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यूपी: हैलट अस्पताल में भर्ती रोगियों को बेचने की दलाल लगाते हैं बोली
Sun, 31 Jan 2021 11:32 AM IST
शिखा पांडेय
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 31 Jan 2021 11:32 AM IST
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हैलट अस्पताल कानपुर
कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती रोगियों की बिक्री हो रही है। दलाल हैलट में भर्ती रोगियों और उनके परिजनों को बहकाते हैं और उन्हें अच्छे इलाज के नाम पर नर्सिंगहोमों में शिफ्ट करा देते हैं। इसके लिए नर्सिंगहोम दलालों को मोटा कमीशन देते हैं।
दलालों के साथ खासतौर पर निजी एंबुलेंस वाले इस धोखाधड़ी में शामिल हैं। यहां रोगियों से सारा पैसा चूस लिया जाता है। इसके बाद उन्हेें फिर हैलट, उर्सला जाने की सलाह दी जाती है। नर्सिंगहोमों के दलालों का गिरोह हैलट के वार्डों और इमरजेंसी के अंदर-बाहर सक्रिय रहता है।
जिस रोगी की माली हालत ठीक नजर आती है, उन्हें चिह्नित कर लिया जाता है। इसके बाद दलाल उसके परिजनों से हमदर्दी दिखाते हैं और उसे डराकर शिफ्ट करा लेते हैं। रोगियों के अलग-अलग रेेट हैं। कुछ रोगी जिन्हें खास दिक्कत नहीं होती, वे नर्सिंगहोमों में जाकर ठीक हो जाते हैं लेकिन उनका सारा पैसा चूस लिया जाता है।
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जो रोगी आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, उनसे पैसे वसूली के बाद वेंटिलेटर या किसी दूसरी सुविधा की जरूरत बताकर फिर हैलट शिफ्ट कर दिया जाता है। दलालों की गिरफ्त में बाहर से आने वाले रोगियों के अलावा शहर के रोगी भी चपेट में आ जाते हैं।
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दलालों के साथ खासतौर पर निजी एंबुलेंस वाले इस धोखाधड़ी में शामिल हैं। यहां रोगियों से सारा पैसा चूस लिया जाता है। इसके बाद उन्हेें फिर हैलट, उर्सला जाने की सलाह दी जाती है। नर्सिंगहोमों के दलालों का गिरोह हैलट के वार्डों और इमरजेंसी के अंदर-बाहर सक्रिय रहता है।
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जिस रोगी की माली हालत ठीक नजर आती है, उन्हें चिह्नित कर लिया जाता है। इसके बाद दलाल उसके परिजनों से हमदर्दी दिखाते हैं और उसे डराकर शिफ्ट करा लेते हैं। रोगियों के अलग-अलग रेेट हैं। कुछ रोगी जिन्हें खास दिक्कत नहीं होती, वे नर्सिंगहोमों में जाकर ठीक हो जाते हैं लेकिन उनका सारा पैसा चूस लिया जाता है।
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जो रोगी आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं, उनसे पैसे वसूली के बाद वेंटिलेटर या किसी दूसरी सुविधा की जरूरत बताकर फिर हैलट शिफ्ट कर दिया जाता है। दलालों की गिरफ्त में बाहर से आने वाले रोगियों के अलावा शहर के रोगी भी चपेट में आ जाते हैं।
रोगी को ऐसे बहकाते दलाल
- यहां डॉक्टर ढंग से इलाज नहीं करते
- बाहर से दवा मंगाने के लिए रोगी की हालत बिगाड़ देते हैं
- बाहर से जांचें करवा कर सारा पैसा खर्च करवा देंगे
- कोई सीनियर डॉक्टर देखने नहीं आएगा, रोगी मर जाएगा
- नर्सिंगहोम में बड़ा डॉक्टर है, बहुत बढ़िया इलाज होगा
केस स्टडी
आर्यनगर की एक महिला अनुपमा (65) हैलट में भर्ती हुई। उनकी कोविड जांच के लिए रिपोर्ट भेजी गई। दलाल ने उनके बेटे से कहा कि यहां कोई नहीं देखेगा। जीटी रोड स्थित नर्सिंगहोम ले चलिये, वहां रोगी ठीक जाएंगी। यहां मर जाएंगी। परिजन उन्हें नर्सिंगहोम ले गए। वहां दो दिन में ढाई लाख खर्च आया। उसके बाद कोविड रिपोर्ट आई तो कहा कि हैलट ले जाओ। बाद में रोगी कांशीराम अस्पताल में भर्ती हुई।
- यहां डॉक्टर ढंग से इलाज नहीं करते
- बाहर से दवा मंगाने के लिए रोगी की हालत बिगाड़ देते हैं
- बाहर से जांचें करवा कर सारा पैसा खर्च करवा देंगे
- कोई सीनियर डॉक्टर देखने नहीं आएगा, रोगी मर जाएगा
- नर्सिंगहोम में बड़ा डॉक्टर है, बहुत बढ़िया इलाज होगा
केस स्टडी
आर्यनगर की एक महिला अनुपमा (65) हैलट में भर्ती हुई। उनकी कोविड जांच के लिए रिपोर्ट भेजी गई। दलाल ने उनके बेटे से कहा कि यहां कोई नहीं देखेगा। जीटी रोड स्थित नर्सिंगहोम ले चलिये, वहां रोगी ठीक जाएंगी। यहां मर जाएंगी। परिजन उन्हें नर्सिंगहोम ले गए। वहां दो दिन में ढाई लाख खर्च आया। उसके बाद कोविड रिपोर्ट आई तो कहा कि हैलट ले जाओ। बाद में रोगी कांशीराम अस्पताल में भर्ती हुई।
भीतरगांव के एक युवक रोहित (30) को हैलट इमरजेंसी में भर्ती किया गया। बुखार के साथ उसकेे गुर्दों में भी दिक्कत रही है। दलाल उसके परिजन को बहकाता रहा। अगले दिन पैथोलॉजी की रिपोर्ट आने के पहले परिजन उसे निजी एंबुलेंस से लेेकर कल्याणपुर नर्सिंगहोम चले गए। हैलट में उसे लामा दिखा दिया गया। बाद में रोगी के परिजन ने बताया कि युवक को चार दिन भर्ती रखा। साढ़े पांच लाख रुपये का बिल बना दिया। जब पैसे खर्च हो गया तो कहा कि उर्सला में फ्री में डायलिसिस होती है, वहां ले जाइये।
ऐसा मिलता है कमीशन
दलालों को एक रोगी का कमीशन एक हजार से पांच हजार रुपये तक मिलता है। एक दलाल ने बताया कि सिजेरियन प्रसव का एक केस ले जाने पर पांच हजार रुपये मिलता है। सामान्य रोगियों पर एक हजार से तीन हजार तक मिल जाता है। रोगी का हॉस्पिटल स्टे अगर अधिक है तो पैसा ज्यादा मिलता है।
ऐसा मिलता है कमीशन
दलालों को एक रोगी का कमीशन एक हजार से पांच हजार रुपये तक मिलता है। एक दलाल ने बताया कि सिजेरियन प्रसव का एक केस ले जाने पर पांच हजार रुपये मिलता है। सामान्य रोगियों पर एक हजार से तीन हजार तक मिल जाता है। रोगी का हॉस्पिटल स्टे अगर अधिक है तो पैसा ज्यादा मिलता है।
रोगियों को दलाल नर्सिंगहोमों को कमीशन पर बेच रहे हैं। इसमें निजी एंबुलेंस वालों का भी गिरोह सक्रिय है। एक एंबुलेंस वाले के खिलाफ थाने में एफआईआर भी दर्ज कराई है। इसमें कोई डॉक्टर या अस्पताल का स्टाफ शामिल नहीं है। बाहरी तत्व रोगियों के तीमारदारों को बहका देते हैं। वे रोगी को लेकर नर्सिंगहोम ले जाते हैं। जब सारा पैसा खत्म हो जाता है तो फिर हैलट भागकर रोते हुए आते हैं। यह बड़ी समस्या है। इसको लेकर सख्ती कर रहा हूं। दलालों को पकड़ कर एफआईआर करवाऊंगा। - डॉ. आरबी कमल, प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज