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Kanpur: चमड़ा कारोबारी से ठगी करने वाले बैंकर्स दंपती गिरफ्तार, लैप्स पॉलिसी के नाम पर वसूले थे 41 लाख रुपये

Thu, 21 Nov 2024 01:57 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 21 Nov 2024 01:57 PM IST
सार

Kanpur News: लाल बंगला निवासी चमड़ा कारोबारी से ठगी करने वाले दंपती को साइबर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने जीवन बीमा पॉलिसी के नाम पर 41 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया था।

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Banker couple arrested for cheating a leather trader had collected Rs 41 lakh in the name of lapsed policy
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में जीवन बीमा पॉलिसी का रिटर्न दिलाने करने के नाम पर साइबर ठगों ने एक चमड़ा कारोबारी से 41 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया था। कारोबारी ने साइबर थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने पॉलिसी रिनुअल का झांसा देकर चकेरी के मोहम्मद इस्माइल से 41 लाख की ठगी करने वाले दंपती को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए दंपती एक प्राइवेट बैंक में नौकरी करते हैं।

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अभियुक्त पवन कुमार बलिया और उसकी पत्नी रेनू मऊ की रहने वाली है। साथियों ने लाल बंगला निवासी मोहम्मद इस्माइल के साथ 41 लख रुपए की ठगी की थी। साइबर सेल थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। टीम ने शातिरों के पास से पांच लाख की ज्वेलरी और एक लाख की नगदी भी बरामद की है। 11 लाख रुपये बैंक खाते में फ्रिज किए हैं।

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खुद को पॉलिसी कराने वाली कंपनी का बताया था मैनेजर
बता दें कि चकेरी के लाल बंगला निवासी मोहम्मद इस्माइल (75) चमड़ा कारोबारी हैं। इस्माइल के अनुसार परिवार में दस लोगों की जीवन बीमा पॉलिसी अलग-अलग कंपनियों से कराई गई थी। कोरोना काल में कारोबार ठप होने के कारण वह जीवन बीमा पॉलिसी के प्रीमियम नहीं भर सके। आठ अक्टूबर को उनके पास एक कॉल आया और फोन करने वाले ने खुद को पॉलिसी कराने वाली कंपनी का मैनेजर विपिन आनंद बताते हुए पॉलिसी अनपेड होने की बात कही।

17 से 22 अक्टूबर के बीच में 10.90 लाख जमा कराए
बताया कि थोड़ा पैसा भर दिया जाए, तो अच्छी खासी रिफंड वैल्यू मिल सकती है। इस्माइल ने विपिन की बात पर विश्वास कर लिया। इसके बाद कागजी कार्रवाई के लिए चंदन रेड्डी नाम के शख्स का फोन आया। रिफंड के नाम पर उसने एसटीजीसी, एनओसी चार्ज, फंड चार्ज आदि जमा करवाने व प्रोसेसिंग फीस आदि के लिए 17 से 22 अक्टूबर के बीच में 10.90 लाख रुपये जमा कराए।

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सीए को पत्र दिखाया, तो उन्होंने फर्जी बताया
इसकी रसीदें भी इस्माइल को व्हाट्सएप पर भेजी गई। 28 अक्टूबर को डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनल ऑडिट का एक पत्र व्हाट्सएप पर रिसीव हुआ। इसमें कहा गया कि रिफंड मनी 1.06 करोड़ रुपये है। इसके लिए पीड़ित को 30.14 लाख रुपये जमा करने होंगे। पैसों के लालच में इस्माइल ने 29 अक्टूबर से 8 नवंबर के बीच 30.14 लाख रुपये भी बताए गए अलग-अलग खातों में जमा कर दिए। इस्माइल के मुताबिक 28 अक्टूबर को जब उन्होंने अपने सीए को पत्र दिखाया, तो उन्होंने उसे फर्जी बताया।

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