{"_id":"5b7efba842c7924656042bf0","slug":"becoming-care-taker-men-sold-temples-properties-in-fatehpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहले बने मंदिर के कर्ताधर्ता, फिर कर दिया ये खेल, प्रशासन ने कसी कमर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहले बने मंदिर के कर्ताधर्ता, फिर कर दिया ये खेल, प्रशासन ने कसी कमर
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 23 Aug 2018 11:53 PM IST
विज्ञापन
डेमो पिक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी के फतेहपुर जिले में मंदिरों के कर्ताधर्ता (सर्वाकार) बनकर उसकी संपत्तियों को बेच देने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने जिले के ऐसे सभी मंदिरों और मठों की तफ्तीश कराई है, जो करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। पहली नजर में शहर के आधा सैकड़ा से अधिक आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां सामने आई हैं जो मंदिरों की जमीनों पर खड़ी हैं। मामले की जांच अपर जिलाधिकारी को सौंपी गई है।
मंदिरों की जमीनों को बेचने, उनमें काबिज होने और इस पूरे खेल में शामिल सभी लोगों को कार्रवाई की जद में लाने का होमवर्क प्रशासन ने शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन की पड़ताल में शहर के पांच और बिंदकी तहसील के खजुहा के तीन प्रमुख मंदिरों को लेकर जांच कमेटी दस्तावेज खंगालने में लगी है। डीएम ने धार्मिक संपत्तियों की पड़ताल के लिए अपर जिलाधिकारी को जिम्मेदारी दी है। जांच कमेटी सरकारी अभिलेख में मंदिरों की संपत्तियों के हिसाब से उनका भौतिक सत्यापन करने पहुंची तो चौंकानेवाले तथ्य सामने आए।
सैकड़ों बीघे की करोड़ों रुपये की मंदिरों की जमीन में शहर के नामचीन कद्दावर प्लाटिंग करा चुके हैं। कागजों में मंदिर भले ही संपन्न हों, लेकिन हकीकत में जीर्णशीर्ण हालत में हैं। जिलाधिकारी ने कहा है कि किसी भी दशा में संरक्षक कभी मालिक नहीं हो सकते। सवाल दागा, संरक्षक रहते हुए कैसे लोग मंदिर की जमीनें बेचते रहे और इतनी बड़ी संपत्ति में दिनदहाड़े कंक्रीट का जंगल खड़ा हो गया। डीएम ने पूरे खेल में शामिल सभी कर्मचारी, अधिकारी और कारोबारियों और आवासित लोगों पर उत्तरदायित्व निर्धारित कर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मंदिरों की जमीनों को बेचने, उनमें काबिज होने और इस पूरे खेल में शामिल सभी लोगों को कार्रवाई की जद में लाने का होमवर्क प्रशासन ने शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन की पड़ताल में शहर के पांच और बिंदकी तहसील के खजुहा के तीन प्रमुख मंदिरों को लेकर जांच कमेटी दस्तावेज खंगालने में लगी है। डीएम ने धार्मिक संपत्तियों की पड़ताल के लिए अपर जिलाधिकारी को जिम्मेदारी दी है। जांच कमेटी सरकारी अभिलेख में मंदिरों की संपत्तियों के हिसाब से उनका भौतिक सत्यापन करने पहुंची तो चौंकानेवाले तथ्य सामने आए।
विज्ञापन
सैकड़ों बीघे की करोड़ों रुपये की मंदिरों की जमीन में शहर के नामचीन कद्दावर प्लाटिंग करा चुके हैं। कागजों में मंदिर भले ही संपन्न हों, लेकिन हकीकत में जीर्णशीर्ण हालत में हैं। जिलाधिकारी ने कहा है कि किसी भी दशा में संरक्षक कभी मालिक नहीं हो सकते। सवाल दागा, संरक्षक रहते हुए कैसे लोग मंदिर की जमीनें बेचते रहे और इतनी बड़ी संपत्ति में दिनदहाड़े कंक्रीट का जंगल खड़ा हो गया। डीएम ने पूरे खेल में शामिल सभी कर्मचारी, अधिकारी और कारोबारियों और आवासित लोगों पर उत्तरदायित्व निर्धारित कर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन