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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Banda obscene videos were shared in 47 countries the boy said his wife also exploited him Interpols pen drive

UP: 47 देशों में साझा किए थे अश्लील वीडियो, बालक बोला- पत्नी भी करती थी शोषण, इंटरपोल की पेनड्राइव ने खोले राज

Sun, 22 Feb 2026 07:00 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 22 Feb 2026 07:00 AM IST
सार

Banda News: सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि बांदा के जेई रामभवन ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर 34 मासूमों का यौन शोषण किया और अश्लील वीडियो 47 देशों में बेचे। पीड़ितों की काउंसलिंग और सीबीआई की कड़ी मेहनत ने दोषियों को फांसी की दहलीज तक पहुंचाया।

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Banda obscene videos were shared in 47 countries the boy said his wife also exploited him Interpols pen drive
आरोपी दंपती - फोटो : amar ujala

विस्तार

बांदा जिले में रामभवन पर प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन करने वाली सीबीआई टीम जब कड़ियां जोड़ने लगी तो उसे भी पसीना आ गया था। पूरा मामला इन दिनों में चर्चा में चल रहे एपस्टीन कांड जैसा था। रामभवन ने ब्राजील, अमेरिका, चीन, अफगानिस्तान समेत करीब 47 देशें में अश्लील वीडियो सांझा किए थे।

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सीबीआई के लोक अभियोजक दारा सिंह मीना ने बताया कि इंटरपोल ने 17 अक्टूबर 2020 को सीबीआई को जानकारी दी। इसमें 34 बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो और 679 फोटो वाली पेन ड्राइव थी। सीबीआई ने 31 अक्टूबर 2020 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में रामभवन ने 34 बच्चों के 79 वीडियो बनाए थे। इन वीडियो को 47 देशों में बेचकर करोड़ों रुपये कमाए गए थे। उसकी पत्नी दुर्गावती भी इस काम में सहयोगी थी।

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जेई के जाने के बाद पत्नी भी करती थी शारीरिक शोषण
यदि आप वह अश्लील वीडियो देखें और किसी भी पीड़ित बच्चे से उनका दर्द साझा करते तो निश्चित ही आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे...आपको गुस्सा आना तय है। दोनों की हैवानियत सुनकर फांसी की सजा भी कम लगेगी। इस कड़ी में एक पीड़ित बालक से बात हुई। हालांकि इस समय उसकी उम्र 18 वर्ष है। वह हमीरपुर के एक गांव का रहने वाला है।

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फैसले के बाद दोषी दुर्गावती को न्यायलय से ले जातीं महिला पुलिसकर्मी - फोटो : amar ujala

कपड़े व जूते भी दिलाए थे
उसने बताया कि करीब 10 वर्ष पहले वह रामभवन के संपर्क में आया था। उसने बताया कि दोनों ने पहले मजदूर पिता का भरोसा जीता, इसके बाद उसे अपने घर ले जाकर लाइव वीडियो गेम खेलने को दिया। यह सिलसिला करीब 15 दिन चला था। इस बीच उसने अच्छा खाना देने के अलावा कपड़े व जूते भी दिलाए थे। एक दिन अचानक उसने अश्लील वीडियो दिखाकर गलत काम करना शुरू कर दिया।

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दुर्गावती भी करती थी शारीरिक शोषण
वह जब चिल्लाया तो उसकी पत्नी (जो पहले से दरवाजे पर बैठी थी) ने डंडा लाकर दिया इसके बाद उसकी जमकर पिटाई हुई। इसके बाद रामभवन ने उसका शोषण किया और दुर्गावती वीडियो बनाती रही थी। बालक ने बताया कि अभी जुल्म की हदें पूरी नहीं हुई थीं। जब रामभवन घर के बाहर जाता, तो दुर्गावती उसका शारीरिक शोषण करती थी।

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सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट से मुंह बांधकर निकाला रामभवन - फोटो : amar ujala

आज भी वह स्कूल नहीं जाता
इससे उसके शरीर में कई स्थानों पर घाव हो गए थे। मना करने पर पीटती थी। यह भयानक मंजर करीब दो वर्ष तक चला था। इसके बाद नहर का काम पूरा होने के बाद दोनों चले गए लेकिन वह इस दर्द से आज भी ऊबर नहीं पाया है। आज भी वह स्कूल नहीं जाता है। सीबीआई वाले अंकल जब कोर्ट ले गए थे, तो वहां उसने सारी बात बता दी थीं।

काउंसलिंग के बाद बयान देने को तैयार हुए पीड़ित बच्चे
लोक अभियोजक दारा सिंह मीना ने बताया कि जिन बच्चों का शोषण हुआ उसमें आठ हमीरपुर, 11 चित्रकूट और 15 बच्चे बांदा जिले के शामिल थे। इन सभी की चाइल्ड लाइव संस्था के सहयोग से काउंसलिंग की गई। जिससे वह बयान देने को तैयार हुए।

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सीबीआई के दरोगा पुरुषोत्तम कुमार व सीबीआई के लोक अभियोजक दारा सिंह - फोटो : amar ujala

बयान के दौरान दोनों की पहचान भी की थी
सबसे पहले बच्चों का भरोसा जीता और उन्हें विश्वास दिलाया था कि अब वह सुरक्षित हैं, तब जांच आगे बढ़ सकी थी। सभी बच्चों ने बयान के दौरान दोनों की पहचान भी की थी। जिससे रिपोर्ट दर्ज करने और फांसी तक पहुंचाने में बहुत मदद मिली। बताया कि बच्चों का उपचार एम्स में कराने के बाद आज सभी स्वस्थ हैं।

रामभवन अब कैदी नंबर 40, दुर्गावती कैदी नंबर 41 से जानी जाएगी
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोषी दंपती की करवट बदल कर रात गुजरी। रामभवन रात 11 बजे तक बैरक नंबर तीन बी में टहलता रहा। मौत की सजा पाए रामभवन अब जेल में 40 नंबर कैदी से पहचाना जाएगा। जबकि सह दोषी उसकी पत्नी दुर्गावती की नई पहचान कैदी नंबर 41 होगी। मंडल कारागार प्रशासन ने दोनों को सीटी नंबर आवंटित कर दिए हैं।

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आरोपी के मकान को जाने वाली गली में पसरा सन्नाटा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

बैरक में बेचैन हालत में टहलता रहा
अब इन नंबरों से ही उनकी पहचान होगी। सजा सुनाए जाने के बाद देर शाम रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती जेल पहुंचे थे।जेल प्रशासन ने रामभवन को बैरक नंबर तीन बी में रखा था। जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती को बैरक नंबर 13 में बंद किया गया है। रामभवन रात में 11 बजे तक अपनी बैरक में बेचैन हालत में टहलता रहा। उसे नींद नहीं आई।

साथी बंदी भी उससे किनारा बनाए रहे
साथी बंदी भी उससे किनारा बनाए रहे। इसी तरह से इस घिनौने कृत्य में शामिल उसकी सह दोषी पत्नी दुर्गावती भी अपनी बैरक में गुमसुम बैठी दिखी। जेलर आलोक कुमार ने बताया कि रामभवन को कैदी नंबर 40 मिला है। जबकि उसकी पत्नी दुर्गावती को 41 नंबर दिया गया है। अब उनकी जेल में पहचान 40 और 41 नंबर से होगी।

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