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PNB घोटाला: बीटेक पास दीपांशी बैंक में थी चपरासी, इस तरीके से ट्रांसफर करती थी रकम; निशाने पर रहते थे ऐसे लोग

Wed, 04 Nov 2026 11:03 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 04 Nov 2026 11:03 AM IST
सार

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की शाखा में ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में सीबीआई ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें बैंक की महिला कार्यालय सहायक दीपांशी और उसका निजी सहयोगी आशुतोष कुमार पाठक शामिल हैं। दीपांशी बीटेक पास है और बैंक में चपरासी थी। दीपांशी ऐसे खाताधारकों को निशाना बनाती थी, जिन्हें जमीन अधिग्रहण का मुआवजा मिला था। इनमें कम पढ़े-लिखे खाताधारक शामिल थे। 

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PNB Fraud BTech Graduate Deepanshi Worked as Peon, Misused Staff Logins to Transfer Crores
PNB Fraud - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई के ऐच्छर गांव स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की शाखा में ग्राहकों के खातों से करोड़ों की हेराफेरी में गिरफ्तार मुख्य आरोपी दीपांशी शर्मा बीटेक पास है। बैंक रिकॉर्ड में उसकी तैनाती चपरासी (प्यून) पद पर थी। इसके बावजूद वह बैंक मैनेजर समेत अन्य कर्मचारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर खातों से रकम निकालने और दूसरे खातों में स्थानांतरित करने में सफल रही।
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दीपांशी ने बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की यूजर आईडी व पासवर्ड याद कर लिए थे। वह ऐसे खाताधारकों को निशाना बनाती थी, जिन्हें जमीन अधिग्रहण का मुआवजा मिला था। इनमें कम पढ़े-लिखे खाताधारक शामिल थे। आरोप है कि वह उनके खातों से रकम निकालकर दूसरे खातों में भेजती थी।
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खाताधारकों को उसने अपना निजी मोबाइल नंबर भी दे रखा था। जब कोई खाताधारक बैंक आने की बात करता तो वह पहले ही बाहर पहुंच जाती थी। कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें बैंक के अंदर जाने से रोक देती थी। हेराफेरी की रकम का लेनदेन छिपाने के लिए उसने गांव के परिचितों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया।

 
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बैंक रिकॉर्ड और जांच में सामने आए नामों के मुताबिक, मामले में दीपांशी के अलावा प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी और शांती देवी के खिलाफ केस दर्ज है। ये सभी साकीपुर गांव के रहने वाले हैं। 
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आशुतोष पाठक और सरोज देवी ऐच्छर गांव के निवासी हैं। दोनों दीपांशी के पूर्व परिचित और करीबी बताए जा रहे हैं। एक अन्य आरोपी शालिनी मंडी श्याम नगर की रहने वाली है। जांच एजेंसियां अब इन खातों के जरिये हुए लेनदेन और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। 

पीएनबी हेराफेरी में पहली बार गिरफ्तारी, महिला कर्मचारी दीपांशी समेत दो पकड़े
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की शाखा में ग्राहकों के खातों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में सीबीआई ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें बैंक की महिला कार्यालय सहायक दीपांशी और उसका निजी सहयोगी आशुतोष कुमार पाठक शामिल हैं। 

 

जांच एजेंसी की तीन नवंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, आशुतोष को महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया गया। उसे पुणे की विशेष अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड हासिल किया गया है। दोनों आरोपियों से पूछताछ कर हेराफेरी से जुड़े अन्य लोगों और लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।

 

सीबीआई के मुताबिक, ग्राहकों के खातों से अनधिकृत रूप से 10.24 करोड़ रुपये निकाले गए थे। हालांकि, शुरुआती शिकायतों में हेराफेरी का दायरा 35 करोड़ रुपये से अधिक होने का दावा किया गया था। खाताधारकों का आरोप है कि यह गड़बड़ी करीब तीन साल तक चलती रही। 

आरोप है कि बैंक में कार्यालय सहायक के पद पर तैनात दीपांशी ने निजी व्यक्ति और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलीभगत की। इसके बाद खातों से रकम निकालकर दूसरी जगह स्थानांतरित की गई। बैंक खातों से बिना अधिकृत अनुमति के डेबिट ट्रांजेक्शन किए गए। इसी शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 29 अक्तूबर को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच
सीबीआई अब हेराफेरी से जुड़े कई पहलुओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि खातों से निकाली गई रकम किन खातों में भेजी गई। इस पूरी प्रक्रिया में अन्य कौन-कौन लोग शामिल थे। बैंक के आंतरिक लेनदेन, अनधिकृत डेबिट और रकम के हस्तांतरण से जुड़े पहलुओं की भी जांच होगी। फिलहाल सीबीआई की जांच आगे बढ़ने के साथ खाताधारकों को मामले में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी और अपनी जमा पूंजी वापस मिलने की उम्मीद है।
 

अब तक 70 प्रतिशत खाताधारकों के खाते में पैसा वापस करने का दावा
वहीं खाताधारकों का नेतृत्व कर रहे ब्रिजेश भाटी का दावा है कि अबतक 70 प्रतिशत खाताधारकों के खाते पैसा वापस करने की बात बैंक की ओर से कही गई है। जल्द ही अन्य लोगों के पैसे वापस करने का आश्वासन मिला है।

 

हालांकि रकम खाते में वापस आने के बाद भी कई खाताधारक उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इसकी वजह केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) की प्रक्रिया पूरी होने में लग रहा समय है। खाताधारकों के मुताबिक केवाईसी पूरी होने में दो से तीन दिन का समय लग रहा है। इस संबंध में बैंक अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

मंगलवार सुबह से शाम तक बैंक में ठगी के शिकार खाताधारकों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। बड़ी संख्या में लोग अपनी रकम की स्थिति जानने और बैंक अधिकारियों से बातचीत करने पहुंचे। इस दौरान बैंक परिसर में भीड़ लगी रही।
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