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Kanpur News: ऊसर भूमि पर भी पैदा होगा आजाद जौ, सीएसए ने विकसित की नई प्रजाति
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कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि (सीएसए) के वैज्ञानिकों ने जौ की नई प्रजाति आजाद जौ (केबी-2031) विकसित की है। यह प्रजाति ऊसर भूमि पर भी अच्छी पैदावार देगी और झुलसा रोग से सुरक्षित रहेगी।
केंद्र सरकार ने इसे पूरे भारत में बोई जाने वाली प्रजातियों की सूची में शामिल किया है। इसके साथ उप्र, बिहार, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, असम, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड समेत सभी गेहूं और जौ उत्पादन वाले क्षेत्रों में खेती की अनुमति दी है।
सीएसए के वैज्ञानिकों ने बंजर भूमि को भी इस्तेमाल करने का रास्ता खोज निकाला है। विवि में विकसित जौ की नई प्रजाति आजाद की खेती से 35 लाख हेक्टेअर ऊसर भूमि भी काम में आएगी। सीएसए के कृषि विज्ञानी एवं जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग के विभागाध्यक्ष डाॅ. विजय कुमार यादव और उनकी टीम ने इस प्रजाति को विकसित किया है।
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यह 134 दिन में तैयार हो जाती है। हालांकि सामान्य भूमि पर इसका उत्पादन अधिक और ऊसर पर थोड़ा कम रहेगा। एक हेक्टेयर में 38 क्विंटल तक जौ का उत्पादन होगा। इसे झुलसा रोग प्रतिरोधक बनाने में भी सफलता मिली है। इस जौ में प्रोटीन की मात्रा सामान्य जौ प्रजातियों के मुकाबले 12.15 प्रतिशत अधिक है। जौ की अन्य प्रजातियों की औसत पैदावार 20 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
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केंद्र सरकार ने इसे पूरे भारत में बोई जाने वाली प्रजातियों की सूची में शामिल किया है। इसके साथ उप्र, बिहार, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, असम, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड समेत सभी गेहूं और जौ उत्पादन वाले क्षेत्रों में खेती की अनुमति दी है।
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सीएसए के वैज्ञानिकों ने बंजर भूमि को भी इस्तेमाल करने का रास्ता खोज निकाला है। विवि में विकसित जौ की नई प्रजाति आजाद की खेती से 35 लाख हेक्टेअर ऊसर भूमि भी काम में आएगी। सीएसए के कृषि विज्ञानी एवं जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग के विभागाध्यक्ष डाॅ. विजय कुमार यादव और उनकी टीम ने इस प्रजाति को विकसित किया है।
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यह 134 दिन में तैयार हो जाती है। हालांकि सामान्य भूमि पर इसका उत्पादन अधिक और ऊसर पर थोड़ा कम रहेगा। एक हेक्टेयर में 38 क्विंटल तक जौ का उत्पादन होगा। इसे झुलसा रोग प्रतिरोधक बनाने में भी सफलता मिली है। इस जौ में प्रोटीन की मात्रा सामान्य जौ प्रजातियों के मुकाबले 12.15 प्रतिशत अधिक है। जौ की अन्य प्रजातियों की औसत पैदावार 20 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।