बैक्टीरियल कल्चर बढ़ाएगा बीजों का उत्पादन व गुणवत्ता, सीएसए में शॉर्ट टर्म कोर्स की शुरुआत
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सीएसए के कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस कोर्स में 50 छात्र-छात्राएं हैं, जिसमें 45 छात्र-छात्राएं 10 राज्यों से आए हैं। पांच छात्र सीएसए के हैं। प्रशिक्षण शिविर में करीब छह राज्यों के कृषि वैज्ञानिक बीजों के उत्पादन की आधुनिक तकनीक बताएंगे। डॉ. वी संकरन ने बताया कि बीजों को बोने से पहले एक किलो बीज में 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा पाउडर मिलाना चाहिए। इसी प्रोसेस को बैक्टीरियल कल्चर कहते हैं। उन्होंने बताया कि बीजों को बोने केबाद समय-समय पर खरपतवार हटाते रहना चाहिए।
आईएआरआई नई दिल्ली की डॉ. सुदीप्ता बसु ने बीज उत्पादन में पॉलिनेशन तकनीक केबारे में बताया। सीएसए के प्रो. सीएल मौर्या ने बताया शिविर में पुडुचेरी, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, उप्र समेत 10 राज्यों के छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण ले रहे हैं।
वरिष्ठ वैज्ञानिकों से बीज उत्पादन की नई तकनीक जानने को मिल रही है। सुबह केसेशन में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। मुनीष रॉय, कोच बिहार, पश्चिम बंगाल
पढ़ाई पूरी कर बीजों से संबंधित स्टार्टअप खोलने की सोच रही हूं। इस कोर्स से मेरे बहुत सारे संशय दूर हो रहे हैं। सायली मगर, अकोला, महाराष्ट्र
मेंटेनेंस ब्रीडिंग और बीज उत्पादन के विषय में देश के जाने माने वैज्ञानिकों से जानने को मिल रहा है। ढेरों भ्रम दूर हो रहे हैं। अंजली जोशी, पंत नगर, उत्तराखंड
देश के बडे़ वैज्ञानिकों से बातचीत करने का मौका मिल रहा है। यहां समस्याओं के निदान के साथ नई जानकारियों भी मिल रही हैं। विनय कुमार, सोलन, हिमाचल प्रदेश