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बड़ा फैसलाः बिल्हौर-घाटमपुर न्यायिक क्षेत्राधिकार वापसी की उम्मीद, होगा ये फायदा
Sat, 08 Jun 2019 08:21 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sat, 08 Jun 2019 08:21 PM IST
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विधि मंत्री बृजेश पाठक (फाइल फोटो)
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कानपुर में बिल्हौर और घाटमपुर तहसील के न्यायिक क्षेत्राधिकार को कानपुर देहात से हटाकर कानपुर नगर करने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने की उम्मीद जगी है। विधि मंत्री बृजेश पाठक ने बताया कि जिला प्रशासन की ओर से भेजा गया प्रस्ताव उन्हें मिला है। इसकी समीक्षा कर फैसला लिया जाएगा। विधि मंत्रालय से प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद ही न्यायिक क्षेत्र में बदलाव संबंधी शासनादेश जारी होगा।
ऐसा होने की स्थिति में अधिवक्ताओं और वादकारियों का छह वर्ष लंबा संघर्ष भी फलीभूत होगा। साथ ही घाटमपुर और बिल्हौर के वादकारियों को कानपुर देहात के अकबरपुर माती नहीं जाना होगा। दोनों तहसील क्षेत्रों के लोगों के मुकदमों की सुनवाई कानपुर नगर में ही होगी।
गौरतलब है कि शासन के निर्देश पर 19 जुलाई 2013 को बिल्हौर और घाटमपुर का न्यायिक क्षेत्राधिकार कानपुर देहात को सौंप दिया गया था। 23 नवंबर 2013 को बिल्हौर-घाटमपुर न्यायिक क्षेत्राधिकार वापस लाओ संघर्ष समिति का गठन हुआ। तब से आंदोलन चल रहा था।
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ऐसा होने की स्थिति में अधिवक्ताओं और वादकारियों का छह वर्ष लंबा संघर्ष भी फलीभूत होगा। साथ ही घाटमपुर और बिल्हौर के वादकारियों को कानपुर देहात के अकबरपुर माती नहीं जाना होगा। दोनों तहसील क्षेत्रों के लोगों के मुकदमों की सुनवाई कानपुर नगर में ही होगी।
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गौरतलब है कि शासन के निर्देश पर 19 जुलाई 2013 को बिल्हौर और घाटमपुर का न्यायिक क्षेत्राधिकार कानपुर देहात को सौंप दिया गया था। 23 नवंबर 2013 को बिल्हौर-घाटमपुर न्यायिक क्षेत्राधिकार वापस लाओ संघर्ष समिति का गठन हुआ। तब से आंदोलन चल रहा था।
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