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सावधान! ये हैं वो 20 तरीके जिनसे टप्पेबाज बनाते हैं आपको अपना शिकार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 28 Nov 2018 11:39 AM IST
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खुद को पुलिस वाला बताकर लूटपाट का भय दिखाए। बाबा के वेश में परिवार के सदस्य पर संकट बताकर डराए। इंजन से मोबिल आयल टपकने का झांसा दे...। ऐसे में हड़बड़ाए नहीं। टप्पेबाजी के ये पैतरे हैं, जिसमें फंसकर पछताना पड़ता है।
टप्पेबाजों के हाथ लगे कीमती सामान (कैश, जेवर...आदि) की बरामदगी की उम्मीद भी न के बराबर है। पुलिस के पास लुटेरों और चोरों पर शिकंजा कसने के लिए तो प्लान है, लेकिन टप्पेबाजी के मामले में हाथ खाली हैं। वजह यह है कि टप्पेबाज ज्यादातर नए-नए ठिकानों को वारदात के लिए चुनते हैं, जिससे पुलिस उनकी लोकेशन ट्रेस नहीं कर पाती है।
सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में वारदात अगर कैद भी हुई तो उनके चेहरे कपड़े या हेलमेट से ढके होते हैं। पुरानों की धरपकड़ हो नहीं पाती, कुकुरमुत्ते के तरह नए-नए गैंग पैदा हो जाते हैं। कानपुर में ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में टप्पेबाजी के बीस तरीके सामने आए हैं, जिससे शातिर शिकार बनते हैं। इस लिए सावधानी आपको ही बरतनी पड़ेगी।
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टप्पेबाजों के हाथ लगे कीमती सामान (कैश, जेवर...आदि) की बरामदगी की उम्मीद भी न के बराबर है। पुलिस के पास लुटेरों और चोरों पर शिकंजा कसने के लिए तो प्लान है, लेकिन टप्पेबाजी के मामले में हाथ खाली हैं। वजह यह है कि टप्पेबाज ज्यादातर नए-नए ठिकानों को वारदात के लिए चुनते हैं, जिससे पुलिस उनकी लोकेशन ट्रेस नहीं कर पाती है।
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सीसीटीवी कैमरे के फुटेज में वारदात अगर कैद भी हुई तो उनके चेहरे कपड़े या हेलमेट से ढके होते हैं। पुरानों की धरपकड़ हो नहीं पाती, कुकुरमुत्ते के तरह नए-नए गैंग पैदा हो जाते हैं। कानपुर में ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में टप्पेबाजी के बीस तरीके सामने आए हैं, जिससे शातिर शिकार बनते हैं। इस लिए सावधानी आपको ही बरतनी पड़ेगी।
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ये हैं टप्पेबाजी की मुख्य तरीके
1- कपड़ों पर गंदगी फेंक कर।
2- छिपकर गुलेर से कार के शीशे तोड़कर।
3- इंजन से मोबिल आयल का टपकना।
4- खुद को पुलिसवाला बताकर लूटपाट का भय दिखाना।
5- बाबा का वेश में परिवार पर संकट का झांसा देकर।
6- एटीएम बूथ पर मदद के नाम पर फंसाना।
7- बैंक में स्लिप या अन्य तरह से मदद करके।
8- सड़क पर नोट गिराकर।
9- ताला-चाबीवाला बनकर।
10- घर में सोना या चांदी गड़ी होने का झांसा देकर।
11- आपसे लिफ्ट मांगकर।
12- नशीला या मिर्च स्प्रे से।
13- नौकरी दिलाने के नाम पर।
14- बच्चे के लिए मदद मांगकर।
15- सड़क पर कील फेंक कर।
16- करीबियों के नाम-पता बताकर।
17- छिपकर गाड़ी के शीशे पर अंडा या दूध डालकर कर।
18- वाहन से घर तक पहुंचाने की बात कहकर
19- गड्डी में नीचे और ऊपर असली नोट, बाकी कागज के टुकड़े थमा कर
20- चोरी का माल बताकर सस्ते में बेचने की बात कहकर।
1- कपड़ों पर गंदगी फेंक कर।
2- छिपकर गुलेर से कार के शीशे तोड़कर।
3- इंजन से मोबिल आयल का टपकना।
4- खुद को पुलिसवाला बताकर लूटपाट का भय दिखाना।
