संकट: कारोबारियों ने 10 करोड़ के नए निर्यात ऑर्डर रोके, कानपुर शिफ्ट हो सकता है चमड़ा उद्योग, ये हैं संकेत
Kanpur News: बांग्लादेश में कारोबारी गतिविधियां लगभग थम सी गई हैं। टेक्सटाइल के साथ ही चमड़ा उद्योग की इकाइयों में तीन दिन की छुट्टी कर दी गई है। शहर के कारोबारियों को कहना है कि कानपुर चमड़ा कारोबार का बड़ा हब है। ऐसे में कंपनियां कानपुर को भी मौका दे सकती हैं।
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बांग्लादेश में बढ़ते संकट के बीच कानपुर के कारोबारियों ने 10 करोड़ रुपये के नए निर्यात ऑर्डर रोक दिए हैं। 100 करोड़ रुपये के भेजे गए कंसाइनमेंट बांग्लादेश के बाॅर्डर पर पहले से ही फंसे हुए हैं। आने वाला एक सप्ताह महत्वपूर्ण है। जानकारों का कहना है कि संकट बरकरार रहा तो निर्यात पर असर पड़ सकता है। संकट का दूसरा पहलू यह भी है कि बांग्लादेश का चमड़ा कारोबार कानपुर व देश-प्रदेश के अन्य शहरों में शिफ्ट हो सकता है। बता दें बांग्लादेश में कपड़े का बड़ा कारोबार तो है ही, चमड़े का कारोबार भी तेजी से बढ़ रहा है।
शहर से बांग्लादेश को चमड़ा, सोल, इंजीनियरिंग, पॉली फिल्म, प्लास्टिक पैकेजिंग फाइबर का निर्यात किया जाता है। वहीं कच्चा और तैयार चमड़े का आयात होता है। बांग्लादेश और कानपुर के बीच सालाना तीन सौ से चार सौ करोड़ का आयात-निर्यात होता है। वहां पर हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। कारोबारियों को भुगतान फंसने का डर है। दरअसल, वहां के बैंकों की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है। कारोबारियों के मुताबिक 80 हजार डॉलर की आवश्यकता है, तो केवल 20 हजार डॉलर ही मिल पा रहा है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन के संयोजक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि पहले के फंसे कंसाइनमेंट को देखते हुए नए निर्यात ऑर्डर रोक दिए गए हैं।
अवसर के ये हैं संकेत
बांग्लादेश में कारोबारी गतिविधियां लगभग थम सी गई हैं। टेक्सटाइल के साथ ही चमड़ा उद्योग की इकाइयों में तीन दिन की छुट्टी कर दी गई है। बांग्लादेश में ताइवान की चमड़ा कंपनियां बड़े पैमाने पर काम करती हैं। यहां के फुटवियर, बेल्ट, पर्स, बैग की यूरोप और अमेरिका में बहुत मांग है। चमड़ा कारोबारियों का कहना है कि जिस तरह कोरोना ने चीन को संकट में डाला था। इससे वह आज तक तक नहीं उबर पाया है। कुछ इसी तरह से बांग्लादेश के चमड़ा उद्योग को भी इस संकट से झटका लग सकता है। वियतनाम, ताइवान की कंपनियां भारत की ओर रुख कर सकती हैं। चूंकि कानपुर चमड़ा कारोबार का बड़ा हब है। ऐसे में कंपनियां कानपुर को भी मौका दे सकती हैं। ऐसे में सरकार को बांग्लादेश की तर्ज पर श्रम बल सस्ता करना चाहिए। कच्चा व तैयार चमड़े में छूट मिलनी चाहिए।
बांग्लादेश के हालात को देखते हुए वहां की चमड़ा इकाइयों में तीन दिन की छुट्टी कर दी गई है। संकट आगे बढ़ेगा तो निश्चित तौर पर कानपुर समेत देशभर के चमड़ा उद्योग को लंबी अवधि में मौका मिल सकता है। ताइवान की कंपनियां वहां से कारोबार की गतिविधियां कम करके देश की ओर रुख कर सकती हैं। -राजेंद्र कुमार जालान, राष्ट्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद
बांग्लादेश में काम कर रही विदेशी कंपनियों के लिए कानपुर समेत भारत एक बेहतर विकल्प हो सकता है। भारत में सबसे ज्यादा स्थिरता है। हालांकि बांग्लादेश की तुलना में 18-20 प्रतिशत श्रम बल सस्ता करना होगा। कच्चा और तैयार चमड़ा पर सरकार को सब्सिडी देनी होगी और इस अवसर को दिलाने में मदद करनी चाहिए। -यादवेंद्र सचान, सदस्य चर्म निर्यात परिषद और निर्यातक
इस महीने से त्योहार शुरू हो जाएंगे। बांग्लादेश में इस समय उद्योग बंद हो गए हैं। त्योहार के कारण मांग तेज होगी, तो वहां की कंपनियां अपने ऑर्डर कानपुर या प्रदेश के अन्य कारोबारियों को दे सकती हैं। -मनोज बंका, अध्यक्ष ,नार्दर्न इंडिया होजरी मैन्यूक्चरर एसोसिएशन