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Kanpur News: सिख दंगे के आरोपी की जमानत अर्जियां खारिज
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कानपुर। वर्ष 1984 में हुए सिख दंगे से संबंधित दो मुकदमों में आरोपी 76 वर्षीय ओंकार सिंह उर्फ ओंकारनाथ शुक्ला की जमानत अर्जी अपर जिला जज प्रथम सुदामा प्रसाद ने खारिज कर दी है। ओंकार तीन साल से जेल में बंद है। उसके मौसेरे भाई ने जमानत अर्जियां दाखिल की थीं।
गोविंदनगर थाने में एक रिपोर्ट जोगिंदर सिंह और दूसरी रिपोर्ट मनजीत कौर ने दर्ज कराई थी। जोगिंदर का आरोप था कि एयरफोर्स से सेवानिवृत्त हुआ उनका भतीजा पत्नी शीला रानी, बेटे दलजीत सिंह व रविनाथ सिंह के साथ दादानगर स्थित नगर महापालिका कालोनी में रहता था। एक नवंबर 1984 को बलवाइयों ने घर पर हमला कर दिया था। सोना, चांदी, नकदी व सामान लूटने के बाद चारों सदस्यों को जलाकर मार डाला था।
वहीं दादानगर स्थित नगर महापालिका कालोनी निवासी मनजीत का आरोप था कि असामाजिक तत्वों ने उसके घर पर हमला बोलकर सारा सामान लूट लिया था और पति को मारपीट कर जला दिया था। इलाज के दौरान पति की मौत हो गई थी। दोनों मुकदमों में पहले एफआर लग गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में पारित आदेश के बाद गृह विभाग ने एसआईटी गठित कर दोबारा जांच कराई और दोनों मुकदमों में 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी थी।
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जमानत अर्जी में ओंकार की ओर से तर्क रखा गया कि ओंकार बाल्यकाल से ही साधू है। वह गुरु रमेश दासजी के आश्रम हनुमानगढ़ी अयोध्या में रहकर पूजा पाठ करता है। उसे आश्रम से गिरफ्तार कर 18 सितंबर 2022 को जेल भेजा गया था। अभियोजन ने तर्क रखा कि ओंकार नामजद नहीं था लेकिन विवेचना के दौरान उसका नाम सामने आया था। वह पहचान छिपाकर अयोध्या में रह रहा था। कोर्ट ने गंभीर अपराध मानकर ओंकार की दोनों जमानत अर्जियां खारिज कर दीं।
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गोविंदनगर थाने में एक रिपोर्ट जोगिंदर सिंह और दूसरी रिपोर्ट मनजीत कौर ने दर्ज कराई थी। जोगिंदर का आरोप था कि एयरफोर्स से सेवानिवृत्त हुआ उनका भतीजा पत्नी शीला रानी, बेटे दलजीत सिंह व रविनाथ सिंह के साथ दादानगर स्थित नगर महापालिका कालोनी में रहता था। एक नवंबर 1984 को बलवाइयों ने घर पर हमला कर दिया था। सोना, चांदी, नकदी व सामान लूटने के बाद चारों सदस्यों को जलाकर मार डाला था।
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वहीं दादानगर स्थित नगर महापालिका कालोनी निवासी मनजीत का आरोप था कि असामाजिक तत्वों ने उसके घर पर हमला बोलकर सारा सामान लूट लिया था और पति को मारपीट कर जला दिया था। इलाज के दौरान पति की मौत हो गई थी। दोनों मुकदमों में पहले एफआर लग गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में पारित आदेश के बाद गृह विभाग ने एसआईटी गठित कर दोबारा जांच कराई और दोनों मुकदमों में 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी थी।
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जमानत अर्जी में ओंकार की ओर से तर्क रखा गया कि ओंकार बाल्यकाल से ही साधू है। वह गुरु रमेश दासजी के आश्रम हनुमानगढ़ी अयोध्या में रहकर पूजा पाठ करता है। उसे आश्रम से गिरफ्तार कर 18 सितंबर 2022 को जेल भेजा गया था। अभियोजन ने तर्क रखा कि ओंकार नामजद नहीं था लेकिन विवेचना के दौरान उसका नाम सामने आया था। वह पहचान छिपाकर अयोध्या में रह रहा था। कोर्ट ने गंभीर अपराध मानकर ओंकार की दोनों जमानत अर्जियां खारिज कर दीं।