5- बाबा का वेश में परिवार पर संकट का झांसा देकर।
6- एटीएम बूथ पर मदद के नाम पर फंसाना।
7- बैंक में स्लिप या अन्य तरह से मदद करके।
8- सड़क पर नोट गिराकर।
9- ताला-चाबीवाला बनकर।
10- घर में सोना या चांदी गड़ी होने का झांसा देकर।
11- आपसे लिफ्ट मांगकर।
12- नशीला या मिर्च स्प्रे से।
13- नौकरी दिलाने के नाम पर।
14- बच्चे के लिए मदद मांगकर।
15- सड़क पर कील फेंक कर।
16- करीबियों के नाम-पता बताकर।
17- छिपकर गाड़ी के शीशे पर अंडा या दूध डालकर कर।
18- वाहन से घर तक पहुंचाने की बात कहकर
19- गड्डी में नीचे और ऊपर असली नोट, बाकी कागज के टुकड़े थमा कर
20- चोरी का माल बताकर सस्ते में बेचने की बात कहकर।
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बच्चे और महिलाएं भी गैंग भी शामिल
टप्पेबाजों की गैंग में महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल रहते हैं। चौराहों, रेलवे क्रॉसिंग पर बच्चे शीशा या बोनेट साफ करने के दौरान मोबिल ऑयल गिरादेते हैं। फिर दूसरा चालक को इंजन से मोबिल ऑयल टपकने की बात कहता है। कार सवारों के उतरते ही टप्पेबाज कीमती सामान पार कर देते हैं। घटनास्थल के पास महिलाएं भी रहती हैं। टप्पेबाज अगर हत्थे चढ़ा तो महिलाएं बदसलूकी का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर देती हैं।
इसका फायदा उठाकर टप्पेबाज भाग निकलता है। कई बार महिलाएं लिफ्ट मांगकर कार, बाइक आदि में बैठ जाती है। फिर वाहन चालक पर अश्लीलता का आरोप लगाने की धमकी देकर कीमती सामान झटक कर निकल जाती हैं। शादी या अन्य किसी समारोह में गैंग की महिलाएं बच्चों को लेकर पहुंच जाती हैं। वहां खुद को वर या वधू पक्ष का रिश्तेदार बताती हैं और फिर किसी न किसी का सामान समेट कर निकल जाती हैं।
मोबाइल व लैपटॉप उड़ाने से बचते हैं
किदवई नगर में पेट्रोल पंप मालिक से हुई 10 लाख की टप्पेबाजी की घटना को लेकर पड़ताल की गई। पता चला कि कानपुर में यूपी ही नहीं मध्यप्रदेश, दिल्ली तक से टप्पेबाजों के गैंग यहां आकर वारदात को अंजाम देते हैं। टप्पेबाज पूरे परिवार के साथ आते हैं। उनके पास दो और चार पहिया वाहन रहते हैं। शहर में कहीं भी किराये पर मकान लेकर रहते हैं। फिर टप्पेबाजी की स्थान और शिकार तलाशते हैं। टप्पेबाज की निशाने पर अक्सर नगदी और जेवर रहते हैं। मोबाइल और लैपटॉप में खास दिलचस्पी नहीं रखते। दरअसल, मोबाइल से पकड़े जाने का खतरा बना रहता है। वारदात के बाद टप्पेबाज परिवार के साथ दूसरे शहर को कूच कर जाते हैं। इससे पुलिस कि गिरफ्त में नहीं आ पाते हैं।
टप्पेबाजों की गैंग में महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल रहते हैं। चौराहों, रेलवे क्रॉसिंग पर बच्चे शीशा या बोनेट साफ करने के दौरान मोबिल ऑयल गिरादेते हैं। फिर दूसरा चालक को इंजन से मोबिल ऑयल टपकने की बात कहता है। कार सवारों के उतरते ही टप्पेबाज कीमती सामान पार कर देते हैं। घटनास्थल के पास महिलाएं भी रहती हैं। टप्पेबाज अगर हत्थे चढ़ा तो महिलाएं बदसलूकी का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर देती हैं।
इसका फायदा उठाकर टप्पेबाज भाग निकलता है। कई बार महिलाएं लिफ्ट मांगकर कार, बाइक आदि में बैठ जाती है। फिर वाहन चालक पर अश्लीलता का आरोप लगाने की धमकी देकर कीमती सामान झटक कर निकल जाती हैं। शादी या अन्य किसी समारोह में गैंग की महिलाएं बच्चों को लेकर पहुंच जाती हैं। वहां खुद को वर या वधू पक्ष का रिश्तेदार बताती हैं और फिर किसी न किसी का सामान समेट कर निकल जाती हैं।
मोबाइल व लैपटॉप उड़ाने से बचते हैं
किदवई नगर में पेट्रोल पंप मालिक से हुई 10 लाख की टप्पेबाजी की घटना को लेकर पड़ताल की गई। पता चला कि कानपुर में यूपी ही नहीं मध्यप्रदेश, दिल्ली तक से टप्पेबाजों के गैंग यहां आकर वारदात को अंजाम देते हैं। टप्पेबाज पूरे परिवार के साथ आते हैं। उनके पास दो और चार पहिया वाहन रहते हैं। शहर में कहीं भी किराये पर मकान लेकर रहते हैं। फिर टप्पेबाजी की स्थान और शिकार तलाशते हैं। टप्पेबाज की निशाने पर अक्सर नगदी और जेवर रहते हैं। मोबाइल और लैपटॉप में खास दिलचस्पी नहीं रखते। दरअसल, मोबाइल से पकड़े जाने का खतरा बना रहता है। वारदात के बाद टप्पेबाज परिवार के साथ दूसरे शहर को कूच कर जाते हैं। इससे पुलिस कि गिरफ्त में नहीं आ पाते हैं।
डेमो पिक
यहां के हैं टप्पेबाज
दिल्ली का इंदिरापुरम एरिया, शिवली और मूसानगर (कानपुर देहात) के तीन-तीन गांव, घाटमपुर के निवियाखेड़ा, जलालपुर, रेऊना चौकी एरिया, जहानाबाद, फतेहपुर की कंजड़ व मुस्लिम बस्ती, एमपी के उज्जैन व यूपी का शामली। पुलिस ने शामली के टप्पेबाजों केएक गैंग को राडार परलिया है। पुलिस का मानना है कि इसी गैंग ने किदवई नगर में पेट्रोल पंप मालिक से टप्पेबाजी की है। घटना के दिन गैंग की लोकेशन लखनऊ और कानपुर में मिला है।
कानून की किताब में नहीं है टप्पेबाजी शब्द
आईपीसी या सीआरपीसी में टप्पेबाज शब्द नहीं हैं। शहर पुलिस ने ऐसी घटनाओं को टप्पेबाजी का नाम दिया है।
एसएसपी का बयान
शहर में जगह-जगह टप्पेबाजों के गैंग घूम रहे हैं। बाजारों, गलियों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में आए दिन टप्पेबाजी की घटनाएं हो रहीं हैं। टप्पेबाज तरह-तरह से लोगों का झांसा देकर उनकी नगदी व जेवर पार कर रहे हैं। पढ़े-लिखे और व्यापारी भी उनके जाल में फंस रहे हैं। थानेदारों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने-अपने इलाकों में घूमकर लोगों को सावधान करें। सार्वजनिक स्थानों, थाना व पुलिस चौकी में जागरूकता के लिए पोस्टर चस्पा कराएं।- अनंत देव, एसएसपी
दिल्ली का इंदिरापुरम एरिया, शिवली और मूसानगर (कानपुर देहात) के तीन-तीन गांव, घाटमपुर के निवियाखेड़ा, जलालपुर, रेऊना चौकी एरिया, जहानाबाद, फतेहपुर की कंजड़ व मुस्लिम बस्ती, एमपी के उज्जैन व यूपी का शामली। पुलिस ने शामली के टप्पेबाजों केएक गैंग को राडार परलिया है। पुलिस का मानना है कि इसी गैंग ने किदवई नगर में पेट्रोल पंप मालिक से टप्पेबाजी की है। घटना के दिन गैंग की लोकेशन लखनऊ और कानपुर में मिला है।
कानून की किताब में नहीं है टप्पेबाजी शब्द
आईपीसी या सीआरपीसी में टप्पेबाज शब्द नहीं हैं। शहर पुलिस ने ऐसी घटनाओं को टप्पेबाजी का नाम दिया है।
एसएसपी का बयान
शहर में जगह-जगह टप्पेबाजों के गैंग घूम रहे हैं। बाजारों, गलियों और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में आए दिन टप्पेबाजी की घटनाएं हो रहीं हैं। टप्पेबाज तरह-तरह से लोगों का झांसा देकर उनकी नगदी व जेवर पार कर रहे हैं। पढ़े-लिखे और व्यापारी भी उनके जाल में फंस रहे हैं। थानेदारों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने-अपने इलाकों में घूमकर लोगों को सावधान करें। सार्वजनिक स्थानों, थाना व पुलिस चौकी में जागरूकता के लिए पोस्टर चस्पा कराएं।- अनंत देव, एसएसपी