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तोमाय हृदॉय माझे राख्बो...
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 13 Apr 2015 03:07 AM IST
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‘तोमाय हृदॉय माझे राख्बो छेड़े देबोना... ’ जैसे गीतों पर रविवार को बांग्ला गायिका लोपामुद्रा मित्रा ने बांग्ला महोत्सव में समा बांध दिया। मौका था सामाजिक संस्था ‘उत्सारण’ की ओर से लाजपत भवन में आयोजित बांग्ला मेले का। कार्यक्रम के दूसरे दिन भी कोलकाता ज्वैलरी और पुस्तक मेला आकर्षण का केंद्र रहा।
इससे पहले साहित्यकारों ने बांग्ला साहित्य पर विचार व्यक्त किए। लोपामुद्रा के साथ वाद्य यंत्रों पर टाफी (लीड गिटार), टुक्का (बेस गिटार) , सोंतु (रिदम यंत्र), बाबन (आक्टो पैड) , कुनाल (की बोर्ड), श्यामल और जोय (ध्वनि नियंत्रण) ने भी चार चांद लगाए।
जैसे ही लोपामुद्रा ने गीत गाना शुरू किया तो दर्शक गीतों को मन में ही गुनगुनाने लगे। उन्होंने ‘होबू चंद्र’... ‘जाओ पाखी’.. ‘देरे नाना’...बेनी माधव आदि गीतों से दर्शकों मनोरंजन किया। इससे पहले मेले में बांग्ला साहित्य पर ‘साहित्य परिचर्चा’ हुई। इसमें कोलकाता से आए प्रसिद्ध साहित्यकार उल्हास मल्लिक ने अपनी दो नई रचनाओं का जिक्र किया।
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उनके साथ ही साहित्यकार बारेन सरकार, कमाल राय, लीना बोस, गौरी दास, मृदुल घोष विश्वास आदि ने भी विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता बीके मिस्त्री ने की और संचालन बापी चक्रवर्ती ने किया।
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इससे पहले साहित्यकारों ने बांग्ला साहित्य पर विचार व्यक्त किए। लोपामुद्रा के साथ वाद्य यंत्रों पर टाफी (लीड गिटार), टुक्का (बेस गिटार) , सोंतु (रिदम यंत्र), बाबन (आक्टो पैड) , कुनाल (की बोर्ड), श्यामल और जोय (ध्वनि नियंत्रण) ने भी चार चांद लगाए।
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जैसे ही लोपामुद्रा ने गीत गाना शुरू किया तो दर्शक गीतों को मन में ही गुनगुनाने लगे। उन्होंने ‘होबू चंद्र’... ‘जाओ पाखी’.. ‘देरे नाना’...बेनी माधव आदि गीतों से दर्शकों मनोरंजन किया। इससे पहले मेले में बांग्ला साहित्य पर ‘साहित्य परिचर्चा’ हुई। इसमें कोलकाता से आए प्रसिद्ध साहित्यकार उल्हास मल्लिक ने अपनी दो नई रचनाओं का जिक्र किया।
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उनके साथ ही साहित्यकार बारेन सरकार, कमाल राय, लीना बोस, गौरी दास, मृदुल घोष विश्वास आदि ने भी विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता बीके मिस्त्री ने की और संचालन बापी चक्रवर्ती ने किया।