर्ष 2017-18 में बर्न यूनिट का भवन तैयार किया गया था, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों, कर्मचारियों और जरूरी संसाधनों की कमी के कारण इसका संचालन शुरू नहीं हो सका। ऐसे में आग से झुलसकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति में दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है। मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए दूसरे शहरों की दौड़ लगानी पड़ती है। यहां तक की मामूली रूप से झुलसने वाले मरीज भी रेफर हो जाते थे।
संवाद न्यूज एजेंसी ने अभियान चलाकर इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इसके संचालन की कवायद तेज कर दी। कॉलेज प्रबंधन की ओर से सर्जिकल आईसीयू को बर्न आईसीयू में तब्दील किया गया है। वहीं मरीजों को भर्ती किए जाने के लिए बेसिक बर्न यूनिट में 10 बेड की सुविधा की गई है। साथ ही बर्न यूनिट के संचालन के लिए सर्जन डॉ. शैलेंद्र को नोडल बनाया गया है।
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इसके साथ ही दो जूनियर रेजिडेंट, छह इंटर्न, चार स्टाफ नर्स, कंसल्टेंट की तैनाती की गई है। प्राचार्य डॉ. अंबरीश गुप्ता ने बताया कि बर्न आईसीयू का संचालन होने से शुरुआती दौर में 40 फीसदी तक झुलसे मरीजों के रेफरल पर अंकुश लगेगा। वहीं एडवांस बर्न यूनिट में उपकरणों के संचालन के लिए करीब 1060000 रुपये विद्युतीकरण करवाया जा रहा है। जल्द ही कार्य पूरा कर इसका भी संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
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पीडियाट्रिक आईसीयू का भी होगा शुभारंभ
प्राचार्य डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता ने बताया कि कॉलेज में बृहस्पतिवार को पीडियाट्रिक आईसीयू का भी संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इस यूनिट में अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों और विशेषज्ञ चिकित्सकों व प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती से नवजात और बच्चों से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का समय पर बेहतर इलाज संभव हो सकेगा। इससे बच्चों के उपचार में त्वरित निर्णय और त्वरित देखभाल सुनिश्चित होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सीय सुविधाएं मिल सकेंगी।
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जिला अस्पताल परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से वर्ष 2017-18 में बर्न यूनिट का भवन तैयार किया गया था, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों, कर्मचारियों और जरूरी संसाधनों की कमी के कारण इसका संचालन शुरू नहीं हो सका। ऐसे में आग से झुलसकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति में दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है। मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के लिए दूसरे शहरों की दौड़ लगानी पड़ती है। यहां तक की मामूली रूप से झुलसने वाले मरीज भी रेफर हो जाते थे।
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संवाद न्यूज एजेंसी ने अभियान चलाकर इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इसके संचालन की कवायद तेज कर दी। कॉलेज प्रबंधन की ओर से सर्जिकल आईसीयू को बर्न आईसीयू में तब्दील किया गया है। वहीं मरीजों को भर्ती किए जाने के लिए बेसिक बर्न यूनिट में 10 बेड की सुविधा की गई है। साथ ही बर्न यूनिट के संचालन के लिए सर्जन डॉ. शैलेंद्र को नोडल बनाया गया है।
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इसके साथ ही दो जूनियर रेजिडेंट, छह इंटर्न, चार स्टाफ नर्स, कंसल्टेंट की तैनाती की गई है। प्राचार्य डॉ. अंबरीश गुप्ता ने बताया कि बर्न आईसीयू का संचालन होने से शुरुआती दौर में 40 फीसदी तक झुलसे मरीजों के रेफरल पर अंकुश लगेगा। वहीं एडवांस बर्न यूनिट में उपकरणों के संचालन के लिए करीब 1060000 रुपये विद्युतीकरण करवाया जा रहा है। जल्द ही कार्य पूरा कर इसका भी संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
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पीडियाट्रिक आईसीयू का भी होगा शुभारंभ
प्राचार्य डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता ने बताया कि कॉलेज में बृहस्पतिवार को पीडियाट्रिक आईसीयू का भी संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इस यूनिट में अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों और विशेषज्ञ चिकित्सकों व प्रशिक्षित स्टाफ की तैनाती से नवजात और बच्चों से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का समय पर बेहतर इलाज संभव हो सकेगा। इससे बच्चों के उपचार में त्वरित निर्णय और त्वरित देखभाल सुनिश्चित होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सीय सुविधाएं मिल सकेंगी।