बांदा: श्रद्धा-भक्ति के साथ निकली ज्वारा यात्रा, बुंदेली उमांह गीतों संग गूंजे जयकारे, बागैन नदी में विसर्जन
Banda News: बदौसा कस्बे में शारदीय नवरात्र के समापन पर श्रद्धा और उल्लास के साथ ज्वारा यात्रा निकाली गई। बंगाली पुरवा, हड़हामाफी रोड, स्टेशन रोड, बांदा रोड सहित विभिन्न मोहल्लों से महिलाओं ने सिर पर ज्वारे रखकर पारंपरिक बुंदेली उमांह गीत गाए और देवी जयकारों के साथ बागैन नदी में ज्वारों का विसर्जन किया।
विस्तार
बांदा जिले में शारदीय नवरात्र के समापन पर बदौसा कस्बे में श्रद्धा और भक्ति के साथ ज्वारा विसर्जन किया गया। विभिन्न मोहल्लों से निकली ज्वारा यात्राओं में महिलाओं ने सिर पर ज्वारे रखे और बुंदेली उमांह व देवी गीत गाते हुए बागैन नदी पहुंचीं। इससे पहले देवाला में आरती की गई। ढोलक-नगड़िया की थाप और माता रानी के जयकारों से कस्बे का वातावरण भक्तिमय रहा।
बंगाली पुरवा, हड़हामाफी रोड, स्टेशन रोड, बांदा रोड, कर्वी रोड, नदी टोला, केवटरा और पुरानी बाजार सहित विभिन्न इलाकों से ज्वारा यात्राएं निकाली गईं। महिलाओं की टोलियां पारंपरिक गीत गाते हुए आगे बढ़ीं। श्रद्धालुओं ने रीति-रिवाजों के अनुसार बागैन नदी में ज्वारों का विसर्जन किया।
उमांह गीतों में किया मां दुर्गा का गुणगान
ज्वारा विसर्जन के दौरान महिलाओं ने बुंदेली उमांह गीतों के माध्यम से मां दुर्गा की महिमा का गुणगान किया। गीतों में मां के प्रति श्रद्धा, परिवार की सुख-समृद्धि और गांव की खुशहाली की कामना की गई। महिलाओं की सामूहिक गायकी ने आयोजन में बुंदेली लोकसंस्कृति के रंग भर दिए।
देवाला की आरती के बाद बागैन नदी में विसर्जन
ज्वारा यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने देवाला में आरती की और मां दुर्गा का स्मरण करते हुए बागैन नदी की ओर प्रस्थान किया। ढोलक-नगड़िया और उमांह गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार ज्वारों का विसर्जन किया।
परंपराओं को जीवित रखने का अवसर भी
बुंदेलखंड में ज्वारा विसर्जन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोकगीतों, सामूहिक सहभागिता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को जीवित रखने का अवसर भी है। बदौसा में आयोजित इस कार्यक्रम ने क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और मां दुर्गा के प्रति लोगों की अटूट आस्था को दर्शाया।