बिकरू कांड: जय बाजपेई की संपत्तियों पर प्रवर्तन निदेशालय की नजर, ब्रह्मनगर वाला घर होगा जमींदोज
ईडी ने जिला प्रशासन से बिकरू कांड से जुड़े जय बाजपेई की संपत्तियों का ब्यौरा मांगा है। साथ ही, आय के स्रोत का पता भी करेगी। आशंका जताई जा रही है कि विकास दुबे की काली कमाई संपत्तियों में खपाई गई है।
विस्तार
बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे के खजांची जय बाजपेई पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। एजेंसी ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर जय और उसके परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज संपत्तियों की जानकारी मांगी है। एजेंसी को शक है कि विकास दुबे अपना काला धन जय बाजपेई को देता था। जय ने इस पैसे से अपने व करीबी रिश्तेदारों के नाम संपत्तियां खरीदी हैं। इससे पहले एजेंसी ने विकास दुबे और उसके परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज संपत्तियों का पता लगाने के लिए भी प्रशासन से पत्राचार किया था।
50 करोड़ की संपत्तियां हो चुकी हैं जब्त
जिला प्रशासन पहले ही विकास दुबे, जय बाजपेई और दोनों के परिजनों के नाम दर्ज करीब 50 करोड़ की संपत्तियों को सील कर चुका है। अब उन लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है, जो दोनों के करीबी रहे हैं। ईडी पता करेगी कि उस संपत्ति के लिए खरीददारों के पास पैसा कहां से आया। आय का स्रोत स्पष्ट नहीं हुआ या विकास से जुड़ा रहा तो ईडी उसे जब्त करने की कार्रवाई करेगी।
ब्रह्मनगर वाला घर होगा जमींदोज
बिकरू कांड के मास्टरमाइंड रहे विकास दुबे के खजांची जय कांत बाजपेयी की ब्रह्मनगर वाला घर जमींदोज होगा। जिला प्रशासन ने अपनी जांच में इस मकान को रेलवे की पुरानी रेल (ट्राम) लाइन पर होना पाया है। जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन ने रेलवे को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दे दी है। अब अगर रेलवे अपनी जमीन को खाली कराने के लिए प्रशासन से संपर्क करता है तो सरकारी जमीन पर हुए इस अवैध कब्जे को गिराने की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन रेलवे को भेजे गए पत्र के जवाब का इंतजार कर रहा है।
दरअसल, बिकरू कांड के बाद विकास दुबे के गिरोह के सभी सदस्यों की संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान जयकांत बाजपेई की ब्रह्मनगर में भी एक संपत्ति का पता चला। जानकारी मिली कि इसी संपत्ति के पते पर नाम पर चार जनवरी 2016 को मेसर्स अक्षय इंटरप्राइजेज नाम से फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया गया और हैंडलूम, टेक्सटाइल व ठेकेदारी के लिए बनी इस फर्म में कागजों में ही लेनदेन होते रहे। फर्जीवाड़े की जांच पुलिस करती रही। लेकिन संपत्ति को जब्त करने के लिए जब जांच की गई तो पता चला कि यह रेलवे की जमीन है। चूंकि प्रशासन इस दौरान सरकारी जमीन पर हुए अवैध कब्जों को भी गिराने की कार्रवाई कर रहा है। इसलिए उसने रेलवे को पत्र लिखकर अवैध कब्जे की जानकारी दे दी। अब अगर रेलवे सक्रिय होता है, तो जयकांत के अवैध कब्जे प्रशासन गिराएगा।के लिए भी आदेश दे सकती है।
प्रशासन की सीलिंग की कार्रवाई पर फंस सकता है पेंच
शास्त्री नगर में विकास दुबे की पत्नी के नाम दर्ज जिस मकान को प्रशासन पुलिस की सूचना पर सील करने की तैयारी में था। वह मकान किसी और का होने के बाद अब मामला उलझ गया है। मकान के वर्तमान मालिक ने हाईकोर्ट से फिलहाल स्टे ले लिया है। पीड़ित पक्ष की दलील है कि उसने 2012 में यह मकान दुबे दंपति से खरीद लिया था। जबकि दुबे की संपत्तियों वाली पुलिस की सूची में यह मकान अब भी रिचा दुबे के नाम बताया जा रहा है। इसी सूची के आधार पर अब तक प्रशासन सीलिंग की कार्रवाई करता रहा है। लेकिन अब पुलिस की सूची पर अगर हाईकोर्ट में सवाल उठा तो, कोर्ट अन्य सील हुई संपत्तियों के दस्तावेजाें की जांच