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Auraiya: आवारा कुत्ते ने मासूम की गर्दन में काटा, मौत से परिजनों में मचा कोहराम
Wed, 12 Nov 2025 07:51 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 12 Nov 2025 07:51 PM IST
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इसमोल की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बिधूना क्षेत्र के गांव कुसमरा में 24 अक्तूबर को घर के बाहर खेल रहे एक छह वर्षीय मासूम की गर्दन में एक कुत्ते ने काट लिया। परिजनों ने उसका इलाज कराया। मासूम को एंटी रैबीज के तीन डोज भी दिए गए, इसके बाद भी उसकी हालत बिगड़ती गई। मंगलवार को इलाज के दौरान दिल्ली के एक अस्पताल में बच्चे ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत से परिजन बदहवास हैं। मासूम के शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है।
रुरुगंज चौकी क्षेत्र के गांव कुसमरा निवासी धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उसका छह वर्षीय बेटा इसमोल 24 अक्तूबर को घर के बाहर खेल रहा था। तभी एक आवारा कुत्ते ने पीछे से आकर उसकी गर्दन में काट लिया। इस पर वे लोग उसे बिधूना सीएचसी ले गए। जहां उपचार के दौरान एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाया। यही नहीं 28 अक्तूबर व तीन नवंबर को एंटी रेबीज के दो अन्य डोज भी लगवाए। कुछ दिन बाद एकाएक इसमोल की हालत बिगड़ने लगी।
इस पर उसे बिधूना से लेकर चिचौली जिला अस्पताल में दिखाया गया। आराम न मिलने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले गए। जहां उसका उपचार चल रहा था। मंगलवार शाम इसमोल ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इसमोल तीन भाइयों में सबसे छोटा था। घटना से मां भावना, भाई ओमजी और यश समेत अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। बुधवार सुबह इसमोल के शव का गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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चेहरे व उसके आसपास काटना होता है खतरनाक
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि यदि हाथ- पैर में कुत्ता काटता है तो रैबीज का वायरस सिर तक पहुंचने में समय लेता है। तब तक एंटी रैबीज डोज काम कर जाती है और मरीज बच सकता है। इसके विपरीत यदि कुत्ता या बंदर किसी के चेहरे और गर्दन पर काटता है तो वायरस तेजी से सिर तक पहुंच जाता है। आशंकहहै कि उक्त बच्चे के प्रकरण में भी ऐसा ही कुछ हुआ होगा, जिससे उसकी जान पर बन आई।
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रुरुगंज चौकी क्षेत्र के गांव कुसमरा निवासी धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उसका छह वर्षीय बेटा इसमोल 24 अक्तूबर को घर के बाहर खेल रहा था। तभी एक आवारा कुत्ते ने पीछे से आकर उसकी गर्दन में काट लिया। इस पर वे लोग उसे बिधूना सीएचसी ले गए। जहां उपचार के दौरान एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाया। यही नहीं 28 अक्तूबर व तीन नवंबर को एंटी रेबीज के दो अन्य डोज भी लगवाए। कुछ दिन बाद एकाएक इसमोल की हालत बिगड़ने लगी।
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इस पर उसे बिधूना से लेकर चिचौली जिला अस्पताल में दिखाया गया। आराम न मिलने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले गए। जहां उसका उपचार चल रहा था। मंगलवार शाम इसमोल ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इसमोल तीन भाइयों में सबसे छोटा था। घटना से मां भावना, भाई ओमजी और यश समेत अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। बुधवार सुबह इसमोल के शव का गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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चेहरे व उसके आसपास काटना होता है खतरनाक
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि यदि हाथ- पैर में कुत्ता काटता है तो रैबीज का वायरस सिर तक पहुंचने में समय लेता है। तब तक एंटी रैबीज डोज काम कर जाती है और मरीज बच सकता है। इसके विपरीत यदि कुत्ता या बंदर किसी के चेहरे और गर्दन पर काटता है तो वायरस तेजी से सिर तक पहुंच जाता है। आशंकहहै कि उक्त बच्चे के प्रकरण में भी ऐसा ही कुछ हुआ होगा, जिससे उसकी जान पर बन आई।