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बिकरू कांड : बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट में दी दलील, प्रभात मिश्रा का एनकाउंटर नहीं, पुलिस ने की थी हत्या

Fri, 03 Jun 2022 02:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jun 2022 02:12 AM IST
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Bikru case : Defense lawyer argued in court, Prabhat Mishra was not an encounter, the police had killed
कानपुर देहात। बिकरू कांड के आरोपी राजेंद्र मिश्रा के अधिवक्ता ने उनके निर्दोष होने का प्रार्थना पत्र गुरुवार को कोर्ट में दाखिल कर बहस की। अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि पुलिस ने आरोपी के नाबालिग पुत्र प्रभात मिश्रा को विकास दुबे का साथी बता उसकी निर्मम हत्या कर एनकाउंटर का नाम दे दिया।
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वहीं, आरोपी तत्कालीन एसओ विनय तिवारी के अधिवक्ता ने बहस के लिए समय की मांग की। इस पर कोर्ट ने 500 रुपये हर्जाना लगाया। शुक्रवार को मामले में फिर सुनवाई होगी।
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दो जुलाई 2020 को बिकरू कांड के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए विकास दुबे, प्रभात मिश्रा समेत कई आरोपियों को एनकाउंटर में मार गिराया था और कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मामले की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट सुधाकर राय की अदालत में चल रही है।
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पुलिस ने एनकाउंटर में मारे गए प्रभात मिश्रा के पिता राजेंद्र मिश्रा को भी मामले में आरोपी बनाया है। गुरुवार को राजेंद्र मिश्रा के अधिवक्ता संतोष बाजपेई व पवनेश कुमार शुक्ला ने उनके निर्दोष होने का प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल किया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता पवनेश कुमार शुक्ला ने कोर्ट में कहा कि प्रभात मिश्रा होनहार छात्र था। प्रमाण पत्रों के मुताबिक उसकी उम्र 16 वर्ष थी। फर्जी एनकाउंटर पर जब मानवाधिकार का प्रश्न उठा दिया गया, तो पुलिस ने एक माह बाद पिता राजेंद्र मिश्रा को आरोपी बना जेल भेज दिया।
पुलिस ने मामले में दूसरे आरोपी शशिकांत के बयानों के आधार पर राजेंद्र मिश्रा का नाम आरोपियों में शामिल करने की बात की है। जबकि शशिकांत ने पुलिस को कोई ऐसा बयान नहीं दिया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध करते हुए अदालत से कहा कि आरोपी योजनाबद्ध तरीके से मामले को लंबित कर रहे हैं। आरोपी राजेंद्र मिश्रा विकास दुबे गैंग का सक्रिय सदस्य रहा है।

दो जुलाई 2020 की घटना में आरोपी की सहभागिता रही है। घटना के समय मौके पर जो पुलिसकर्मी थे, उनके बयानों में उसका नाम आया है। वहीं, दूसरी ओर इसी मामले में तत्कालीन एसओ विनय तिवारी के अधिवक्ता द्वारा अदालत से बहस के लिए समय की मांग की गई। इस पर कोर्ट ने 500 सौ रुपये हर्जाना लगा दिया। मामले की सुनवाई शुक्रवार को फिर होगी।
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