फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   bundelkhand issue in lok sabha elections 2019

लोकसभा चुनाव में क्यों नजर नहीं आ रहा बुंदेलखंड को नया राज्य बनाने का मुद्दा, पीएमओ झाड़ रहा पल्ला

Sun, 31 Mar 2019 02:47 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा रशीद सिद्दकी, अमर उजाला, कानपुर
रशीद सिद्दकी, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 31 Mar 2019 02:47 PM IST
विज्ञापन
bundelkhand issue in lok sabha elections 2019
फाइल फोटो
लोकसभा चुनाव की सियासत अपने उफान पर है ऐसे में देश के सबसे बड़े सूबे का एक मुद्दा कहीं भी नजर नहीं आ रहा है। लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं, लेकिन बुंदेलखंड राज्य का मुद्दा प्रमुख राजनीतिक दलों के एजेंडे में नजर नहीं आ रहा। ये दल इसे मुद्दा ही नहीं बना रहे।
विज्ञापन


दूसरी तरफ प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय तक बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए की गई किसी भी कार्रवाई संबंधी जानकारी से साफ इनकार कर रहे हैं। आरटीआई में मांगी गई सूचना पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने गृह मंत्रालय को भेज दिया। गृह मंत्रालय ने ऐसी किसी भी सूचना उपलब्ध होने से इनकार कर दिया है।
विज्ञापन

कई दशकों से चल रही है बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग

यूपी-एमपी के 13 जिलों को शामिल कर बुंदेलखंड राज्य बनाने की मांग कई दशकों से चल रही है। इसको लेकर अभी भी आंदोलन जारी हैं, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दल इस पर गोलमोल रुख अख्तियार किए हैं। आंदोलनकारियों के सामने कहते हैं कि बुंदेलखंड राज्य बनना चाहिए, लेकिन अपनी सरकारों पर दबाव बनाने के नाम पर चुप्पी साध लेते हैं।

बसपा सरकार में उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुंदेलखंड राज्य के लिए प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया गया था। तब से यह वहां ठंडे बस्ते में है। इधर, कई महीनों से बांदा, महोबा और झांसी आदि जिलों में बुंदेलखंड राज्य के लिए आंदोलन और अनशन चल रहे हैं।

आंदोलनकारियों का मानना था कि लोकसभा चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दल इस मांग को अपने एजेंडे में शामिल करेंगे और चुनावी मुद्दा भी बनाएंगे, लेकिन फिलहाल ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा। इससे बुंदेलखंड राज्य के समर्थकों में निराशा के साथ ही रोष भी है।
 

 

विज्ञापन

गृह मंत्रालय के नोडल अधिकारी को भेज गया था यह पत्र

उधर, इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार कितनी गंभीर है, इसकी बानगी आरटीआई में मांगी गई सूचनाओं से जाहिर हो गई है। आरटीआई कार्यकर्ता कुलदीप शुक्ला ने प्रधानमंत्री कार्यालय से आरटीआई में सूचना मांगी थी कि बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए सरकार ने क्या कार्रवाइयां की हैं। यह कब तक संभावित है।

इस पर प्रधानमंत्री कार्यालय में पिछले माह गृह मंत्रालय के नोडल अधिकारी को यह पत्र भेज दिया था। इस पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के जनसूचना अधिकारी रेनू सरिन ने हाल ही में 20 मार्च को आवेदक कुलदीप शुक्ल को भेजे पत्र में कहा है कि उनके द्वारा मांगी गई सूचना उनका कार्यालय नहीं प्रस्तुत कर सकता। 


उत्तर प्रदेश (7 जिले) : बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर। मध्य प्रदेश (6 जिले) : पन्ना, खजुराहो, छतरपुर, टीकमगढ़, सागर, दमोह आदि।
 

विज्ञापन

बुंदेेलखंड से कम क्षेत्रफल में बने हैं 10 राज्य

जनसंख्या या क्षेत्रफल का आधार लेकर बुंदेलखंड राज्य की मांग खारिज नहीं की जा सकती, क्योंकि देश में 10 राज्य ऐसे हैं जो बुंदेलखंड से क्षेत्रफल में छोटे और आबादी में कम हैं। बुुंदेलखंड का क्षेत्रफल लगभग 70 हजार वर्ग किलोमीटर है। यह जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, गोवा जैसे राज्यों से कहीं ज्यादा और बड़ा है।

उत्तराखंड की आबादी करीब 1.5 करोड़ है। क्षेत्रफल 53484 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 13 जिले हैं। इसी तरह हिमाचल प्रदेश में 12 जिले हैं और 55673 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल है। त्रिपुरा में मात्र 37 लाख आबादी है। चार जिले हैं। 10493 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल है। मेघालय में करीब 30 लाख आबादी और सात जिले हैं।

मणिपुर में  करीब 28 लाख जनसंख्या और नौ जिले तथा मात्र 22327 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल है। फिर भी इन सबको राज्य का दर्जा हासिल है। लेकिन हैरत वाली बात यह है कि दो करोड़ आबादी और 13 जिलों वाले बुंदेलखंड को राज्य का दर्जा क्यों नहीं दिया जा रहा।

 सबसे पहले 1955 में गठित प्रथम राज्य पुनर्गठन आयोग ने बुंदेलखंड के सर्वांगीण विकास के लिए इसे अलग राज्य बनाने की सिफारिश की थी। वर्ष 1989 में बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना कर झांसी के शंकरलाल ने अलग राज्य के लिए आंदोलन की शुरुआत की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed