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...तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Sun, 24 Jan 2016 01:41 AM IST
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ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर, तेरा साथ न छोड़ेंगे...फिल्म शोले का यह सुपरहिट गीत मानो धर्मेंद्र जायसवाल और विजय ओमर उर्फ विजय लाला ने आत्मसात कर लिया।
धर्मेंद्र की मौत की खबर मिलते ही उनके जिगरी दोस्त विजय ने भी दम तोड़ दिया। घंटाघर और नयागंज के इन दो कारोबारी दोस्तों की मौत कभी न भूलने वाली दास्तां बन गई। 20 साल पुरानी गहरी दोस्ती में वह रोज एक दूसरे के करीब रहते थे। ये दोनों अन्य दोस्तों के साथ बालाजी व अन्य धार्मिक स्थानों से घूमकर 4 को लौटे थे।
पीएसी रोड के सहदुल्लापुर निवासी धर्मेंद्र जायसवाल (46) उर्फ कल्लू की घंटाघर में बर्फ की दुकान है। शुक्रवार रात 9:30 बजे वह दुकान बंद कर घर लौटे। वह खाना खा ही रहे थे कि हालत बिगड़ गई। परिजन नर्सिंग होम ले गए जहां से उन्हें कार्डियोलॉजी रेफर किया गया।
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वहां रात करीब 11 बजे धर्मेंद्र ने दम तोड़ दिया। नौघड़ा निवासी नयागंज के व्यवसायी विजय ओमर (47) को रात 12:30 बजे धर्मेंद्र की मौत की सूचना मिली। विजय के छोटे बेटे समीर ने बताया कि मौत की सूचना मिलते ही पापा विजय की तबियत भी बिगड़ने लगी तो रात में उन्हें धर्मेंद्र अंकल के घर नहीं जाने दिया गया।
शनिवार सुबह साढ़े सात बजे विजय अन्य दोस्तों के साथ धर्मेंद्र के घर पहुंचे और पार्थिव शरीर देखते ही उनकी तबियत बिगड़ गई। पसीना-पसीना होते देख उन्हें भी कार्डियोलॉजी ले जाया गया जहां 8 बजे उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
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धर्मेंद्र की मौत की खबर मिलते ही उनके जिगरी दोस्त विजय ने भी दम तोड़ दिया। घंटाघर और नयागंज के इन दो कारोबारी दोस्तों की मौत कभी न भूलने वाली दास्तां बन गई। 20 साल पुरानी गहरी दोस्ती में वह रोज एक दूसरे के करीब रहते थे। ये दोनों अन्य दोस्तों के साथ बालाजी व अन्य धार्मिक स्थानों से घूमकर 4 को लौटे थे।
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पीएसी रोड के सहदुल्लापुर निवासी धर्मेंद्र जायसवाल (46) उर्फ कल्लू की घंटाघर में बर्फ की दुकान है। शुक्रवार रात 9:30 बजे वह दुकान बंद कर घर लौटे। वह खाना खा ही रहे थे कि हालत बिगड़ गई। परिजन नर्सिंग होम ले गए जहां से उन्हें कार्डियोलॉजी रेफर किया गया।
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वहां रात करीब 11 बजे धर्मेंद्र ने दम तोड़ दिया। नौघड़ा निवासी नयागंज के व्यवसायी विजय ओमर (47) को रात 12:30 बजे धर्मेंद्र की मौत की सूचना मिली। विजय के छोटे बेटे समीर ने बताया कि मौत की सूचना मिलते ही पापा विजय की तबियत भी बिगड़ने लगी तो रात में उन्हें धर्मेंद्र अंकल के घर नहीं जाने दिया गया।
शनिवार सुबह साढ़े सात बजे विजय अन्य दोस्तों के साथ धर्मेंद्र के घर पहुंचे और पार्थिव शरीर देखते ही उनकी तबियत बिगड़ गई। पसीना-पसीना होते देख उन्हें भी कार्डियोलॉजी ले जाया गया जहां 8 बजे उन्होंने भी दम तोड़ दिया।