बांदा में बड़ा घोटाला: नहीं हुए विकास कार्य! 22 सचिवों ने 1.17 करोड़ का किया फर्जीवाड़ा, जानें कैसे हुआ खुलासा
Banda News: 22 पंचायत सचिवों द्वारा 97 निर्माण कार्यों की फोटो अपलोड करने में खेल करने के मामले का खुलासा हुआ। इसमें पता चला के इन सचिवों ने कहीं पर बिना काम कराए, तो कहीं पर एक ही जगह काम कराने के बाद वही काम अन्य स्थान पर दर्शाकर वही फोटो पोर्टल पर अपलोड की है।
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बांदा जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए जारी राशि में 22 सचिवों ने फर्जीवाड़ा कर 1.17 करोड़ का भ्रष्टाचार कर डाला। इसका खुलासा पंचायती राज विभाग के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल की रेंडम जांच में हुआ है। इसमें कुछ सचिवों ने एक ही फोटो जियोटैग पर कई जगह काम कराना दिखाकर अपलोड की है।
सबसे अधिक फर्जीवाड़ा गर्मी के मौसम में हैंडपंप मरम्मत, रिबोर, तालाब और गड्ढों में पानी भराने सहित अन्य निर्माण कार्य दिखाकर किया गया है। डीपीआरओ ने इन सभी सचिवों से तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। कहा कि संतोषजनक जवाब नहीं होने पर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
जिले के कुछ पंचायत सचिव गांवों की विकास योजनाओं में पलीता लगाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसा ही फर्जीवाड़ा कर भ्रष्टाचार करने का मामला पंचायतीराज विभाग में सामने आया है। इसमें ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए पंचम वित्त और 15वां वित्त आयोग की ओर से जारी की गई धनराशि में किया गया है।
इन कार्यों में हुआ है सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा
वित्तीय वर्ष 2022-23 में जिले की 469 ग्राम पंचायतों में खराब हैंडपंप, नाली, खड़ंजा, हैंडपंप की मरम्मत, रिबोर, तालाबों में पानी भराने समेत अन्य विकास कार्य कराने के लि̣ए 17 करोड़ की पहली किस्त जारी की गई थी। इस धनराशि से अलग-अलग ग्राम पंचायतों में 897 विकास कार्य स्वीकृत किए गए थे।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड हुए हैं कार्य
इन कार्यों की धनराशि सचिवों के माध्यम से पंचायतों के विकास कार्यों में खर्च की जानी थी। धनराशि को विकास कार्यों में खर्च दिखाकर संबंधित सचिवों ने रिपोर्ट विभागीय अफसरों को भेजी दी थी। कार्यों की फोटो पंचायती राज विभाग के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। इसकी रेंडम जांच की गई है।
22 पंचायत सचिवों ने किया है बड़ा घपला
इसमें 22 पंचायत सचिवों द्वारा 97 निर्माण कार्यों की फोटो अपलोड करने में खेल करने के मामले का खुलासा हुआ। इसमें पता चला के इन सचिवों ने कहीं पर बिना काम कराए, तो कहीं पर एक ही जगह काम कराने के बाद वही काम अन्य स्थान पर दर्शाकर वही फोटो पोर्टल पर अपलोड की है। करीब 1.17 करोड़ का फर्जीवाड़ा सामने आया है।
तिंदवारी के सर्वाधिक मामले
सर्वाधिक फर्जीवाड़ा के 51 मामले विकास खंड तिंदवारी की ग्राम पंचायतों में सामने आए हैं। दूसरे नंबर पर बिसंडा विकास खंड है, यहां के 30 कार्य शामिल हैं। जिले के आठ विकास खंडों में से महुआ व बड़ोखर खुर्द ब्लाक का कोई प्रकरण अभी तक सामने नहीं आया है।
ऐसे हुआ है फर्जीवाड़ा
फोटो से फोटो का जियो टैग करना, ब्लैंक फोटो अपलोड करना, एक ही फोटो का अनेकों ग्राम पंचायत में बार-बार जियो टैग करना, सीसी रोड की फर्जी फोटो, गर्मी के मौसम में पुराने हैंडपंप मरम्मत दिखाना, रिबोर व नए हैंडपंप लगाना दिखाना, गड्ढ़ा, तालाब में पानी भराने, पुलिया निर्माण की फर्जी फोटो, कब्रिस्तान की बाउंड्रीवाल, कूड़े के गड्ढों की सफाई, कूड़ा गाड़ी खरीद, नाला और नाली सफाई आदि काम कराना शामिल हैं।
इन सचिवों पर लटकी तलवार
तिंदवारी ब्लाक में पंचायत सचिव प्रभाकर, दिनेश, अजीत पाल, प्रदीप राना, धीरेंद्र कुमार, आकाश वर्मा, नरैनी में सतीश, दिनेश सिंह, बबेरू में कमल यादव, हरिनारायन, शिवलाल, बिसंडा में रामदास, अजीतसिंह अनिल कुमार, अरुण कुशवाहा, अखिलेश, अरविंद कुमार, देवेंद्र, राममूरत, रामचंद्र, प्रमोद कुमार, जसपुरा में योगेश, आनंद मोहन शामिल हैं।
रेंडम चेकिंग में 97 विकास का सहित सामग्री खरीद में ई- स्वराज पोर्टल पर अपलोड फोटो की गलत जियो टैगिंग पाई गई है। इसमें 22 ग्राम पंचायत सचिव शामिल हैं। सभी को नोटिस भेजा है। इनसे तीन दिन में जवाब देने को कहा गया है। जवाब न मिलने पर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। -अजय आनंद सरोज, जिला पंचायत राज अधिकारी